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Lalita Panchami: ललिता पंचमी पर जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, राहुकाल, अभिजीत मुहूर्त और दिनभर के शुभ-अशुभ समय

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Lalita Panchami 2026 : Puja Muhurat, Rahu Kaal & Panchang

निवेदिता झा, नई दिल्ली। Lalita Panchami:


हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करनी हो, देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करनी हो, नए व्यवसाय का शुभारंभ करना हो, गृह प्रवेश करना हो, विवाह से जुड़ा कोई मांगलिक कार्य करना हो, यात्रा पर निकलना हो या फिर किसी नई योजना और निवेश की शुरुआत करनी हो, ऐसे अवसरों पर अनेक लोग सबसे पहले पंचांग देखकर शुभ मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करते हैं। हिंदू पंचांग के माध्यम से दिन की तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, चंद्रास्त और राहुकाल सहित कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुभ मुहूर्त में कार्य शुरू करने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने की संभावना मानी जाती है।

15 अक्टूबर 2026, गुरुवार को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है। इस दिन ललिता पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। देवी ललिता त्रिपुर सुंदरी की उपासना के लिए यह तिथि विशेष मानी जाती है। नवरात्रि के दौरान आने वाली ललिता पंचमी पर भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ माता की पूजा-अर्चना करते हैं तथा परिवार की सुख-समृद्धि, शांति, खुशहाली और कल्याण की कामना करते हैं। आइए जानते हैं 15 अक्टूबर के पंचांग के अनुसार पूजा के शुभ समय, अभिजीत मुहूर्त, अमृत काल, राहुकाल, नक्षत्र, योग, करण और दिन के अन्य महत्वपूर्ण समय के बारे में विस्तार से।

ललिता पंचमी 2026: देवी ललिता की पूजा का विशेष महत्व

Lalita Panchami: हिंदू धार्मिक परंपराओं में ललिता पंचमी को देवी ललिता त्रिपुर सुंदरी की आराधना के लिए महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। देवी ललिता को आदिशक्ति का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि उनकी विधिपूर्वक पूजा करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति, सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। इस दिन श्रद्धालु पूजा-पाठ, मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से माता के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं।

नवरात्रि के पावन दिनों में आने के कारण इस पंचमी तिथि का महत्व और भी बढ़ जाता है। भक्त सुबह स्नान करने के बाद पूजा स्थल की सफाई करते हैं और माता की प्रतिमा अथवा तस्वीर के सामने दीप प्रज्ज्वलित कर पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बाद पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करके परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है। हालांकि, पूजा की विधि और परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों तथा परिवारों में भिन्न हो सकती हैं।

15 अक्टूबर 2026 का पंचांग

Lalita Panchami: पंचांग के अनुसार, गुरुवार, 15 अक्टूबर को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि रहेगी। इस दिन कई शुभ मुहूर्त और ज्योतिषीय समय का उल्लेख किया गया है, जिनके आधार पर श्रद्धालु अपनी धार्मिक गतिविधियों और दैनिक कार्यों की योजना बना सकते हैं।

दिन के प्रमुख पंचांग विवरण इस प्रकार हैं:

  • दिन: गुरुवार
  • तिथि: आश्विन शुक्ल पंचमी
  • पर्व: ललिता पंचमी
  • सूर्योदय: सुबह 6 बजकर 27 मिनट
  • सूर्यास्त: शाम 5 बजकर 57 मिनट
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 51 मिनट से 5 बजकर 39 मिनट तक
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक
  • अमृत काल: रात 8 बजकर 58 मिनट से 10 बजकर 45 मिनट तक
  • चंद्रोदय: सुबह 10 बजकर 31 मिनट
  • चंद्रास्त: रात 9 बजकर 10 मिनट

इन समयों की सहायता से लोग दिन की धार्मिक गतिविधियों, पूजा-पाठ और अन्य कार्यों की रूपरेखा तैयार कर सकते हैं। किसी विशेष अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग और पूजा परंपरा के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि करना उचित रहेगा।

ललिता पंचमी पर अभिजीत मुहूर्त कब रहेगा?

