ऋषिकेश, 21 जनवरी। Sanatan Dharma Defense : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को उत्तराखंड के ऋषिकेश में गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका ‘कल्याण’ के शताब्दी अंक के विमोचन समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने लक्ष्मीनारायण मंदिर और मां गंगा के दर्शन व पूजन भी किया। कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
Sanatan Dharma Defense : गीता प्रेस: सनातन चेतना की 103 वर्षों से जलती लौ
अमित शाह ने कहा कि सनातन धर्म में आस्था रखने वाला कोई भी व्यक्ति, चाहे वह भारत में हो या विदेश में, गीता प्रेस से अनजान नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि पूज्य हनुमान प्रसाद पोद्दार ने गीता प्रेस के माध्यम से पिछले 103 वर्षों से सनातन धर्म की लौ को निरंतर प्रज्ज्वलित रखा। उन्होंने भक्ति के मार्ग से करोड़ों लोगों को अध्यात्म की ओर प्रेरित किया और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त किया।
त्याग और तपस्या से संस्कृति की सेवा
Sanatan Dharma Defense : गृह मंत्री ने कहा कि पोद्दार जी ने सांसारिक सुखों का त्याग कर अपना पूरा जीवन गीता प्रेस को समर्पित कर दिया।
गीता प्रेस के माध्यम से उन्होंने हर व्यक्ति और परिवार के हृदय में भारतीय संस्कृति के प्रति अटूट श्रद्धा स्थापित करने का कार्य किया।
‘कल्याण’ के 100 वर्ष : शब्दों से संस्कृति की साधना
Sanatan Dharma Defense : अमित शाह ने ‘कल्याण’ पत्रिका के 100 वर्ष पूरे होने को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
उन्होंने कहा कि अपने पहले अंक से लेकर आज तक ‘कल्याण’ का हर शब्द, हर वाक्य और हर अंक सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति को समर्पित रहा है।
शंकराचार्य से आम जन तक ज्ञान की यात्रा
Sanatan Dharma Defense : उन्होंने कहा कि गीता प्रेस ने आदि शंकराचार्य द्वारा उपनिषदों की मीमांसा को जन-जन तक पहुंचाकर एक बड़ा सांस्कृतिक कार्य किया है।
चार पीढ़ियों से गीता प्रेस ने बिना किसी विचार-समझौते के, हर पीढ़ी के लिए उसी शुद्ध साहित्य को लोकभोग्य बनाया।
अंधविश्वास के दौर में ज्ञान का दीप
Sanatan Dharma Defense : अमित शाह ने कहा कि अंग्रेजी शासन के समय धर्म को अंधविश्वास कहने का चलन था। ऐसे समय में बिना किसी आक्रामक भाषा के, पोद्दार जी ने ‘कल्याण’ के रूप में ज्ञान का दीप जलाया।
इसका उद्देश्य केवल व्यक्ति का मंगल नहीं, बल्कि संपूर्ण जगत का कल्याण था।
तर्क, शास्त्र और शांति से उत्तर
Sanatan Dharma Defense : उन्होंने कहा कि जब हमारे मूल विचारों का विरोध होता था, तब पोद्दार जी ने उसका उत्तर तर्क, शास्त्र और शांति के माध्यम से दिया।
गृह मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा— “सनातन की रक्षा शोर से नहीं, बल्कि शास्त्र और तर्क से ही संभव है।”
विचार-केन्द्रित साधना, प्रचार नहीं
Sanatan Dharma Defense : अमित शाह ने कहा कि गीता प्रेस ने कभी प्रचार या धन संग्रह को प्राथमिकता नहीं दी। इसका उद्देश्य व्यक्ति-केन्द्रित नहीं, बल्कि विचार-केन्द्रित रहा।
उन्होंने कहा कि ‘कल्याण’ ने यह सिखाया कि सभ्यताएं तलवार से नहीं, शब्द और ज्ञान से खड़ी होती हैं, और वही शब्द प्रभावी होते हैं जिनमें सत्य और सत्व का प्रकाश हो।
नए भारत की चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण
Sanatan Dharma Defense : गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 11 वर्षों के कार्यकाल में युवाओं में बड़ा गुणात्मक परिवर्तन आया है।
उन्होंने कहा कि 550 वर्षों बाद अयोध्या में रामलला का भव्य मंदिर बना। औरंगजेब द्वारा तोड़े गए काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का पुनर्निर्माण पूरी दुनिया को यह संदेश देता है कि तोड़ने वालों से श्रद्धा की शक्ति कहीं अधिक बड़ी होती है।
अमित शाह का यह संबोधन केवल एक भाषण नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, विचार, तर्क और ज्ञान के माध्यम से सभ्यता की रक्षा का स्पष्ट संदेश था—जहां शोर नहीं, बल्कि शास्त्र ही सबसे बड़ा शस्त्र है।







