नई दिल्ली, 13 अगस्त। Gaurav Gogoi : संसद का मानसून सत्र जैसे-जैसे अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ा, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव भी तेज होता गया। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सदन से दूरी बनाने, महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने और विपक्ष की मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। इसी क्रम में कांग्रेस लोकसभा सांसद गौरव गोगोई और राज्यसभा सदस्य एवं कांग्रेस संचार विभाग के महासचिव जयराम रमेश ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गौरव गोगोई ने कहा कि उन्होंने संसद के कई सत्र देखे हैं, लेकिन मौजूदा मानसून सत्र में पहली बार उन्हें सत्ताधारी सरकार इतनी “डरी और सहमी” हुई नजर आई। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की सदन में मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के दौरान सरकार के शीर्ष नेतृत्व की गैरमौजूदगी कई सवाल खड़े करती है।
संसद में सरकार की गैरमौजूदगी पर उठे सवाल
गौरव गोगोई ने कहा कि मानसून सत्र के दौरान ऐसे कई मौके आए, जब विपक्ष महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार से जवाब चाहता था। उनका आरोप है कि चर्चा के समय प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदन में मौजूद नहीं रहे।
उन्होंने कहा, “हमने सदन के कई सत्र देखे हैं, लेकिन पहली बार इस मानसून सत्र में सत्ताधारी सरकार को इतना डरा और सहमा देखा है।”
गोगोई के मुताबिक, यह स्थिति इसलिए भी असामान्य रही क्योंकि विपक्ष लगातार सरकार के सामने अपनी मांगें रखता रहा, लेकिन जिन मुद्दों पर सरकार को सीधे जवाब देना चाहिए था, उन पर अपेक्षित स्तर की भागीदारी दिखाई नहीं दी।
कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि गृह मंत्री भी लंबे समय तक सदन की कार्यवाही से दूर रहे। उन्होंने कहा कि करीब 15 दिनों तक गृह मंत्री की अनुपस्थिति के बाद जब सत्र समाप्त होने में महज दो दिन बचे, तब सरकार की ओर से चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही गई।
गोगोई ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब चर्चा हो रही थी, उस समय सरकार के प्रमुख मंत्री सदन में मौजूद नहीं थे, लेकिन चर्चा समाप्त होने के बाद चर्चा की मांग करना समझ से परे है।
छात्र आंदोलन से संसद तक पहुंचा सियासी तूफान
कांग्रेस नेता ने छात्र आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर देशभर में जो माहौल बना, उसका राजनीतिक असर सरकार पर पड़ा। गोगोई के अनुसार, इसी दबाव के चलते सरकार को शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेना पड़ा।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे से संबंधित संशोधन विधेयक संसद में लाया गया और उस पर दो दिनों तक चर्चा हुई। कांग्रेस ने इस चर्चा के दौरान सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं।
पहली मांग शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की थी।
दूसरी मांग पैलेट गन के मुद्दे पर गृह मंत्री के बयान की थी।
तीसरी मांग छात्रों से प्रधानमंत्री की ओर से माफी मांगने की थी।
गौरव गोगोई ने कहा कि कांग्रेस की इन तीन मांगों में से सरकार ने केवल एक मांग को स्वीकार किया और वह थी शिक्षा मंत्री का इस्तीफा।
उनका कहना था कि बाकी दो मांगों पर सरकार की ओर से अपेक्षित जवाब नहीं मिला। कांग्रेस का आरोप है कि जिन मुद्दों को लेकर छात्रों और विपक्ष में असंतोष था, उन पर सरकार को सीधे सदन में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी।
“चर्चा हो चुकी थी, सिर्फ सरकार का बयान बाकी था”
गौरव गोगोई ने सरकार के उस रुख पर भी सवाल उठाया, जिसमें विपक्ष पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया जा रहा था।
उन्होंने कहा कि विपक्ष चर्चा से कभी पीछे नहीं हटा। उनके अनुसार, संबंधित मुद्दे पर सदन में पहले ही दो दिनों तक चर्चा हो चुकी थी। विपक्ष की मांग केवल इतनी थी कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री भी सदन में आकर अपना पक्ष रखें।
कांग्रेस सांसद ने कहा, “चर्चा तो हो गई, बस आपके बयान चाहिए थे लेकिन वे सदन से दूर रहे और बयान नहीं दे पाए।”
उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि जब चर्चा का वास्तविक समय था, तब सरकार की ओर से भागीदारी नहीं हुई और अब सत्र के अंतिम दिनों में चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही जा रही है।
गोगोई ने कहा कि विपक्ष को चर्चा से कोई आपत्ति नहीं थी। बल्कि विपक्ष लगातार चर्चा और जवाब की मांग कर रहा था। उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकार चर्चा के लिए तैयार थी, तो वह उस समय सदन में क्यों नहीं आई, जब विपक्ष इन मुद्दों को लगातार उठा रहा था।
राज्यों के अधिकारों पर भी कांग्रेस ने जताई चिंता
प्रेस कॉन्फ्रेंस में गौरव गोगोई ने संसद में पेश किए गए विधेयकों को लेकर भी केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मानसून सत्र में ऐसे बिल लाए गए, जिनसे राज्य सरकारों के अधिकार कमजोर होने की आशंका है।
कांग्रेस का कहना है कि केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों का संतुलन भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला है। ऐसे में यदि किसी कानून या संशोधन के जरिए राज्यों के अधिकारों पर प्रभाव पड़ता है, तो उस पर संसद में विस्तृत चर्चा जरूरी है।
गोगोई ने कहा कि विपक्ष ने इस मुद्दे को भी सदन में मजबूती से उठाने की कोशिश की। उनके अनुसार, कांग्रेस की मांग केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह चाहती थी कि महत्वपूर्ण विधेयकों और उनके संभावित प्रभावों पर खुलकर बहस हो।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विपक्ष की आपत्तियों और सवालों को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लिया।
“गृह मंत्री बयान दें और चंदा चोरी पर बहस हो”
मानसून सत्र के अंतिम चरण तक कांग्रेस की दो प्रमुख मांगों का जिक्र करते हुए गौरव गोगोई ने कहा कि विपक्ष लगातार गृह मंत्री से बयान देने और “चंदा चोरी” के मुद्दे पर बहस कराने की मांग करता रहा।
उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहता था कि गृह मंत्री सदन में आकर संबंधित मुद्दे पर सरकार का पक्ष स्पष्ट करें। इसके साथ ही कांग्रेस ने “चंदा चोरी” के आरोपों से जुड़े विषय पर भी विस्तृत चर्चा की मांग की।
गोगोई के अनुसार, सरकार को विपक्ष की मांगों का जवाब सदन के भीतर देना चाहिए था, ताकि देश के सामने स्थिति स्पष्ट हो सके। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने ऐसा करने के बजाय चर्चा से दूरी बनाए रखी।
कांग्रेस नेता ने कहा कि लोकतंत्र में संसद केवल विधेयक पारित करने की जगह नहीं है, बल्कि यह वह मंच है जहां सरकार से सवाल पूछे जाते हैं और उसे जनता के प्रति जवाबदेह बनाया जाता है।
मानसून सत्र ने छोड़े कई राजनीतिक सवाल
गौरव गोगोई के बयान से साफ है कि कांग्रेस मानसून सत्र को लेकर सरकार की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं है। कांग्रेस का आरोप है कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा, लेकिन सत्ता पक्ष की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली।
दूसरी ओर, गोगोई के आरोपों में सरकार की राजनीतिक रणनीति पर भी सवाल उठाया गया है। उनका कहना है कि यदि सरकार वास्तव में चर्चा के लिए तैयार थी, तो उसे उस समय सदन में उपस्थित रहना चाहिए था, जब संबंधित मुद्दे चर्चा के केंद्र में थे।
छात्र आंदोलन, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, पैलेट गन पर गृह मंत्री का बयान, प्रधानमंत्री से छात्रों की माफी, राज्यों के अधिकार और “चंदा चोरी” जैसे मुद्दों ने मानसून सत्र को राजनीतिक रूप से काफी अहम बना दिया है।
कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद यह स्पष्ट है कि विपक्ष इन मुद्दों को आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाए रखने की तैयारी में है। गौरव गोगोई का “डरी और सहमी सरकार” वाला बयान इसी व्यापक राजनीतिक टकराव को दर्शाता है।
हालांकि, कांग्रेस द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर केंद्र सरकार या सत्तापक्ष का पक्ष इस उपलब्ध बयान में शामिल नहीं है। ऐसे में पूरे राजनीतिक विवाद को समझने के लिए दोनों पक्षों के तर्क और जवाबों को सामने रखना महत्वपूर्ण होगा। संसद की कार्यवाही और आगामी राजनीतिक बहस में इन मुद्दों पर सरकार की प्रतिक्रिया इस विवाद की दिशा तय कर सकती है।