Lalita Panchami: 15 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। इस प्रकार अभिजीत मुहूर्त की अवधि लगभग 46 मिनट की होगी।

हिंदू ज्योतिषीय परंपरा में अभिजीत मुहूर्त को सामान्य रूप से शुभ समय माना जाता है। इस अवधि में कई लोग पूजा-अर्चना, मंत्र जाप, धार्मिक संकल्प और अन्य शुभ कार्य करना पसंद करते हैं। यदि किसी व्यक्ति को दिन में किसी विशेष कार्य की शुरुआत करनी हो, तो वह अपनी सुविधा और कार्य की प्रकृति के अनुसार इस समय पर विचार कर सकता है।

हालांकि, किसी विशेष मांगलिक कार्य के लिए केवल अभिजीत मुहूर्त देखना पर्याप्त नहीं माना जाता। संबंधित कार्य की परंपरा, स्थान और अन्य पंचांग संबंधी परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जा सकता है।

अमृत काल का समय क्या है?

Lalita Panchami: 15 अक्टूबर को अमृत काल रात 8 बजकर 58 मिनट से रात 10 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। पंचांग में अमृत काल को शुभ माने जाने वाले समयों में शामिल किया जाता है। धार्मिक आस्था रखने वाले लोग इस अवधि में पूजा-पाठ, ध्यान, मंत्र जाप और अन्य आध्यात्मिक गतिविधियां कर सकते हैं।

ललिता पंचमी के अवसर पर देवी ललिता त्रिपुर सुंदरी की आराधना करने वाले श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार पूजा का समय निर्धारित कर सकते हैं। पूजा के दौरान मन की एकाग्रता, श्रद्धा और पारिवारिक धार्मिक परंपराओं का विशेष ध्यान रखा जाता है।

15 अक्टूबर को ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रभाव

Lalita Panchami: पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठा नक्षत्र 15 अक्टूबर की सुबह 4 बजकर 3 मिनट से प्रारंभ होकर 16 अक्टूबर की सुबह 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में चंद्रमा वृश्चिक राशि में संचार करेगा।

वैदिक ज्योतिष में नक्षत्रों को चंद्रमा की स्थिति के आधार पर महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रत्येक नक्षत्र की अपनी विशेषताएं बताई गई हैं और पारंपरिक ज्योतिषीय गणनाओं में नक्षत्र के आधार पर विभिन्न कार्यों के लिए समय का विचार किया जाता है।

ज्येष्ठा नक्षत्र के दौरान किसी महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान, संस्कार या अन्य मांगलिक कार्य की योजना बना रहे लोगों को संबंधित कार्य के लिए निर्धारित मुहूर्त की अलग से जानकारी लेनी चाहिए। सामान्य पंचांग में दिए गए शुभ समय और किसी विशिष्ट कार्य के लिए उपयुक्त मुहूर्त में अंतर हो सकता है।

सौभाग्य योग और शोभन योग का समय

Lalita Panchami: 15 अक्टूबर को सौभाग्य योग रात 8 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। इसके बाद शोभन योग प्रारंभ होगा।

हिंदू पंचांग में योग की गणना तिथि, नक्षत्र और अन्य विवरणों से अलग एक महत्वपूर्ण आधार है। ज्योतिषीय परंपराओं में सौभाग्य योग को शुभता से जोड़कर देखा जाता है। वहीं, शोभन योग को भी पारंपरिक पंचांग गणना में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

इन योगों के समय को जानकर श्रद्धालु अपने धार्मिक कार्यक्रमों की योजना बना सकते हैं। हालांकि, किसी विशेष कार्य की सफलता की गारंटी पंचांग में बताए गए योग से नहीं दी जा सकती। व्यावहारिक परिस्थितियों और कार्य से जुड़ी आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखना चाहिए।

15 अक्टूबर को बव, बालव और कौलव करण का समय

Lalita Panchami: पंचांग में करण भी दिन की गणना का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। एक तिथि के दो करण माने जाते हैं और पारंपरिक ज्योतिषीय गणना में इनका उपयोग विभिन्न कार्यों के समय पर विचार करने के लिए किया जाता है।

