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Neha Bora : दिल्ली पुलिस ने आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को किया रिहा, अभिजीत दिपके समेत अन्य प्रदर्शनकारियों की रिहाई की उठाई मांग

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eha Bora Released, Demands Release of Abhijit Dipke

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर। Neha Bora :


दिल्ली में जारी विरोध-प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों की हिरासत को लेकर राजनीतिक एवं छात्र संगठनों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने रिहा कर दिया है। उन्हें 16 अक्टूबर की शाम तिरंगा मार्च के दौरान दिल्ली के मंडी हाउस इलाके के पास से हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत आवश्यक औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद उन्हें रिहा किया।

रिहाई के बाद नेहा बोरा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की अपनी मांग को दोहराया। उन्होंने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके सहित उन अन्य प्रदर्शनकारियों को भी रिहा करने की मांग की, जो उनके अनुसार अब भी हिरासत में हैं। नेहा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और बाद में कुछ समय के भीतर छोड़ देने की कार्रवाई का इस्तेमाल लोगों के बीच भय पैदा करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपने अधिकारों, मताधिकार और जवाबदेही से जुड़े सवाल उठाने का अवसर मिलना चाहिए।

मंडी हाउस के पास से हिरासत में ली गई थीं नेहा बोरा

Neha Bora : प्राप्त जानकारी के अनुसार, आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को 16 अक्टूबर की शाम तिरंगा मार्च में शामिल होने के दौरान दिल्ली के मंडी हाउस के पास से पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसके बाद उन्हें आरके पुरम पुलिस स्टेशन ले जाया गया। पुलिस ने दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद उन्हें रिहा कर दिया।

रिहाई के बाद नेहा बोरा ने मीडिया से बातचीत करते हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के तरीके पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में चल रहे आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों को पकड़े जाने, पुलिस स्टेशन ले जाए जाने और कुछ समय बाद रिहा किए जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। उनके मुताबिक, ऐसी कार्रवाई से यह सवाल उठता है कि लोगों को हिरासत में लेने की आवश्यकता क्या है और इसका उद्देश्य क्या है।

नेहा ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के बाद अगली सुबह या अगली शाम छोड़ दिए जाने की घटनाओं को केवल सामान्य प्रक्रिया के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने के बाद कुछ समय में छोड़ दिया जाता है, तो ऐसी कार्रवाई की जरूरत क्यों पड़ती है। हालांकि, हिरासत की प्रत्येक घटना के कारण और कानूनी आधार का निर्धारण संबंधित मामले के तथ्यों तथा पुलिस की कार्रवाई के आधार पर किया जाना चाहिए।

‘लोगों को बिना वजह हिरासत में लिया जा रहा है’

मीडिया से बातचीत के दौरान नेहा बोरा ने सरकार और पुलिस की कार्रवाई को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उनके विचार में कानूनी और गैर-कानूनी कार्रवाई के बीच की सीमाओं का उल्लंघन काफी समय से होता रहा है। उन्होंने दावा किया कि देश में लोगों को बिना किसी स्पष्ट वजह के हिरासत में लेने और घंटों तक पुलिस स्टेशन में बैठाकर रखने की घटनाएं होती रही हैं।

नेहा बोरा ने कहा, “भारत सरकार ने कानूनी और गैर-कानूनी होने की सारी हदें बहुत पहले ही पार कर दी हैं। हमारे देश में लंबे समय से यह होता आ रहा है कि लोगों को बिना किसी वजह के हिरासत में ले लिया जाता है और घंटों तक बैठाकर रखा जाता है। अब यह बात और भी साफ हो गई है, क्योंकि अभी जो आंदोलन चल रहा है, उसमें ऐसा रोज हो रहा है।”

उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और फिर कुछ समय बाद रिहा करने की घटनाएं लगातार देखने को मिल रही हैं। उनके अनुसार, कई बार लोगों को पकड़कर पुलिस स्टेशन ले जाया जाता है और फिर अगली सुबह या अगली शाम उन्हें छोड़ दिया जाता है।

नेहा ने सवाल उठाया कि ऐसी हिरासतों का वास्तविक उद्देश्य क्या है और क्या इनके माध्यम से आम नागरिकों के मन में डर पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि हिरासत में लेने और कुछ समय बाद रिहा करने की इस प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही तय होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि उनके साथ हुई घटना ने भी इस सवाल को सामने ला दिया है कि प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने का आधार क्या होता है। नेहा के मुताबिक, नागरिकों को अपने अधिकारों और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने के कारण अनिश्चितता का सामना नहीं करना चाहिए।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई

