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Mahagauri Puja : मां महागौरी की उपासना से सिद्धियों की प्राप्ति, सुबह 11:49 से दोपहर 12:34 बजे तक अभिजीत मुहूर्त

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18 October 2026 Panchang : Mahagauri Puja, Shubh Muhurat and Rahukaal

निवेदिता झा, नई दिल्ली। Mahagauri Puja :


हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। भारतीय सनातन परंपरा में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने से पहले तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के साथ-साथ शुभ-अशुभ मुहूर्त का विचार किया जाता है। विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करने, निवेश करने, यात्रा पर जाने, पूजा-पाठ करने और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करने जैसे कार्यों के लिए पंचांग की सहायता ली जाती है।

मान्यता है कि शुभ समय में कार्य आरंभ करने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं और कार्यों में आने वाली बाधाएं कम होती हैं।
रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्र का आठवां दिन है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की आराधना करने से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं, जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। मां महागौरी को पवित्रता, शांति, सौम्यता और करुणा का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र की अष्टमी तिथि पर श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना, मंत्र जाप, दुर्गा सप्तशती का पाठ और कन्या पूजन जैसे धार्मिक कार्य करते हैं।

पंचांग के अनुसार, 18 अक्टूबर को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि सुबह 8 बजकर 28 मिनट से प्रारंभ होगी, जो अगले दिन 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि का आरंभ होगा। रविवार को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। वहीं, अमृतकाल सुबह 7 बजकर 28 मिनट से 9 बजकर 16 मिनट तक बताया गया है। इस दिन राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल का समय भी जानना महत्वपूर्ण है, ताकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ कार्यों की योजना बनाई जा सके।

18 अक्टूबर 2026 का पंचांग एक नजर में

  • दिन और तारीख : रविवार, 18 अक्टूबर 2026
  • तिथि : शुक्ल पक्ष अष्टमी
  • पर्व : शारदीय नवरात्र, आठवां दिन
  • सूर्योदय : सुबह 6:28 बजे
  • सूर्यास्त : शाम 5:55 बजे
  • चंद्रोदय : दोपहर 12:58 बजे
  • चंद्रास्त : रात 11:50 बजे
  • अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:49 से दोपहर 12:34 बजे
  • अमृतकाल : सुबह 7:28 से 9:16 बजे
  • राहुकाल : शाम 4:29 से 5:55 बजे
  • दिशाशूल : पश्चिम दिशा

नोट: पंचांग में दिए गए समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। यहां समय उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर दिया गया है।

मां महागौरी की पूजा से प्राप्त होती है सुख-शांति और सिद्धियां

Mahagauri Puja : शारदीय नवरात्र के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की उपासना की जाती है। मां महागौरी को अत्यंत शांत, सौम्य, करुणामयी और उज्ज्वल स्वरूप वाली देवी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां की आराधना करने से भक्तों के जीवन में सकारात्मकता आती है और मन को शांति मिलती है।

मां महागौरी का स्वरूप श्वेत वर्ण का बताया गया है। वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, इसलिए उन्हें श्वेतांबरधरा भी कहा जाता है। उनके आभूषण भी सफेद रंग के माने जाते हैं। उनका वाहन बैल है। मां की चार भुजाएं बताई गई हैं। उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में डमरू होता है, जबकि अन्य हाथ अभय और वरद मुद्रा में माने जाते हैं। उनका यह स्वरूप शक्ति, पवित्रता, शांति और भक्तों पर कृपा का प्रतीक है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की कठोर तपस्या और दिव्य स्वरूप से जुड़ी कथाएं भक्तों को श्रद्धा, संयम और साधना की प्रेरणा देती हैं। नवरात्र के आठवें दिन मां की पूजा विशेष श्रद्धा के साथ की जाती है। अनेक श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, शांति तथा मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

मान्यता है कि मां महागौरी की उपासना से पूर्व में किए गए पापों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है और भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। मां की कृपा से जीवन में व्याप्त नकारात्मकता दूर होती है और व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। भक्त मां से सुखी पारिवारिक जीवन, मानसिक शांति, समृद्धि और सद्बुद्धि की कामना करते हैं।

नवरात्र की अष्टमी तिथि पर कई घरों और मंदिरों में विशेष पूजन किया जाता है। कुछ परिवारों में इस दिन कन्या पूजन की परंपरा है, जबकि अन्य परिवार नवमी तिथि पर कन्या पूजन करते हैं। इस दौरान छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाता है और भोजन कराकर आशीर्वाद लिया जाता है। पूजा की विधि परिवार की परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

