कोलकाता, 29 अप्रैल। Falta EVM Issue : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के मतदान के दौरान कोलकाता से सटे फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में ईवीएम से छेड़छाड़ को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। मतदान प्रक्रिया के बीच अचानक सामने आई इस घटना ने राजनीतिक माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोप लगाया है कि कई मतदान केंद्रों पर ईवीएम में भाजपा के चुनाव चिन्ह के सामने वाले बटन को जानबूझकर ब्लॉक कर दिया गया, जिससे मतदाताओं को अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट देने में कठिनाई का सामना करना पड़ा।
चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग
Falta EVM Issue : भाजपा ने इस पूरे मामले को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ गंभीर उल्लंघन बताते हुए चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पार्टी का कहना है कि इस तरह की घटनाएं मतदान की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती हैं और इससे जनता के मतदान अधिकारों का हनन हुआ है।
कई वीडियो साझा किए
Falta EVM Issue : भाजपा आइटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने इस मामले को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कई वीडियो साझा किए हैं। इन वीडियो में कथित रूप से देखा जा सकता है कि ईवीएम मशीन पर भाजपा के चुनाव चिन्ह के सामने वाला बटन ठीक से काम नहीं कर रहा है या उसे टेप लगाकर ढका गया है। वीडियो में कुछ मतदाता और पोलिंग एजेंट चुनाव कर्मचारियों से इस संबंध में शिकायत करते भी दिखाई दे रहे हैं।

कई मतदान केंद्रों पर ऐसी गड़बड़ियां
Falta EVM Issue : अमित मालवीय ने अपने पोस्ट में दावा किया कि फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के हरिणडांगा हाई स्कूल में स्थित मतदान केंद्र के कमरा नंबर दो और बूथ संख्या 189 पर यह समस्या सामने आई है। इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह की घटनाएं केवल एक बूथ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कई अन्य मतदान केंद्रों पर भी इसी प्रकार की गड़बड़ियां देखने को मिली हैं, जिससे मतदान प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
अपने पोस्ट में अमित मालवीय ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यही वह व्यवस्था है जिसका ममता बनर्जी और उनकी पार्टी समर्थन करती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब टीएमसी नेता जहांगीर खान को लेकर विवाद उठा था, तब भी इस तरह की चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए थे। मालवीय ने लिखा कि कई पोलिंग बूथों पर भाजपा के विकल्प को जानबूझकर टेप लगाकर या तकनीकी रूप से निष्क्रिय कर दिया गया, जिससे मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट देने से वंचित रह गए।
उन्होंने आगे कहा कि यह वही तथाकथित ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ है, जिसकी चर्चा पहले भी राजनीतिक हलकों में होती रही है। भाजपा नेता के अनुसार, इसी तरह की रणनीति ने पहले भी राजनीतिक परिणामों को प्रभावित किया है और तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं को चुनावी लाभ मिला है।
प्रभावित बूथों पर दोबारा मतदान की मांग
Falta EVM Issue : भाजपा ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए फाल्टा क्षेत्र के सभी प्रभावित बूथों पर दोबारा मतदान कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक इस चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल बने रहेंगे।
गौरतलब है कि फाल्टा विधानसभा सीट पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। इस सीट से भाजपा ने देबांशु पांडा को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की ओर से जहांगीर खान मैदान में हैं। दोनों उम्मीदवारों के बीच मुकाबला पहले से ही काफी कड़ा माना जा रहा था, लेकिन अब इस ईवीएम विवाद ने चुनावी माहौल को और अधिक गरमा दिया है।

जहांगीर खान अपने बयानों से सुर्खियों में
Falta EVM Issue : इससे पहले भी तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान अपने बयानों और विवादों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। हाल ही में उनका चुनाव आयोग के पुलिस पर्यवेक्षक अजय पाल शर्मा के साथ विवाद भी सामने आया था। बताया जाता है कि अजय पाल शर्मा ने जहांगीर खान के परिजनों और समर्थकों को आचार संहिता का पालन करने की सख्त हिदायत दी थी और चेतावनी दी थी कि नियमों का उल्लंघन करने पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जहांगीर खान ने भी तीखा पलटवार किया था और कहा था कि वे किसी भी दबाव से डरने वाले नहीं हैं। इस तरह की बयानबाजी ने पहले से ही चुनावी माहौल को संवेदनशील बना दिया था।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
Falta EVM Issue : अब ईवीएम से जुड़ा यह नया विवाद सामने आने के बाद चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी दलों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बना रहे।
फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। वहीं, प्रशासन ने सभी मतदान केंद्रों पर सुरक्षा और निगरानी को और कड़ा कर दिया है ताकि मतदान प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो सके।
इस घटना ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है और सभी दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप में जुट गए हैं। अब देखना यह होगा कि चुनाव आयोग इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है और मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता को कैसे सुनिश्चित करता है।