15 अक्टूबर के पंचांग के अनुसार, बव करण का समय रात 1 बजकर 13 मिनट से दोपहर 2 बजकर 16 मिनट तक बताया गया है। इसके बाद बालव करण प्रारंभ होगा, जो 16 अक्टूबर की सुबह 3 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। इसके पश्चात कौलव करण शुरू होगा।

करण के समय की जानकारी विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है, जो पंचांग की विस्तृत गणना के अनुसार अपने धार्मिक और पारंपरिक कार्यों का समय निर्धारित करते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

Lalita Panchami: 15 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 27 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 5 बजकर 57 मिनट पर बताया गया है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 51 मिनट से सुबह 5 बजकर 39 मिनट तक रहेगा।

धार्मिक परंपराओं में ब्रह्म मुहूर्त को ध्यान, योग, साधना, मंत्र जाप और आध्यात्मिक अभ्यास के लिए विशेष माना जाता है। अनेक लोग इस समय उठकर स्नान करते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और दिन की शुरुआत शांत मन से करने का प्रयास करते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त में ध्यान और प्रार्थना करने की परंपरा भारतीय संस्कृति में लंबे समय से प्रचलित है। जो लोग नियमित रूप से योग और ध्यान करते हैं, वे अपनी दिनचर्या के अनुसार इस अवधि का उपयोग कर सकते हैं।

15 अक्टूबर को चंद्रोदय सुबह 10 बजकर 31 मिनट पर होगा, जबकि चंद्रास्त रात 9 बजकर 10 मिनट पर बताया गया है। चंद्रमा के उदय और अस्त का समय चंद्रमा की स्थिति तथा स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर कुछ भिन्न हो सकता है।

15 अक्टूबर को राहुकाल कब रहेगा?

Lalita Panchami: धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक ज्योतिषीय गणना के अनुसार, राहुकाल को सामान्य रूप से अशुभ समय माना जाता है। कई लोग इस अवधि में नए मांगलिक कार्यों की शुरुआत करने से बचते हैं। हालांकि, यह मान्यता धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित है।

15 अक्टूबर, गुरुवार को राहुकाल दोपहर 1 बजकर 38 मिनट से दोपहर 3 बजकर 5 मिनट तक रहेगा।

इस दौरान नए शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचने की परंपरा है। यदि किसी व्यक्ति को नया व्यवसाय शुरू करना हो, किसी महत्वपूर्ण काम का शुभारंभ करना हो या कोई अन्य मांगलिक गतिविधि करनी हो, तो वह अपनी मान्यता के अनुसार राहुकाल के बाहर का समय चुन सकता है।

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि राहुकाल का समय स्थान के अनुसार बदल सकता है। इसलिए अपने शहर में किसी महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।

यमगण्ड काल का समय

Lalita Panchami: 15 अक्टूबर को यमगण्ड काल सुबह 6 बजकर 27 मिनट से सुबह 7 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।

पारंपरिक पंचांग में यमगण्ड काल को भी अशुभ माने जाने वाले समयों में गिना जाता है। इस कारण कुछ लोग इस अवधि में नए शुभ कार्य शुरू करने से परहेज करते हैं।

यदि कोई व्यक्ति धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कार्यों का समय निर्धारित करता है, तो वह यमगण्ड काल को ध्यान में रखकर अपनी योजना बना सकता है। हालांकि, दैनिक जीवन के आवश्यक कार्यों को केवल इस समय के आधार पर टालना जरूरी नहीं है।

कुलिक काल कब रहेगा?

Lalita Panchami: पंचांग के अनुसार, गुरुवार, 15 अक्टूबर को कुलिक काल सुबह 9 बजकर 20 मिनट से सुबह 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।

कुलिक काल को भी पारंपरिक ज्योतिषीय गणना में विचार किए जाने वाले समयों में शामिल किया जाता है। कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में नए मांगलिक कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए।

जो श्रद्धालु पंचांग के सभी प्रमुख समयों का पालन करते हैं, वे राहुकाल, यमगण्ड काल और कुलिक काल को ध्यान में रखते हुए अपने पूजा-पाठ तथा अन्य कार्यक्रमों का समय तय कर सकते हैं।

गुरुवार को किस दिशा में रहेगा दिशाशूल?