18 October 2026 Panchang: Mahagauri Puja, Shubh Muhurat and Rahukaal

18 अक्टूबर को अष्टमी तिथि का समय

Mahagauri Puja : पंचांग के अनुसार, 18 अक्टूबर 2026 को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि सुबह 8 बजकर 28 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि अगले दिन, 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इसके बाद शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी।
हिंदू पंचांग में तिथि की गणना सूर्य और चंद्रमा की आपसी स्थिति के आधार पर की जाती है। इसी कारण तिथि का आरंभ और समापन सामान्य अंग्रेजी कैलेंडर की मध्यरात्रि से निर्धारित नहीं होता। कोई तिथि एक दिन के सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय के बाद तक भी रह सकती है।

धार्मिक अनुष्ठानों में तिथि का विशेष महत्व है। नवरात्र की अष्टमी पर मां महागौरी की पूजा की जाती है। हालांकि, व्रत, कन्या पूजन और अन्य अनुष्ठानों के लिए तिथि की स्थानीय गणना तथा परंपरा को ध्यान में रखना उचित माना जाता है।

रविवार को सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

18 अक्टूबर, रविवार को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 28 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 55 मिनट पर बताया गया है। सूर्योदय और सूर्यास्त का समय दैनिक धार्मिक कार्यों, सूर्य उपासना और दिन के शुभ-अशुभ काल की गणना के लिए उपयोगी होता है।

हिंदू परंपरा में सुबह सूर्योदय के समय स्नान, ध्यान, सूर्य को अर्घ्य देने और पूजा-पाठ करने का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु दिन की शुरुआत ईश्वर का स्मरण करके करते हैं। रविवार का दिन सूर्य देव की उपासना से भी जुड़ा हुआ है। इस दिन अनेक लोग सूर्य मंत्र का जाप करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।

इसी दिन चंद्रोदय दोपहर 12 बजकर 58 मिनट पर और चंद्रास्त रात 11 बजकर 50 मिनट पर बताया गया है। चंद्रमा की स्थिति का उपयोग पंचांग की विभिन्न गणनाओं में किया जाता है। चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय धार्मिक अनुष्ठानों तथा चंद्रमा से संबंधित व्रतों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

सूर्य के चित्रा नक्षत्र में रहने का ज्योतिषीय महत्व

Mahagauri Puja : पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में सूर्य को आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, प्रतिष्ठा, ऊर्जा, प्रशासन और अधिकार का कारक माना जाता है। वहीं, चित्रा नक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह है। मंगल को साहस, पराक्रम, उत्साह, भूमि, तकनीकी कौशल और कार्य करने की क्षमता से जोड़ा जाता है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूर्य और मंगल के बीच मित्रता मानी जाती है। इसी आधार पर सूर्य का चित्रा नक्षत्र में स्थित होना साहस, आत्मविश्वास, नेतृत्व और सक्रियता जैसे गुणों से जोड़ा जाता है। हालांकि, किसी व्यक्ति के जीवन पर इसका प्रभाव उसकी जन्मकुंडली, ग्रहों की स्थिति और अन्य ज्योतिषीय कारकों के आधार पर अलग-अलग माना जाता है।

नौकरीपेशा लोगों के लिए इस स्थिति को कार्यक्षेत्र में सक्रियता और जिम्मेदारी से जोड़कर देखा जाता है। ज्योतिषीय व्याख्याओं के अनुसार, प्रशासन, प्रबंधन, नेतृत्व और निर्णय लेने से जुड़े कार्यों में लगे लोगों के लिए यह समय महत्वपूर्ण हो सकता है। कुछ मान्यताओं में इसे
वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपनी योग्यता प्रदर्शित करने और नई जिम्मेदारियां संभालने के अवसरों से भी जोड़ा जाता है।

हालांकि, पदोन्नति, वेतन वृद्धि या नौकरी में सफलता की कोई निश्चित गारंटी केवल नक्षत्र की स्थिति के आधार पर नहीं दी जा सकती। व्यावहारिक जीवन में ऐसे परिणाम व्यक्ति के काम, योग्यता, परिस्थितियों और अवसरों पर भी निर्भर करते हैं।

