अवनीश सिंह | गाजीपुर (उत्तर प्रदेश), 28 जून। Balwant Kumar :
गाजीपुर जिले के देवकली पंप नहर खंड-द्वितीय में कार्यरत अवर अभियंता बलवंत कुमार के खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। मामले को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि अवर अभियंता को कुछ लोगों के निजी स्वार्थ का शिकार बनाया जा रहा है, जबकि अब तक उनके विरुद्ध किसी प्रकार के गबन, वित्तीय अनियमितता अथवा कार्य में गड़बड़ी का कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। इसके बावजूद उनके खिलाफ लगातार शिकायतें कर उन्हें निशाना बनाए जाने की चर्चा विभागीय गलियारों में बनी हुई है।
लगाए गए ये आरोप
Balwant Kumar : जानकारी के अनुसार 20 जून 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह गाजीपुर जिले के दौरे पर पहुंचे थे। उस समय अवर अभियंता बलवंत कुमार अपने कार्यक्षेत्र मरदह रजवाहा के 11.950 किलोमीटर पर स्थित साइफन की मरम्मत कार्य की निगरानी कर रहे थे। मंत्री के आगमन की सूचना मिलने पर वे तत्काल मरदह पंप हाउस पहुंचे, जहां कुछ लोगों द्वारा उन पर किसानों का फोन नहीं उठाने तथा किसानों की मांग के अनुरूप समय पर जल आपूर्ति नहीं करने के आरोप लगाए गए।
धमकी देने का भी मामला
Balwant Kumar : मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि शिकायत करने वाले व्यक्ति द्वारा पूर्व में भी अवर अभियंता को निलंबित कराने की धमकी दिए जाने की बात सामने आई थी। वहीं कुछ सूत्रों का यह भी दावा है कि संबंधित शिकायतकर्ता विभाग में ठेकेदारी का कार्य भी करता है और वह समय-समय पर अवर अभियंता पर ठेका कार्य दिलाने का दबाव बनाता रहा है। बताया जाता है कि अवर अभियंता बलवंत कुमार ने हमेशा यही कहा कि ठेका देने का अधिकार उनके पास नहीं है, बल्कि यह निर्णय सहायक अभियंता एवं अधिशासी अभियंता के स्तर पर लिया जाता है।
विभाग के भीतर कई चर्चाएं
Balwant Kumar : दावा किया जा रहा है कि इसी कारण शिकायतकर्ता नाराज हो गया और उसने मंत्री के समक्ष अवर अभियंता की शिकायत कर उन पर दबाव बनाने का प्रयास किया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विभाग के भीतर भी कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
क्षेत्र का किया निरीक्षण
Balwant Kumar : सूत्रों के अनुसार, मंत्री के दौरे के बाद मुख्य अभियंता (सोन) ने भी क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान शिकायतकर्ता द्वारा उन्हें बिरनो रजवाहा का निरीक्षण कराया गया और कथित रूप से उसे भी अवर अभियंता बलवंत कुमार का कार्यक्षेत्र बताया गया। जबकि विभागीय अभिलेखों के अनुसार बलवंत कुमार का कार्यक्षेत्र मरदह रजवाहा शून्य किलोमीटर से 18.800 किलोमीटर तक बताया जाता है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि निरीक्षण गलत कार्यक्षेत्र में कराया गया तो इससे अधिकारियों के समक्ष वास्तविक स्थिति स्पष्ट रूप से प्रस्तुत नहीं हो सकी होगी।
इसी बीच विभाग द्वारा अवर अभियंता बलवंत कुमार से उनका प्रभार वापस ले लिया गया है तथा उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। विभागीय स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। हालांकि इस कार्रवाई को लेकर भी कई कर्मचारी और स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है, लेकिन केवल आरोपों के आधार पर कठोर प्रशासनिक कदम उठाना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
मामले को लेकर कई प्रश्न
Balwant Kumar : मामले को लेकर यह प्रश्न भी उठ रहा है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी के विरुद्ध केवल आरोप लगाए जाएं और बिना पर्याप्त साक्ष्यों के उसके विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा होने लगे, तो इससे कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो सकता है। विभागीय जानकारों का मानना है कि शिकायतों की गंभीरता से जांच होना आवश्यक है, लेकिन हर मामले में तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही निर्णय लिया जाना चाहिए।
कर्मचारियों पर बढ़ेगा दबाव
Balwant Kumar : विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बिना ठोस प्रमाण के केवल शिकायतों के आधार पर कार्रवाई की परंपरा विकसित होती है, तो भविष्य में यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति बन सकती है। इससे न केवल कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बढ़ेगा, बल्कि उनकी कार्यक्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही विभाग और सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने की आशंका बनी रहेगी।
फिलहाल विभागीय जांच जारी है और अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट के आधार पर ही लिया जाएगा। ऐसे में सभी पक्षों का मानना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और साक्ष्य-आधारित जांच होनी चाहिए, ताकि सत्य सामने आ सके और किसी भी निर्दोष कर्मचारी के साथ अन्याय न हो तथा यदि कोई दोषी हो तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।







