प्रसाद रत्नेश्वर, Poem :
हाँ
मैं लाना चाहता हूँ
एक नया मौसम
बरमसिया
कुछ नये ऋतु गीत
सबके लिए –
खिलने की प्रतीक्षा कर रहे
रंगबिरंगे फूलों के लिए
फलने की चाह रखने वाले
पेड़ों के लिए
रंगों के लिए आकाश निहार रहे
इंद्रधनुष के लिए
धरती के
गदराये सपनों के लिए
आनंद -आनंद करने वाले
हँसी -ख़ुशी- त्योहारों के लिए
गाना चाहता हूँ-
कभी नहीं गाया गया
प्रेमगीत
केवल तुम्हारे लिए
चाहता हूँ मैं
सबकुछ
इसी
जन्म में।