रविवार रात 11:55 बजे तक रहेगा सुकर्मा योग

Mahagauri Puja : पंचांग के अनुसार, रविवार को रात 11 बजकर 55 मिनट तक सुकर्मा योग रहेगा। पारंपरिक हिंदू पंचांग में 27 नित्य योगों की गणना की जाती है। सुकर्मा योग को इनमें सातवां योग बताया गया है और धार्मिक मान्यताओं में इसे शुभ योगों में गिना जाता है।

सुकर्मा शब्द का अर्थ अच्छे या शुभ कर्म से जुड़ा हुआ है। इस योग को सद्कर्म, धार्मिक कार्य, परोपकार और सकारात्मक प्रयासों के लिए अनुकूल माना जाता है। मान्यता है कि इस योग में श्रद्धा और निष्ठा के साथ किए गए कार्य शुभ परिणाम देने वाले हो सकते हैं।
परंपरागत ज्योतिषीय विवरणों में सुकर्मा योग के देवता इंद्र माने जाते हैं। इंद्र को देवताओं के राजा और शक्ति, ऐश्वर्य तथा वर्षा से संबंधित देवता के रूप में वर्णित किया जाता है। इसी वजह से सुकर्मा योग को कुछ धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व दिया जाता है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सुकर्मा योग में जन्म लेने वाले व्यक्तियों को दयालु, उदार, परोपकारी, विनम्र और धार्मिक प्रवृत्ति वाला बताया जाता है। ऐसे लोगों के बारे में माना जाता है कि वे मेहनती, स्वाभिमानी, तेजस्वी और आशावादी हो सकते हैं। हालांकि, ये पारंपरिक ज्योतिषीय धारणाएं हैं, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित व्यक्तित्व निर्धारण नहीं।

इस दिन श्रद्धालु पूजा-पाठ, मंत्र जाप, दान-पुण्य और अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए इस योग का विचार कर सकते हैं। किसी विशेष संस्कार या महत्वपूर्ण कार्य के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि करना उपयोगी रहेगा।

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 से दोपहर 12:34 बजे तक

Mahagauri Puja : 18 अक्टूबर 2026 को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। यह समय दिन के महत्वपूर्ण शुभ मुहूर्तों में गिना जाता है। हिंदू धार्मिक परंपरा में अभिजीत मुहूर्त को अनेक सामान्य शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल माना जाता है।

अभिजीत मुहूर्त की अवधि सामान्यतः दिनमान के आधार पर निकाली जाती है। इसकी प्रचलित गणना में यह दिन के मध्य भाग के आसपास पड़ता है और लगभग 48 मिनट का होता है। हालांकि, वास्तविक समय सूर्योदय और सूर्यास्त के स्थानीय समय के अनुसार बदल सकता है।

मान्यता है कि अभिजीत मुहूर्त में आरंभ किए गए शुभ कार्यों में सफलता की संभावना अच्छी रहती है और बाधाओं को दूर करने में सहायता मिलती है। इसी कारण लोग इस अवधि में पूजा-पाठ, मंत्र जाप, धार्मिक संकल्प और कुछ महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करना पसंद करते हैं।

परंपरागत विवरण के अनुसार, जब सूर्य दिन के मध्य भाग के आसपास होता है, तब अभिजीत मुहूर्त की गणना की जाती है। इस समय को सकारात्मकता और शुभता से जोड़ा जाता है। हालांकि, प्रत्येक कार्य के लिए यही मुहूर्त उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है। विवाह, गृह प्रवेश या अन्य विशेष संस्कारों के लिए अलग-अलग नियम और मुहूर्त देखे जा सकते हैं।
यदि आप 18 अक्टूबर को कोई सामान्य शुभ कार्य करने की योजना बना रहे हैं, तो दिए गए समय को ध्यान में रख सकते हैं। फिर भी, स्थान के अनुसार पंचांग की पुष्टि करना उचित रहेगा।

अमृतकाल: सुबह 7:28 से 9:16 बजे तक

Mahagauri Puja : रविवार को अमृतकाल सुबह 7 बजकर 28 मिनट से 9 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष और पंचांग की परंपराओं में अमृतकाल को शुभ और सकारात्मक समय माना जाता है। इसे ऐसे मुहूर्त के रूप में देखा जाता है, जिसमें किए गए कार्यों के अच्छे परिणाम मिलने की धार्मिक मान्यता है।

अमृतकाल का उल्लेख विशेष रूप से पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान, नए कार्यों की योजना और महत्वपूर्ण गतिविधियों के संदर्भ में किया जाता है। कुछ लोग इस समय को नए व्यवसाय से संबंधित काम शुरू करने, निवेश के लिए योजना बनाने, यात्रा की शुरुआत करने या किसी महत्वपूर्ण निर्णय पर आगे बढ़ने के लिए अनुकूल मानते हैं।

