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FCRA Bill : एफसीआरए संशोधन विधेयक पर संसद में सियासी संग्राम, जेपीसी की मुहर से बढ़ी जांच की उम्मीद

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नई दिल्ली, 12 अगस्त।  FCRA Bill : विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक यानी एफसीआरए, 2026 को लेकर बुधवार को लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सरकार की ओर से विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने का प्रस्ताव सदन में रखा गया, जिसे लोकसभा ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। अब यह विधेयक संसद की संयुक्त समिति के पास जाएगा, जहां इसके प्रावधानों की विस्तार से समीक्षा की जाएगी।

सरकार का कहना है कि विधेयक का उद्देश्य देश में विदेशी धन के प्रवाह को लेकर नियमों को मजबूत करना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। वहीं, विपक्ष ने इस विधेयक को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसके जरिए अल्पसंख्यक समुदायों और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को निशाना बनाया जा सकता है।

जेपीसी के हवाले हुआ विधेयक, 31 सांसद करेंगे मंथन

बुधवार को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026 को संयुक्त संसदीय समिति को सौंपने का प्रस्ताव लोकसभा में रखा।

प्रस्तावित जेपीसी में कुल 31 सदस्य होंगे। इनमें लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सदस्य शामिल किए जाएंगे। समिति को विधेयक के विभिन्न प्रावधानों की जांच करने और उस पर अपनी रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।

समिति को 2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के आखिरी दिन तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। यानी अब विधेयक पर संसद के दोनों सदनों के सदस्यों की संयुक्त निगरानी में विस्तृत चर्चा और पड़ताल का रास्ता खुल गया है।

सरकार के इस कदम को विधेयक के विवादित पहलुओं पर व्यापक संसदीय विमर्श के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, विपक्ष ने जेपीसी को भेजे जाने के बावजूद विधेयक के मूल उद्देश्य और प्रावधानों पर अपनी आपत्तियां बरकरार रखी हैं।

विपक्ष का हमला: ‘अल्पसंख्यकों और एनजीओ को बनाया जा रहा निशाना’

विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि एफसीआरए संशोधन के जरिए अल्पसंख्यकों और एनजीओ को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है।

वेणुगोपाल ने सरकार से विधेयक वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है। उनके मुताबिक, विदेशी अंशदान से जुड़े नियमों में बदलाव का असर उन संस्थाओं पर पड़ सकता है जो सामाजिक और जनहित से जुड़े क्षेत्रों में काम करती हैं।

विपक्ष की ओर से उठाए गए इन सवालों ने सदन में राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया। खासतौर पर यह मुद्दा चर्चा के केंद्र में रहा कि एफसीआरए के नए प्रावधानों का वास्तविक प्रभाव किन संस्थाओं और समूहों पर पड़ेगा।

रिजिजू का पलटवार: ‘विरोध करने के बजाय जेपीसी में रखें अपनी आपत्ति’

विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि एफसीआरए संशोधन विधेयक को लेकर विपक्ष की आपत्तियां उचित नहीं हैं।

रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की ओर से कई दिनों से मांग की जा रही थी कि विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा जाए। अब जब सरकार ने विधेयक को जेपीसी के पास भेजने का फैसला किया है, तो विपक्ष द्वारा इसका विरोध किया जाना समझ से परे है।

उन्होंने विपक्षी सांसदों से कहा कि यदि उन्हें विधेयक के किसी प्रावधान पर आपत्ति है या कोई बिंदु उन्हें गलत लगता है, तो वे अपनी बात जेपीसी के सामने रख सकते हैं। समिति के समक्ष उन्हें पर्याप्त समय मिलेगा और वहां विधेयक के प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की जा सकेगी।

रिजिजू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एफसीआरए संशोधन विधेयक किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने के लिए नहीं लाया जा रहा है। उन्होंने इसे देश की सुरक्षा और विदेशी धन के इस्तेमाल से जुड़े नियमों को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया।

अखिलेश यादव ने भी साधा निशाना, सरकार से पूछा सवाल

एफसीआरए संशोधन विधेयक के खिलाफ समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मोर्चा खोला। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लाए जा रहे इस विधेयक के खिलाफ पूरा विपक्ष है।

अखिलेश यादव ने रिजिजू के उस बयान पर भी सवाल उठाया जिसमें उन्होंने कहा था कि विधेयक अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ नहीं है। उन्होंने सरकार से पूछा कि अब तक केंद्र सरकार ने ऐसे कितने विधेयक लाए हैं जिन्हें अल्पसंख्यक वर्ग के खिलाफ नहीं माना गया।

अखिलेश के इस सवाल के बाद सदन में राजनीतिक बहस और तीखी हो गई। विपक्ष ने जहां विधेयक के संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताई, वहीं सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे सुरक्षा और नियमन से जुड़ा विषय बताया।

रिजिजू की दो टूक: ‘एक भी प्रावधान अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं’

अखिलेश यादव के सवाल का जवाब देते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि वह जिम्मेदारी के साथ यह स्पष्ट कर रहे हैं कि विधेयक में ऐसा एक भी प्रावधान नहीं है जो किसी अल्पसंख्यक वर्ग के खिलाफ हो।

उन्होंने विपक्ष पर देश में गलत धारणा फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने का सवाल ही नहीं उठता।

रिजिजू ने विदेशी धन के इस्तेमाल को लेकर भी सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि विदेश से आने वाले धन को बिना किसी कानून और नियमन के देश में लाकर खर्च करने की व्यवस्था स्वीकार नहीं की जा सकती। उनके मुताबिक, विदेशी योगदान के इस्तेमाल के लिए स्पष्ट कानूनी ढांचा जरूरी है।

सरकार का तर्क है कि देश में आने वाले विदेशी अंशदान से जुड़ी गतिविधियों को नियमों के दायरे में रखना जरूरी है, ताकि इस धन के इस्तेमाल को लेकर जवाबदेही और नियमन सुनिश्चित किया जा सके।

अब जेपीसी की नजर में होगा एफसीआरए संशोधन विधेयक

सदन में तीखी राजनीतिक बहस के बाद आखिरकार लोकसभा ने ‘विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने का प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित कर दिया।

अब इस विधेयक की अगली बड़ी परीक्षा जेपीसी के सामने होगी। समिति में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य शामिल होंगे, जो इसके प्रावधानों की समीक्षा करेंगे और अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपेंगे।

इस पूरे घटनाक्रम ने एफसीआरए संशोधन को संसद के भीतर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। एक तरफ सरकार इसे देश की सुरक्षा और विदेशी धन के नियमन से जोड़ रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसके संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठा रहा है।

जेपीसी में होने वाली चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण होगी क्योंकि अब सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को विधेयक के प्रावधानों पर विस्तार से अपनी राय रखने का अवसर मिलेगा। समिति की रिपोर्ट के बाद विधेयक को लेकर संसद में आगे की प्रक्रिया तय होगी।

फिलहाल, एफसीआरए संशोधन विधेयक लोकसभा की पहली बड़ी बाधा पार कर जेपीसी के दरवाजे तक पहुंच चुका है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि संयुक्त संसदीय समिति इस विधेयक के प्रावधानों पर क्या राय देती है और उसकी रिपोर्ट आने के बाद संसद में इस पर किस तरह की बहस होती है।

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