Nepal Political Arrest : पीएम बनते ही दिखा दम: बालेंद्र शाह ने लिया बड़ा फैसला
काठमांडू, 28 मार्च । Nepal Political Arrest : नेपाल की राजनीति में एक नाटकीय और ऐतिहासिक मोड़ उस समय देखने को मिला, जब Balen Shah ने प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ ही घंटों के भीतर बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए देश के पूर्व प्रधानमंत्री KP Sharma Oli और पूर्व गृह मंत्री Ramesh Lekhak को गिरफ्तार करा दिया। यह कार्रवाई पिछले वर्ष हुए चर्चित “जेन-जी आंदोलन” से जुड़े गंभीर आरोपों के संदर्भ में की गई है, जिसने नेपाल की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था को हिला कर रख दिया था।
वादा तो वादा है
Nepal Political Arrest : बताया जा रहा है कि यह गिरफ्तारी नेपाल पुलिस द्वारा की गई, जो लंबे समय से इस मामले की जांच कर रही थी। जैसे ही गिरफ्तारी की खबर सामने आई, वर्तमान गृह मंत्री Sudan Gurung ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के माध्यम से इसकी पुष्टि करते हुए एक संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली संदेश लिखा—“वादा तो वादा है।” इस बयान ने यह संकेत दिया कि नई सरकार अपने चुनावी वादों और जवाबदेही के मुद्दों को गंभीरता से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पिछले साल हुए थे विरोध प्रदर्शन
Nepal Political Arrest : गौरतलब है कि नेपाल में 8 और 9 सितंबर 2025 को तथाकथित Gen-Z protest Nepal के दौरान बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। ये प्रदर्शन भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सरकारी नीतियों के खिलाफ युवाओं द्वारा शुरू किए गए थे, लेकिन देखते ही देखते यह आंदोलन हिंसक रूप ले बैठा। इस दौरान कई स्थानों पर झड़पें हुईं और 8 सितंबर को ही 19 लोगों की मौत हो गई, जिससे पूरे देश में आक्रोश और अस्थिरता फैल गई।
गुंडू स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया
Nepal Political Arrest : नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स, विशेषकर The Himalayan Times के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को शनिवार सुबह उनके भक्तपुर जिले के गुंडू स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया। जानकारी के मुताबिक, पुलिस की टीम पिछले दिन रात से ही उनके घर के आसपास तैनात थी और उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश कर रही थी। वहीं, पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भक्तपुर के कुटुंजे क्षेत्र स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया गया।
सीधी गिरफ्तारी नेपाल के इतिहास में अभूतपूर्व
Nepal Political Arrest : जांच एजेंसियों का कहना है कि दोनों नेताओं को जेन-जी आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और मौतों से जुड़े मामलों में संदिग्ध भूमिका के आधार पर हिरासत में लिया गया है। विशेष रूप से 8 सितंबर को हुई घटनाओं में 19 लोगों की मौत के बाद यह मामला और भी गंभीर हो गया था। बताया जा रहा है कि नेपाल के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी पूर्व प्रधानमंत्री को हत्या जैसे गंभीर आपराधिक संदेह के आधार पर हिरासत में लिया गया है। इससे पहले, भले ही राजनीतिक विवादों में पूर्व प्रधानमंत्रियों से पूछताछ होती रही हो, लेकिन इस तरह की सीधी गिरफ्तारी अभूतपूर्व मानी जा रही है।
जांच आयोग की रिपोर्ट में कई खुलासे
Nepal Political Arrest : तीन दिन पहले सार्वजनिक हुई जांच आयोग की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए थे। इस रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री ओली, तत्कालीन गृह मंत्री रमेश लेखक, पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चंद्रकुबेर खापुंग और अन्य अधिकारियों पर Criminal Code 2017 की धारा 182 के उल्लंघन का संदेह जताया गया था। इसी आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई थी।
सुरक्षाकर्मियों को फिलहाल राहत
Nepal Political Arrest : प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के शपथ लेने के तुरंत बाद हुई पहली कैबिनेट बैठक में गौरी बहादुर कार्की के नेतृत्व वाले जांच आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का फैसला लिया गया। हालांकि, इस कार्रवाई में सुरक्षा बलों के कर्मियों को फिलहाल राहत दी गई है। सरकार के इस फैसले को न्यायिक प्रक्रिया की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने कैबिनेट के औपचारिक निर्णय से पहले ही पुलिस प्रशासन को 8 सितंबर की घटनाओं की विस्तृत जांच शुरू करने के निर्देश दे दिए थे। इसके बाद कानून सचिव परश्वोर धुंगाना ने पूरी रात जागकर आयोग की सिफारिशों को लागू करने और आवश्यक कानूनी दस्तावेजों का मसौदा तैयार किया।
कानून के शासन को स्थापित करने का प्रयास
Nepal Political Arrest : गृह मंत्री गुरुंग ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी प्रकार की राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित नहीं है, बल्कि यह कानून के शासन को स्थापित करने और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस शुरुआत है। उन्होंने कहा, “कोई भी कानून से ऊपर नहीं है,” और यह भी जोड़ा कि देश अब एक नई दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां जवाबदेही और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जाएगी।
नेपाल की राजनीति में हलचल
Nepal Political Arrest : इस घटनाक्रम ने नेपाल की राजनीति में हलचल मचा दी है और इसे एक बड़े राजनीतिक परिवर्तन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम देश में कानून के राज को मजबूत करने और भ्रष्टाचार तथा सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ सख्त संदेश देने का प्रयास है।