धार्मिक दृष्टि से इस अवधि में ईश्वर का स्मरण, मंत्र जाप, ध्यान और दान-पुण्य जैसे कार्य किए जा सकते हैं। श्रद्धालु मानते हैं कि शुभ मुहूर्त में मन को एकाग्र करके किया गया कार्य सकारात्मक भावनाओं और विश्वास को मजबूत करता है।
हालांकि, किसी भी वित्तीय निवेश या व्यापारिक निर्णय को केवल मुहूर्त के आधार पर नहीं लेना चाहिए। इसके लिए आर्थिक स्थिति, जोखिम, जरूरी जानकारी और व्यावहारिक परिस्थितियों का आकलन करना आवश्यक है।

राहुकाल: शाम 4:29 से 5:55 बजे तक

Mahagauri Puja : 18 अक्टूबर 2026, रविवार को राहुकाल दोपहर बाद 4 बजकर 29 मिनट से शाम 5 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। हिंदू ज्योतिष में राहुकाल को सामान्यतः नए और मांगलिक कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ समय माना जाता है। इसलिए पारंपरिक मान्यता के अनुसार, इस अवधि में महत्वपूर्ण नए कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।

राहुकाल की गणना सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में विभाजित करके की जाती है। सप्ताह के प्रत्येक दिन के लिए राहुकाल का भाग अलग होता है। इसी कारण रविवार, सोमवार, मंगलवार और अन्य दिनों में राहुकाल का समय बदलता रहता है।
राहुकाल की अवधि सामान्यतः लगभग डेढ़ घंटे के आसपास होती है, लेकिन वास्तविक अवधि स्थानीय दिनमान पर निर्भर कर सकती है।

सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होने के कारण अलग-अलग शहरों में राहुकाल का समय भी अलग हो सकता है।
पारंपरिक मान्यता के अनुसार, राहुकाल में नया व्यवसाय शुरू करना, किसी नए काम का शुभारंभ करना या मांगलिक अनुष्ठान आरंभ करना टाल दिया जाता है। हालांकि, पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखने पर सामान्यतः रोक नहीं मानी जाती।

राहुकाल को लेकर मान्यताएं धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित हैं। किसी कार्य की सफलता केवल इस अवधि पर निर्भर नहीं करती। आवश्यक कार्यों, आपात परिस्थितियों और दैनिक जिम्मेदारियों को व्यावहारिक जरूरत के अनुसार पूरा करना चाहिए।

यमगंड काल: दोपहर 12:12 से 1:37 बजे तक

Mahagauri Puja : पंचांग के अनुसार, रविवार को यमगंड काल दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 1 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय परंपरा में यमगंड को अशुभ माने जाने वाले समयों में शामिल किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवधि में नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए।

यमगंड का संबंध यमराज से माना जाता है, जिन्हें हिंदू धर्म में मृत्यु और धर्म के देवता के रूप में वर्णित किया गया है। इसी कारण पारंपरिक पंचांग में इस काल को विशेष सावधानी बरतने वाला समय माना जाता है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यमगंड के दौरान नए व्यापार का शुभारंभ, किसी महत्वपूर्ण परियोजना की शुरुआत या मांगलिक कार्य आरंभ करने से बचा जाता है। कुछ लोग इस समय नई यात्रा शुरू करने और बड़े आर्थिक लेनदेन से भी परहेज करते हैं।
हालांकि, यमगंड के कारण किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य, आयु या आर्थिक स्थिति पर निश्चित रूप से प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसे धार्मिक पंचांग की पारंपरिक मान्यता के रूप में समझना चाहिए।

यदि किसी आवश्यक कार्य या यात्रा का समय इसी अवधि में पड़ रहा है, तो वास्तविक परिस्थितियों और जरूरतों को प्राथमिकता देना चाहिए। मुहूर्त का विचार व्यक्तिगत आस्था का विषय है।

गुलिक काल: दोपहर 3:03 से 4:29 बजे तक

Mahagauri Puja : 18 अक्टूबर को गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 3 मिनट से शाम 4 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिष में गुलिक काल की गणना भी दिन के समय के विभाजन के आधार पर की जाती है। कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में इसे सावधानी बरतने वाला समय माना जाता है, जबकि कुछ परंपराओं में इसके प्रभाव की व्याख्या अलग तरीके से की जाती है।