पंचांग के अनुसार, गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल माना जाता है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन दक्षिण दिशा की यात्रा शुरू करने से बचने की परंपरा है।

यदि किसी व्यक्ति को गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करनी हो, तो वह अपनी पारिवारिक परंपरा या स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आवश्यक उपायों के बारे में जानकारी ले सकता है।

हालांकि, यात्रा से संबंधित जरूरी निर्णय लेते समय सुरक्षा, मौसम, परिवहन की उपलब्धता, समय और अन्य व्यावहारिक परिस्थितियों को प्राथमिकता देना आवश्यक है। दिशाशूल एक पारंपरिक धार्मिक मान्यता है, इसे यात्रा में बाधा आने का निश्चित संकेत नहीं माना जाना चाहिए।

ललिता पंचमी पर पूजा करते समय किन बातों का रखें ध्यान?

Lalita Panchami: ललिता पंचमी के अवसर पर देवी ललिता त्रिपुर सुंदरी की पूजा करने वाले श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा की तैयारी कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा स्थल को स्वच्छ रखना, श्रद्धापूर्वक दीप प्रज्ज्वलित करना, देवी को पुष्प अर्पित करना और प्रार्थना करना इस अवसर की सामान्य धार्मिक गतिविधियों में शामिल हैं।

भक्त माता की आराधना करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, शांति और कल्याण की कामना करते हैं। कुछ श्रद्धालु इस दिन मंत्र जाप, ध्यान और धार्मिक ग्रंथों के पाठ को भी अपनी पूजा का हिस्सा बनाते हैं।

पूजा के लिए कोई विशेष मुहूर्त निर्धारित करना हो, तो पंचांग में दिए गए समय के साथ स्थानीय सूर्योदय, तिथि और अपनी परंपरा के अनुसार जानकारी प्राप्त करना उचित होगा। विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए योग्य आचार्य या स्थानीय पंचांग विशेषज्ञ से परामर्श लिया जा सकता है।

15 अक्टूबर के पंचांग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

Lalita Panchami: ललिता पंचमी के दिन पंचांग देखकर पूजा और अन्य धार्मिक गतिविधियों की योजना बनाने वाले श्रद्धालुओं के लिए अभिजीत मुहूर्त, अमृत काल, राहुकाल, यमगण्ड काल, कुलिक काल, नक्षत्र और योग की जानकारी उपयोगी हो सकती है।

15 अक्टूबर 2026 को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। अमृत काल रात 8 बजकर 58 मिनट से 10 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। वहीं, राहुकाल दोपहर 1 बजकर 38 मिनट से 3 बजकर 5 मिनट तक बताया गया है। यमगण्ड काल सुबह 6 बजकर 27 मिनट से 7 बजकर 53 मिनट तक और कुलिक काल सुबह 9 बजकर 20 मिनट से 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।

इस दिन ज्येष्ठा नक्षत्र सुबह 4 बजकर 3 मिनट से शुरू होकर अगले दिन सुबह 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। सौभाग्य योग रात 8 बजकर 38 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद शोभन योग प्रारंभ होगा। चंद्रमा वृश्चिक राशि में और सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेगा।

ध्यान दें, पंचांग के समय स्थान, सूर्योदय की गणना और इस्तेमाल की गई पंचांग पद्धति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान या मांगलिक कार्य से पहले स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित है।

इस प्रकार, 15 अक्टूबर का दिन ललिता पंचमी के धार्मिक महत्व के साथ-साथ पंचांग के विभिन्न शुभ-अशुभ समयों की जानकारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। श्रद्धालु अपनी धार्मिक आस्था, पारिवारिक परंपराओं और सुविधा के अनुसार देवी ललिता की पूजा-अर्चना कर सकते हैं तथा दिनभर के कार्यों की योजना बना सकते हैं।

Nivedita Jha
Author: Nivedita Jha

Nivedita Jha is a graduate from Baba Saheb Bhimrao Ambedkar University. She is also a double post graduate. She has also done journalism. She has five years of experience in journalism.

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