मानसा, 13 अक्टूबर। Parvinder Singh Jhotta :
पंजाब में नशे के कारोबार और नशीले पदार्थों की बिक्री के खिलाफ आवाज उठाने वाले नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की मंगलवार सुबह गोली मारकर हत्या कर दी गई। पंजाब के मानसा में हुई इस सनसनीखेज वारदात के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। घटना ने राज्य में नशे के खिलाफ अभियान चला रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, नशा विरोधी गतिविधियों को लेकर हुए विवाद के बाद एक मेडिकल स्टोर के मालिक पर परविंदर सिंह झोटा को गोली मारने का आरोप है। हालांकि, घटना के पीछे की पूरी वजह और वारदात से जुड़े सभी तथ्यों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।
परविंदर सिंह झोटा मानसा और आसपास के क्षेत्रों में नशे के खिलाफ सक्रिय रूप से अभियान चलाने के लिए जाने जाते थे। वह नशा विरोधी टास्क फोर्स से जुड़े हुए थे और लगातार नशीले पदार्थों की तस्करी, प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री तथा युवाओं में बढ़ती नशे की लत के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। उनके अभियान का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर नशे के कारोबार पर रोक लगाने के साथ-साथ लोगों को इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना भी था।
झोटा नशे की बिक्री में संलिप्त होने के संदेह वाले लोगों का सामना करते थे और स्थानीय समुदायों को नशे के खिलाफ एकजुट करने की कोशिश करते थे। उनके इस अभियान के कारण कई बार नशे से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों का सामना कर रहे लोगों के साथ उनका टकराव भी हुआ था। इसी पृष्ठभूमि में उनकी हत्या की घटना को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, विवाद और हत्या के बीच संबंधों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
तीन गोलियां लगने से हुई परविंदर सिंह झोटा की मौत
Parvinder Singh Jhotta : मानसा सिविल अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (एसएमओ) डॉ. गुरमेल सिंह ने मीडिया को बताया कि परविंदर सिंह झोटा को गोली लगने के बाद अस्पताल लाया गया था। चिकित्सकीय जानकारी के अनुसार, उन्हें तीन गोलियां लगी थीं। इनमें से एक गोली उनके लिवर में जा लगी, जो उनकी मौत का प्रमुख कारण बनी।
डॉ. गुरमेल सिंह के अनुसार, लिवर में गोली लगने के कारण उनकी स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी और उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि झोटा को नजदीक से कई गोलियां मारी गईं। घटना की गंभीरता को देखते हुए इलाके में लोगों के बीच आक्रोश और चिंता का माहौल है।
इस वारदात के बाद स्थानीय स्तर पर नशे के खिलाफ काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। नशे की बिक्री और तस्करी के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं को अक्सर ऐसे लोगों के विरोध का सामना करना पड़ता है, जिन पर नशीले पदार्थों के कारोबार में शामिल होने के आरोप लगते हैं। ऐसे में परविंदर सिंह झोटा की हत्या ने इस सवाल को फिर सामने ला दिया है कि नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रतिबंधित कैप्सूल की बिक्री के खिलाफ चलाते थे अभियान
Parvinder Singh Jhotta : परविंदर सिंह झोटा सोशल मीडिया पर ‘झोटा’ नाम से लोकप्रिय थे। मानसा और आसपास के इलाकों में उनकी पहचान एक ऐसे कार्यकर्ता के रूप में थी, जो नशे के कारोबार के खिलाफ खुलकर आवाज उठाते थे। विशेष रूप से मेडिकल स्टोरों पर प्रतिबंधित कैप्सूल और अन्य नशीले पदार्थों की कथित बिक्री के खिलाफ चलाए गए उनके अभियानों ने उन्हें स्थानीय स्तर पर पहचान दिलाई थी।
झोटा का कहना था कि नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं के भविष्य, परिवारों की खुशहाली और समाज की सुरक्षा से भी जुड़ी हुई है। उनके अभियान का जोर नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने और गांवों में लोगों को इस समस्या के खिलाफ जागरूक करने पर रहता था।
उनकी सक्रियता के कारण कई ग्राम पंचायतों ने भी नशे के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए थे। इन प्रस्तावों के माध्यम से गांवों में नशे की बिक्री और सेवन पर रोक लगाने के लिए सामुदायिक स्तर पर प्रयास किए गए। स्थानीय लोगों को एकजुट करने और नशे से जुड़े मामलों को सामने लाने की उनकी कोशिशों के कारण वह क्षेत्र में चर्चा में रहते थे।
हालांकि, नशे के खिलाफ उनकी सक्रियता के दौरान विवाद भी सामने आते रहे। नशे से संबंधित गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों का सामना कर रहे लोगों के साथ उनके टकराव की खबरें पहले भी चर्चा का विषय बनी थीं। अब उनकी हत्या के बाद उन विवादों की पृष्ठभूमि और घटना के संभावित कारणों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हत्या के बाद मानसा में तनाव, जांच पर टिकी निगाहें
Parvinder Singh Jhotta : परविंदर सिंह झोटा की हत्या की खबर सामने आने के बाद मानसा में तनाव का माहौल बताया जा रहा है। नशे के खिलाफ उनके अभियान से जुड़े लोगों, समर्थकों और स्थानीय नागरिकों के बीच घटना को लेकर चिंता है। इस वारदात ने न केवल झोटा के परिवार और करीबियों को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि नशे के खिलाफ सक्रिय लोगों की सुरक्षा को लेकर भी बहस तेज कर दी है।
शुरुआती जानकारी के अनुसार, एक मेडिकल स्टोर के मालिक पर गोली चलाने का आरोप लगाया गया है। बताया जा रहा है कि नशा विरोधी गतिविधियों को लेकर विवाद हुआ था। हालांकि, घटना की परिस्थितियों, विवाद की वास्तविक वजह, आरोपी की पहचान और पुलिस की कार्रवाई से संबंधित सभी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच के तथ्यों का सामने आना जरूरी है।