गुलिक को ज्योतिषीय गणना में एक उपग्रह या छाया बिंदु के रूप में वर्णित किया जाता है। कुछ मान्यताओं में इसे अशुभ प्रभावों से जोड़ा जाता है। इस वजह से कई लोग इस काल में नए और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचते हैं।
हालांकि, गुलिक काल के संबंध में सभी ज्योतिषीय परंपराएं एक जैसी राय नहीं रखतीं। कुछ परंपराओं में इसे दोहराए जाने वाले कार्यों या नियमित गतिविधियों के लिए अलग दृष्टिकोण से भी देखा जाता है। इसलिए इसे हर परिस्थिति में समान रूप से अशुभ मानना उचित नहीं होगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं। कुछ ज्योतिषीय व्याख्याओं में नियमित कार्य, दान या बार-बार किए जाने वाले कामों के लिए इसे अलग महत्व दिया जाता है।

बैंक में धन जमा करना, दान देना या निवेश करना गुलिक काल में शुभ है या नहीं, इस विषय पर भी अलग-अलग मान्यताएं हो सकती हैं। विशेष रूप से निवेश और वित्तीय निर्णय लेते समय केवल ज्योतिषीय समय के बजाय आर्थिक स्थिति, जोखिम और संबंधित जानकारी को प्राथमिकता देनी चाहिए।

रविवार को सूर्य तुला राशि में रहेंगे

Mahagauri Puja : वैदिक ज्योतिष के अनुसार, 18 अक्टूबर को सूर्य तुला राशि में रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता में सूर्य को आत्मविश्वास, आत्मबल, प्रतिष्ठा, नेतृत्व, पिता और प्रशासनिक क्षमता का कारक माना जाता है। तुला राशि में सूर्य को नीच का माना जाता है, जिसका पारंपरिक अर्थ यह है कि इस राशि में सूर्य की स्थिति को ज्योतिषीय दृष्टि से कमजोर समझा जाता है।

ज्योतिषीय व्याख्याओं के अनुसार, तुला राशि में सूर्य की स्थिति व्यक्ति के आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता और नेतृत्व से जुड़े मामलों में उतार-चढ़ाव का संकेत दे सकती है। हालांकि, किसी व्यक्ति पर इसका वास्तविक ज्योतिषीय प्रभाव उसकी पूरी जन्मकुंडली और ग्रहों की अन्य स्थितियों के आधार पर अलग-अलग बताया जाता है।

इस दिन सूर्य के साथ बुध और शुक्र की स्थिति से संबंधित ग्रह योगों की चर्चा भी की गई है। सूर्य और बुध की युति को सामान्यतः बुधादित्य योग कहा जाता है, जबकि सूर्य और शुक्र की युति को कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में शुक्रादित्य योग कहा जाता है। इन ग्रहों की एक साथ स्थिति को त्रिग्रही योग के संदर्भ में भी देखा जा सकता है, बशर्ते उनकी वास्तविक स्थिति और युति की शर्तें पूरी हों।
ज्योतिष में बुध को बुद्धि, संवाद, व्यापार और गणना से जोड़ा जाता है, जबकि शुक्र को सुख-सुविधाओं, कला, सौंदर्य और भौतिक संपन्नता का कारक माना जाता है। सूर्य, बुध और शुक्र की एक साथ स्थिति की व्याख्या करते समय इन सभी ग्रहों के पारंपरिक कारकों पर विचार किया जाता है।

हालांकि, ग्रहों की स्थिति से आर्थिक लाभ, नौकरी में सफलता या व्यक्तिगत जीवन में बदलाव की निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। ऐसी ज्योतिषीय व्याख्याएं पारंपरिक विश्वासों का हिस्सा हैं।

चंद्रमा शाम 7:33 बजे तक धनु राशि में रहेंगे

Mahagauri Puja : पंचांग के अनुसार, रविवार को चंद्र देव शाम 7 बजकर 33 मिनट तक धनु राशि में रहेंगे। इसके बाद वे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं, मानसिक स्थिति, कल्पनाशीलता और व्यक्ति के स्वभाव से संबंधित ग्रह माना जाता है।
धनु राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति माने जाते हैं। ज्योतिषीय परंपरा में धनु राशि को ज्ञान, धर्म, आशावाद, स्वतंत्र विचार और नई चीजें सीखने की इच्छा से जोड़ा जाता है। इसी आधार पर चंद्रमा के धनु राशि में रहने को सकारात्मक सोच, उत्साह और आशावादी दृष्टिकोण से संबंधित माना जाता है।

