Sim Box Scam : सरकारी अफसर बनकर ठगी: दो आरोपितों को दबोचा
नई दिल्ली, 27 मार्च। Sim Box Scam : देश में बढ़ते साइबर अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए Central Bureau of Investigation (सीबीआइ) ने एक बड़े सिम बॉक्स आधारित साइबर धोखाधड़ी मामले का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई के तहत जांच एजेंसी ने छह अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी करते हुए दो मुख्य आरोपितों— Mohammad Vilal और Mohammad Dilshad— को गिरफ्तार किया है। यह पूरा मामला थोक में जारी किए गए सिम कार्डों के दुरुपयोग के जरिए बड़े पैमाने पर साइबर ठगी से जुड़ा हुआ है, जिसमें अत्याधुनिक “सिम बॉक्स” तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा था।
यह हुआ चौंकाने वाला खुलासा
Sim Box Scam : सीबीआइ की प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि जनवरी 2025 में एक कंपनी का गठन किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य वैध व्यवसाय के नाम पर बड़ी संख्या में सिम कार्ड प्राप्त करना था। इसी कंपनी के नाम पर कुल 108 सिम कार्ड लिए गए। आधिकारिक रिकॉर्ड में इन सिम कार्डों को कंपनी के कर्मचारियों के उपयोग के लिए दर्शाया गया, लेकिन वास्तविकता में इनका इस्तेमाल साइबर ठगी के संगठित नेटवर्क के तहत किया जा रहा था।
ठगी की शिकायतों के बाद कार्रवाई
Sim Box Scam : मामले की शुरुआत तब हुई जब बड़ी संख्या में नागरिकों ने संदिग्ध कॉल्स और ठगी की घटनाओं की शिकायतें National Cyber Crime Reporting Portal (एनसीआरपी) और Chakshu Portal पर दर्ज कराईं। इन शिकायतों में एक समान पैटर्न सामने आया—लोगों को अनजान नंबरों से कॉल कर खुद को पुलिस, सीबीआइ या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताया जाता था और उन्हें डराकर या लालच देकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था।
ठगी का दायरा व्यापक
Sim Box Scam : जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपित “सिम बॉक्स” तकनीक का इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय कॉल्स को स्थानीय नंबरों में बदल देते थे, जिससे कॉल्स विश्वसनीय लगती थीं और लोगों को आसानी से झांसे में लिया जा सकता था। इस तकनीक के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को एक साथ निशाना बनाया गया, जिससे ठगी का दायरा काफी व्यापक हो गया।
मेरठ से पकड़े गए ठग
तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल ट्रैकिंग और जमीनी स्तर पर किए गए ऑपरेशनों के आधार पर सीबीआइ ने उत्तर प्रदेश के Meerut जिले से दोनों मुख्य आरोपितों को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही Noida और मेरठ में कुल छह ठिकानों पर छापेमारी की गई। इन स्थानों में कंपनी के निदेशकों के आवास, सिम बॉक्स इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सहयोगियों के परिसर, एक टेलीकॉम कंपनी का जोनल कार्यालय तथा थोक सिम जारी करने की प्रक्रिया में शामिल एक निजी संस्था के कर्मचारी के ठिकाने शामिल थे।
महत्वपूर्ण सबूत हाथ लगे
Sim Box Scam : छापेमारी के दौरान सीबीआइ को कई महत्वपूर्ण सबूत हाथ लगे। इनमें लैपटॉप, हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अलावा कई आपत्तिजनक दस्तावेज और बड़ी संख्या में सक्रिय व निष्क्रिय सिम कार्ड शामिल हैं। खास बात यह है कि जब्त किए गए सिम कार्डों में एक विदेशी—नेपाल का—सिम कार्ड भी पाया गया है, जिससे इस पूरे नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन होने की आशंका भी जताई जा रही है।
गिरफ्तार आरोपित उसी कंपनी के निदेशक
प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार दोनों आरोपित उसी कंपनी के निदेशक हैं, जिसे केवल सिम कार्डों की थोक खरीद और सिम बॉक्स ऑपरेशन के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी को अंजाम देने के उद्देश्य से बनाया गया था। अब सीबीआइ इस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों, फंडिंग चैनल्स और संभावित अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय कनेक्शनों की गहराई से जांच कर रही है।
आम नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह
Sim Box Scam : इस कार्रवाई के बाद सीबीआइ ने स्पष्ट संदेश दिया है कि टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर का दुरुपयोग कर साइबर अपराध करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे। एजेंसी ने आम नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा है कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया अस्तित्व में नहीं है और ऐसे किसी भी दावे पर विश्वास नहीं करना चाहिए।
लोगों से यह अपील
सीबीआइ ने लोगों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी कॉल के माध्यम से खुद को पुलिस, सीबीआइ या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर पैसे की मांग की जाती है या किसी संदिग्ध निवेश योजना का लालच दिया जाता है, तो वे तुरंत सतर्क हो जाएं और इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों या साइबर क्राइम पोर्टल पर दें। यह कदम न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि ऐसे संगठित साइबर अपराध नेटवर्क को खत्म करने में भी मददगार साबित हो सकता है।







