UGC Rules Hearing : सीजेआइ सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ याचिकाओं पर करेगी विचार
नई दिल्ली, 28 जनवरी। UGC Rules Hearing : उच्च शिक्षा से जुड़े नए यूजीसी नियमों को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत में अहम सुनवाई होने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट गुरुवार, 29 जनवरी को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा) रेगुलेशन, 2026 को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई करेगा।
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस बागची की बेंच करेगी सुनवाई
UGC Rules Hearing : सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर प्रकाशित कॉज लिस्ट के अनुसार, इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआइ) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ द्वारा की जाएगी। यह मामला देशभर में शिक्षा और समानता से जुड़े गंभीर सवालों को जन्म दे रहा है।
अर्जेंट लिस्टिंग के बाद मिली सुनवाई की मंजूरी
इससे पहले दिन में याचिकाकर्ता की ओर से मामले को अर्जेंट लिस्टिंग के लिए मेंशन किया गया था, जिस पर सीजेआइ सूर्यकांत ने सहमति जताई। उन्होंने याचिकाकर्ता के वकील को भरोसा दिलाया कि याचिका में बताई गई तकनीकी कमियां दूर होते ही मामले को सूचीबद्ध किया जाएगा।
सीजेआइ ने कहा, “हमें पता है कि क्या हो रहा है। कमियां दूर कीजिए, हम सुनवाई के लिए इसे सूचीबद्ध करेंगे।”
‘सामान्य वर्ग के साथ भेदभाव’ का आरोप
UGC Rules Hearing : याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई है कि नए यूजीसी नियम सामान्य वर्ग के लोगों के साथ भेदभाव कर सकते हैं और उन्हें प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र से वंचित किया जा रहा है।
याचिका में कहा गया है कि यह ढांचा गैर-एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों से जुड़े व्यक्तियों को शिकायत प्रणाली से बाहर रखकर भेदभाव को संस्थागत रूप देता है।
जाति आधारित परिभाषा पर गंभीर सवाल
UGC Rules Hearing : याचिका में तर्क दिया गया है कि नियमों में ‘जाति आधारित भेदभाव’ की परिभाषा को केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग तक सीमित कर दिया गया है। इससे सामान्य या उच्च जातियों से जुड़े व्यक्तियों को कानूनी सुरक्षा से बाहर कर दिया गया है, चाहे उनके साथ हुआ भेदभाव कितना भी गंभीर क्यों न हो।
नियमों में संशोधन तक अंतरिम व्यवस्था की मांग
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी आग्रह किया है कि जब तक नियम 3(सी) में पुनर्विचार या संशोधन नहीं होता, तब तक समान अवसर केंद्र, इक्विटी हेल्पलाइन, जांच तंत्र और लोकपाल की कार्यवाही गैर-भेदभावपूर्ण और जाति-तटस्थ तरीके से संचालित की जाए।
संविधान के अनुच्छेदों के उल्लंघन का दावा
UGC Rules Hearing : याचिका में कहा गया है कि जाति पहचान के आधार पर शिकायत निवारण तंत्र तक पहुंच से इनकार करना संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) और 21 का उल्लंघन है और यह अस्वीकार्य राज्य भेदभाव की श्रेणी में आता है।







