अनुज श्रीवास्तव, जीरादेई (सीवान)। Paddy Crop : पिछले सप्ताह आए भीषण मेंथा तूफान ने जीरादेई अंचल के किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। तूफान की तेज़ रफ्तार हवाओं और मूसलाधार बारिश ने खेतों में लगी पकी हुई धान की फसल को पूरी तरह चौपट कर दिया। किसानों के महीनों की मेहनत एक ही रात में तबाह हो गई।
फसल का बचाना अब असंभव
Paddy Crop : जीरादेई अंचल के संजलपुर, बंथु सलोना और छियासी गांव सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। इन गांवों के खेतों में धान की फसल लगभग तैयार थी और कटाई शुरू होने ही वाली थी। लेकिन अचानक आए तूफान ने न केवल फसल गिरा दी बल्कि कई जगहों पर खेतों में पानी भर जाने से पौधे सड़ने लगे हैं। किसानों के अनुसार, अब फसल को बचाना संभव नहीं है।
कोई नहीं आया हालचाल लेने
Paddy Crop : ग्रामीण किसान रामप्रवेश यादव ने बताया कि “हमने पूरे साल मेहनत की, कर्ज लेकर खाद और बीज खरीदा, लेकिन इस तूफान ने सब कुछ नष्ट कर दिया। सरकार से मुआवजे की उम्मीद थी, पर अब तक कोई अधिकारी हालचाल लेने नहीं आया।”
घर चलाना हुआ मुश्किल
Paddy Crop : इसी तरह, सीता देवी नामक महिला किसान ने कहा कि “हमारा पूरा परिवार खेती पर निर्भर है। अब घर चलाना मुश्किल हो गया है। अगर सरकार मदद नहीं करेगी तो रबी की बुआई भी नहीं हो पाएगी।”
स्थानीय प्रतिनिधियों का ध्यान नहीं
Paddy Crop : वहीं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों का ध्यान भी इस आपदा की ओर नहीं गया है। बिहार में चुनावी माहौल के कारण प्रशासनिक गतिविधियाँ राजनीतिक रैलियों और प्रचार अभियानों तक सीमित हैं। किसानों का कहना है कि उनकी समस्याएँ इस समय किसी की प्राथमिकता में नहीं हैं।
कृषि विभाग के सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक आकलन में जीरादेई अंचल के सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है। विभाग की टीम को नुकसान का सर्वे करने का निर्देश दिया गया है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
किसानों ने की है यह मांग
Paddy Crop : किसानों ने मांग की है कि राज्य सरकार जल्द से जल्द राहत शिविर लगाए और फसल हानि का मुआवजा सुनिश्चित करे ताकि वे आगामी रबी सीजन के लिए फिर से खेती शुरू कर सकें।