Neha Bora : नेहा बोरा ने अपनी रिहाई के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को फिर से दोहराया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से भी इस मुद्दे पर कदम उठाने की अपील की। उनके बयान के अनुसार, मौजूदा विरोध-प्रदर्शन के पीछे चुनावी जवाबदेही और मताधिकार से जुड़े सवाल प्रमुख हैं।

नेहा ने कहा कि प्रदर्शन और आंदोलन के कारण कारोबारियों के व्यापार पर असर पड़ रहा है। उन्होंने इस स्थिति का उल्लेख करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भाजपा से अपना रुख बदलने तथा अहंकार छोड़ने की अपील की।

उन्होंने कहा, “हम ये मानते हैं कि प्रदर्शन और आंदोलन से व्यापारियों का व्यापार प्रभावित हो रहा है। इसलिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भाजपा अपना अहंकार छोड़ें। इसके साथ ही भाजपा मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा ले, जिससे व्यापारियों को नुकसान न हो।”

Neha Bora : नेहा के इस बयान में एक ओर विरोध-प्रदर्शन जारी रखने से व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का जिक्र था, तो दूसरी ओर उन्होंने चुनावी जवाबदेही के मुद्दे पर अपनी मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि संबंधित पक्षों को इस विवाद का समाधान निकालने के लिए पहल करनी चाहिए, ताकि आंदोलन के कारण आम लोगों और कारोबारियों को होने वाली परेशानियों को कम किया जा सके।
हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग नेहा बोरा और उनके संगठन का राजनीतिक रुख है। इस मांग के संबंध में संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं और आधिकारिक बयानों को अलग-अलग देखना आवश्यक है।

अभिजीत दिपके समेत सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा करने की मांग

नेहा बोरा ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके को हिरासत में लिए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि अभिजीत दिपके को रिहा किया जाना चाहिए। नेहा ने यह भी कहा कि उन्हें पहले जानकारी नहीं थी कि अभिजीत को हिरासत में लिया गया है।

Neha Bora : उन्होंने अभिजीत दिपके के साथ उन सभी अन्य प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग की, जिन्हें उनके अनुसार गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया है। नेहा का कहना था कि प्रदर्शन में शामिल लोग जवाबदेही की मांग कर रहे हैं और अपने मताधिकार से जुड़े सवाल उठा रहे हैं।

नेहा बोरा ने कहा, “अभिजीत को रिहा किया जाना चाहिए। वैसे, मुझे पता ही नहीं था कि उसे हिरासत में लिया गया है। इसलिए, उसे और उन सभी अन्य प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाना चाहिए जिन्हें गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया है। वे आम नागरिक हैं जो जवाबदेही और अपने वोट देने के अधिकार की मांग कर रहे हैं। इस तरह से गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लेना और लोगों को रात भर पुलिस स्टेशन में रखना, इसका कोई मतलब ही नहीं बनता।”

नेहा के बयान के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को लंबे समय तक पुलिस स्टेशन में रखना और बाद में रिहा करना नागरिकों के अधिकारों तथा पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही से जुड़े सवाल खड़े करता है। उन्होंने मांग की कि अभिजीत दिपके समेत अन्य हिरासत में लिए गए लोगों की स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि उन्हें हिरासत में रखने का कोई वैध आधार नहीं है, तो उन्हें रिहा किया जाए।

मताधिकार और जवाबदेही को लेकर जारी है विरोध

Neha Bora : नेहा बोरा ने अपने बयान में मताधिकार और जवाबदेही को मौजूदा विरोध-प्रदर्शन का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मांगें लोकतांत्रिक प्रक्रिया से संबंधित हैं और नागरिकों को चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाने का अधिकार मिलना चाहिए।
उनके मुताबिक, जब लोग चुनावी प्रक्रिया, मताधिकार और जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़े मुद्दे उठाते हैं, तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे आंदोलन में शामिल लोगों के बीच चिंता पैदा होती है।

नेहा की मांग है कि अभिजीत दिपके सहित अन्य प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाए और हिरासत में लिए जाने की घटनाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट की जाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को भी दोहराया है।
इस पूरे घटनाक्रम में नेहा बोरा की रिहाई और उनके बयान ने दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिरासत की कार्रवाई, पुलिस की भूमिका, चुनावी जवाबदेही तथा नागरिकों के मताधिकार से जुड़े मुद्दों को फिर से चर्चा में ला दिया है।

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