इस घटना के बाद लोगों की निगाहें पुलिस की कार्रवाई और जांच की दिशा पर टिकी हैं। यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि वारदात किन परिस्थितियों में हुई, क्या इसके पीछे पहले से कोई विवाद था और घटना में कथित रूप से शामिल व्यक्ति की भूमिका क्या रही। साथ ही, नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले कार्यकर्ताओं को सुरक्षा उपलब्ध कराने के मुद्दे पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भगवंत मान सरकार पर साधा निशाना
Parvinder Singh Jhotta : परविंदर सिंह झोटा की हत्या को लेकर पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने राज्य की भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस घटना को पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति और आम आदमी पार्टी सरकार के नशा विरोधी अभियान की विफलता से जोड़ते हुए सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए।
वड़िंग ने कहा कि परविंदर सिंह झोटा की दिनदहाड़े हत्या भगवंत मान सरकार की विफल कानून-व्यवस्था और सरकार के ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान की विफलता का सीधा परिणाम है। उनके अनुसार, जो व्यक्ति नशे के खिलाफ खड़ा होकर समाज को जागरूक करने का प्रयास कर रहा था, उसकी इस तरह हत्या हो जाना राज्य की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि परविंदर सिंह झोटा ने पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाई और इस समस्या के विरुद्ध पहल की, लेकिन आम आदमी पार्टी की सरकार ने उनकी पहल को कभी उचित समर्थन नहीं दिया।
वड़िंग ने अपनी पोस्ट में लिखा कि झोटा की दिनदहाड़े हत्या आम आदमी पार्टी सरकार की गंभीर विफलताओं को उजागर करती है। उन्होंने पीड़ित परिवार और झोटा के समर्थकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस मुश्किल घड़ी में उनकी संवेदनाएं परिवार के साथ हैं।
कांग्रेस नेता की इस प्रतिक्रिया के बाद घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होने की संभावना है। पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का प्रमुख मुद्दा रही है। विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे पर एक-दूसरे की सरकारों और नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में नशे के खिलाफ सक्रिय एक कार्यकर्ता की हत्या ने राज्य सरकार की नीतियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
2023 में परविंदर के परिवार से मुलाकात का भी किया जिक्र
Parvinder Singh Jhotta : अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने अपनी प्रतिक्रिया में परविंदर सिंह झोटा के परिवार के साथ हुई पुरानी मुलाकात का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में वह परविंदर के पिता और परिवार के अन्य सदस्यों से मिले थे। उस समय झोटा को कथित रूप से झूठे आरोप में गिरफ्तार किए जाने का मामला सामने आया था।
वड़िंग ने कहा कि उस समय उन्होंने परविंदर के पिता और उनके परिवार से मुलाकात की थी। अब उनकी हत्या की खबर सामने आने के बाद उन्होंने परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है। कांग्रेस नेता ने ईश्वर से प्रार्थना की कि इस कठिन समय में परिवार को दुख सहने की शक्ति मिले।
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “वाहेगुरु इस मुश्किल समय में परिवार को शक्ति दें।”
वड़िंग के इस बयान के जरिए पुराने घटनाक्रम को भी सामने लाया गया है। हालांकि, वर्ष 2023 में हुई गिरफ्तारी और मौजूदा हत्या के मामले के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। दोनों घटनाओं के संबंध में कोई निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित तथ्यों और जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना होगा।
नशे के खिलाफ अभियान चलाने वालों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
Parvinder Singh Jhotta : परविंदर सिंह झोटा की हत्या ने पंजाब में नशे के खिलाफ काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। नशे की लत और नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री का असर केवल किसी एक व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है। खासकर युवाओं में नशे की बढ़ती समस्या परिवारों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है।
ऐसी स्थिति में नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने वाले लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। वे स्थानीय स्तर पर लोगों को जागरूक करने, संदिग्ध गतिविधियों को सामने लाने और समुदायों को एकजुट करने का प्रयास करते हैं। लेकिन यदि इस तरह के अभियान चलाने वालों को विवादों या हिंसा का सामना करना पड़े, तो उनकी सुरक्षा और प्रशासनिक सहयोग का सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है।
Parvinder Singh Jhotta : झोटा की हत्या के बाद यह भी चर्चा हो रही है कि नशे के खिलाफ सरकारी अभियानों को प्रभावी बनाने के लिए केवल कार्रवाई और जागरूकता पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है। साथ ही, प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री और नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच तथा कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है।
फिलहाल, परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में घटना की पूरी परिस्थितियों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट होने का इंतजार है। पुलिस जांच से ही यह सामने आ सकेगा कि विवाद किस बात को लेकर हुआ और गोलीबारी के पीछे वास्तविक कारण क्या था।







