कोलकाता, 29 अप्रैल । Bengal Record Voting : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दो चरणों में हुए मतदान ने लोकतांत्रिक भागीदारी के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने राज्य की जनता को बधाई देते हुए उनके उत्साह, जागरूकता और लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की है। बुधवार शाम को जारी आधिकारिक बयान में उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में इतने बड़े पैमाने पर मतदान हुआ है, जो लोकतांत्रिक परिपक्वता का प्रतीक है।
कर्तव्य को लेकर सजग हुए मतदाता
Bengal Record Voting : मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि पहले और दूसरे दोनों चरणों में रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया है, जो यह दर्शाता है कि राज्य के मतदाता अपने अधिकारों और कर्तव्यों को लेकर पहले से अधिक सजग हुए हैं। उन्होंने इस उपलब्धि को केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि लोकतंत्र के प्रति जनता के गहरे विश्वास का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की भागीदारी किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इतना हुआ मतदान प्रतिशत
Bengal Record Voting : भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दूसरे चरण के मतदान के दिन शाम 7:45 बजे तक कुल 91.66 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। वहीं, पहले चरण में 23 अप्रैल को 93.19 प्रतिशत मतदान हुआ था, जो पहले ही एक रिकॉर्ड माना जा रहा था। यदि दोनों चरणों के आंकड़ों को मिलाया जाए, तो कुल औसत मतदान प्रतिशत 92.47 फीसदी के करीब पहुंचता है, जो अपने आप में एक अभूतपूर्व उपलब्धि है।
मतदान के प्रतिशत में बढ़ोतरी की संभावना
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय ने बताया कि यह आंकड़े अभी अंतिम नहीं हैं, क्योंकि कई मतदान केंद्रों पर शाम 6 बजे के बाद भी मतदाताओं की लंबी कतारें लगी हुई थीं। ऐसे में अंतिम मतदान प्रतिशत में और वृद्धि होने की संभावना है। अंतिम आंकड़े देर रात या अगले दिन सुबह तक जारी किए जा सकते हैं।
चुनाव आयोग ने इस बार मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए थे। सभी मतदान केंद्रों पर लाइव वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई थी, जिससे मतदान प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रखी जा सके। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्वयं निर्वाचन आयुक्त डॉ. एसएस संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ मिलकर इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी की।
सुरक्षा पर विशेष ध्यान
Bengal Record Voting : सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से भी इस बार चुनाव आयोग ने विशेष ध्यान दिया। पूरे राज्य में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 2,407 कंपनियों को तैनात किया गया था, ताकि मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो सके। इसके अलावा, 142 सामान्य पर्यवेक्षकों और 95 पुलिस पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई थी, जो लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। यह संख्या पिछले चरण की तुलना में अधिक थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आयोग किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को लेकर सतर्क था।
कुछ स्थानों पर छिटपुट हिंसा
हालांकि कुछ स्थानों पर छिटपुट हिंसा और झड़पों की खबरें सामने आईं, लेकिन कुल मिलाकर मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रही। मतदाताओं ने भी पूरे उत्साह और जिम्मेदारी के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग किया। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक हर वर्ग के लोगों ने मतदान में भाग लिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि लोकतंत्र के प्रति लोगों का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।
पूर्वी बर्दवान में सर्वाधिक मतदान
Bengal Record Voting : जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो पूर्वी बर्दवान जिले में सबसे अधिक 93.39 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पूरे राज्य में सबसे अधिक रहा। वहीं, कोलकाता (दक्षिण) निर्वाचन क्षेत्र में सबसे कम 87.25 प्रतिशत मतदान हुआ। इसके बावजूद यह प्रतिशत भी अन्य राज्यों की तुलना में काफी अधिक माना जा रहा है।
दो चरणों में मतदान
पहले चरण में कुल 152 विधानसभा सीटों के लिए मतदान हुआ था, जबकि दूसरे चरण में शेष 142 सीटों पर मतदान संपन्न हुआ। इस प्रकार कुल 294 सीटों के लिए मतदान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब सभी की नजरें 4 मई को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं, जब यह स्पष्ट होगा कि राज्य की जनता ने किसे सत्ता की बागडोर सौंपी है।
इस चुनाव में मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी ने यह भी संकेत दिया है कि लोग अब केवल दर्शक नहीं, बल्कि लोकतंत्र के सक्रिय सहभागी बन चुके हैं। खासकर महिलाओं, युवाओं और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही है। कई स्थानों पर सुबह से ही लंबी कतारें देखी गईं, जो यह दर्शाती हैं कि लोग अपने वोट के महत्व को समझते हैं।
पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत
Bengal Record Voting : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपने संदेश में यह भी कहा कि यह रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत केवल पश्चिम बंगाल के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इसी तरह लोग लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहेंगे।
उन्होंने चुनाव में शामिल सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, सुरक्षा बलों और अन्य संबंधित एजेंसियों की भी सराहना की, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए चुनाव प्रक्रिया को सफल बनाया।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का यह चरण लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। रिकॉर्ड मतदान, सशक्त भागीदारी और व्यापक सुरक्षा व्यवस्था ने यह साबित कर दिया है कि भारत का लोकतंत्र न केवल मजबूत है, बल्कि लगातार विकसित भी हो रहा है। अब सभी को अंतिम परिणामों का इंतजार है, जो 4 मई को सामने आएंगे और राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।