पारंपरिक ज्योतिषीय व्याख्याओं के अनुसार, इस स्थिति में व्यक्ति कठिन परिस्थितियों के बीच भी समाधान खोजने और आगे बढ़ने की प्रेरणा महसूस कर सकता है। अध्ययन, ज्ञान प्राप्त करने, धार्मिक गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं पर विचार करने को भी इस राशि से जोड़ा जाता है।

शाम 7 बजकर 33 मिनट के बाद चंद्रमा के मकर राशि में प्रवेश करने पर ज्योतिषीय व्याख्या बदल जाती है। मकर राशि का स्वामी शनि माना जाता है। इसे अनुशासन, जिम्मेदारी, मेहनत, व्यावहारिक सोच और लक्ष्य के प्रति समर्पण से जोड़ा जाता है।
हालांकि, चंद्रमा की राशि के आधार पर किसी व्यक्ति की भावनात्मक स्थिति या भविष्य का निश्चित आकलन नहीं किया जा सकता। ये व्याख्याएं वैदिक ज्योतिष की पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं।

रविवार को पश्चिम दिशा में रहेगा दिशाशूल

Mahagauri Puja : 18 अक्टूबर 2026, रविवार को दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। हिंदू पंचांग और ज्योतिषीय परंपरा में दिशाशूल का अर्थ उस दिशा से है, जिसमें किसी विशेष दिन यात्रा शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।
पारंपरिक मान्यता के अनुसार, रविवार को पश्चिम दिशा में दिशाशूल होता है। इसी कारण कुछ लोग इस दिन पश्चिम दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से पहले शुभ समय या अन्य पारंपरिक उपायों का विचार करते हैं।
दिशाशूल की अवधारणा धार्मिक और ज्योतिषीय विश्वासों का हिस्सा है। यात्रा के लिए दिशा चुनते समय दूरी, मौसम, यातायात, सुरक्षा और अन्य व्यावहारिक परिस्थितियों को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

यदि रविवार को पश्चिम दिशा में यात्रा करना जरूरी हो, तो केवल दिशाशूल के कारण जरूरी यात्रा को टालना आवश्यक नहीं है। व्यक्ति अपनी आस्था के अनुसार पंचांग का विचार कर सकता है और साथ ही यात्रा की सुरक्षा तथा सुविधाओं पर ध्यान दे सकता है।

18 अक्टूबर को पूजा-पाठ और शुभ कार्यों की योजना कैसे बनाएं?

Mahagauri Puja : शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि होने के कारण 18 अक्टूबर को मां महागौरी की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व रहेगा। श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके मां की पूजा कर सकते हैं। पूजा में पुष्प, दीप, धूप, नैवेद्य और मंत्र जाप को परंपरा के अनुसार शामिल किया जा सकता है।

दिन के शुभ समयों में अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल का विशेष उल्लेख है। धार्मिक मान्यताओं का पालन करने वाले लोग इन अवधियों में पूजा-पाठ, संकल्प और अन्य सामान्य शुभ कार्यों की योजना बना सकते हैं।

दिन के राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल को भी पंचांग में ध्यान देने योग्य माना जाता है। हालांकि, अलग-अलग कार्यों के लिए मुहूर्त का चयन स्थानीय पंचांग और धार्मिक परंपरा के अनुसार करना उचित रहेगा।

यह भी ध्यान रखना चाहिए कि पंचांग में दिए गए समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। यहां उल्लेखित समयों की गणना किसी विशेष स्थान के लिए की गई हो सकती है। इसलिए नई दिल्ली के समय को अन्य शहरों में लागू करने से पहले स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त और पंचांग की पुष्टि कर लेना चाहिए।

18 अक्टूबर 2026 का धार्मिक महत्व मां महागौरी की उपासना, शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि और शुभ मुहूर्तों से जुड़ा है। इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 से दोपहर 12:34 बजे तक और अमृतकाल सुबह 7:28 से 9:16 बजे तक बताया गया है। श्रद्धालु अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-पाठ कर सकते हैं और किसी विशेष अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि कर सकते हैं।

Nivedita Jha
Author: Nivedita Jha

Nivedita Jha is a graduate from Baba Saheb Bhimrao Ambedkar University. She is also a double post graduate. She has also done journalism. She has five years of experience in journalism.

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