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Kakori Train Action : ‘डकैती’ नहीं, आजादी की हुंकार था काकोरी ट्रेन एक्शन : सीएम योगी

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Kakori Train Action: CM Yogi Calls It a Freedom Struggle Milestone

लखनऊ, 9 अगस्त। Kakori Train Action :  काकोरी की ऐतिहासिक घटना को केवल एक ट्रेन लूट या डकैती के रूप में देखना स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों के उद्देश्य और बलिदान को सीमित करना है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को ‘काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी समारोह’ का शुभारंभ करते हुए कहा कि यह घटना अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ क्रांतिकारियों की सुनियोजित कार्रवाई थी, जिसका अंतिम लक्ष्य भारत को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराना था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अंग्रेजों ने इस घटना को ‘डकैती’ का नाम दिया था, लेकिन दुर्भाग्य यह रहा कि आजादी के बाद भी लंबे समय तक इसे ‘काकोरी डकैती कांड’ के नाम से ही संबोधित किया जाता रहा। उनके अनुसार, इससे उन क्रांतिकारियों के योगदान और राष्ट्र के लिए किए गए सर्वोच्च बलिदान को वह सम्मान नहीं मिल पाया, जिसके वे वास्तविक हकदार थे।

काकोरी की पटरी से निकली थी आजादी की एक तेज आवाज

काकोरी ट्रेन एक्शन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का वह अध्याय है, जिसमें क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी शासन की आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती देने का साहस दिखाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्रांतिकारियों के सामने व्यक्तिगत स्वार्थ या धन-संपत्ति जुटाने का उद्देश्य नहीं था। उनका एकमात्र लक्ष्य अंग्रेजी शासन को चुनौती देना और देश को स्वतंत्रता की ओर ले जाना था।

उन्होंने कहा कि इतिहास की घटनाओं को केवल औपनिवेशिक दृष्टिकोण से देखना उचित नहीं है। जिस कार्रवाई को अंग्रेजी सत्ता ने अपने खिलाफ अपराध बताया, उसी घटना को भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के व्यापक संदर्भ में समझने की आवश्यकता है।

योगी ने कहा कि काकोरी और चौरी चौरा जैसी घटनाओं को इतिहास में उचित स्थान मिलना चाहिए, क्योंकि इनके पीछे देश को गुलामी से मुक्त कराने की तीव्र आकांक्षा थी।

आजादी किसी एक व्यक्ति की देन नहीं

Kakori Train Action : मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता किसी एक व्यक्ति, संगठन या विचारधारा के प्रयासों का परिणाम नहीं थी। देश के अलग-अलग हिस्सों में लाखों लोगों ने अपने-अपने तरीके से स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान दिया। किसी ने सत्याग्रह किया, किसी ने जेल की यातनाएं सहीं और किसी ने हथियार उठाकर अंग्रेजी सत्ता को चुनौती दी।

उन्होंने कहा कि अनेक क्रांतिकारियों ने अपने परिवार, सुख-सुविधाओं और यहां तक कि जीवन तक का त्याग कर दिया। ऐसे बलिदानों को भुला देना आने वाली पीढ़ियों को उनके वास्तविक प्रेरणास्रोतों से काटने जैसा है।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को व्यापक दृष्टिकोण से समझने का आह्वान करते हुए कहा कि देश के निर्माण में योगदान देने वाले प्रत्येक नायक का सम्मान होना चाहिए।

चौरी चौरा से लेकर काकोरी तक, संघर्ष की अलग-अलग धाराएं

सीएम योगी ने अपने संबोधन में चौरी चौरा की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चौरी चौरा की घटना के बाद कांग्रेस ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था। उनके अनुसार, इस घटना के आरोपियों के मुकदमे में पंडित मदन मोहन मालवीय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनका पक्ष रखा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास केवल कुछ चुनिंदा घटनाओं तक सीमित नहीं था। इसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और विचारधाराओं से जुड़े लोगों ने योगदान दिया। इसलिए इतिहास लिखते समय उन सभी धाराओं को समान महत्व देना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि भारत यूं ही गुलाम नहीं हुआ था। देश की आंतरिक कमजोरियां, आपसी फूट और भारत के खिलाफ रचे गए षड्यंत्र भी गुलामी के लिए जिम्मेदार थे।

इतिहास से सबक: बंटवारा नहीं, एकता ही ताकत

मुख्यमंत्री ने वर्तमान समय का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भी ऐसी ताकतें सक्रिय हैं, जो जाति और क्षेत्र के नाम पर समाज को विभाजित करने का प्रयास करती हैं। उन्होंने कहा कि जब समाज भीतर से कमजोर होता है तो बाहरी ताकतों के लिए उसे प्रभावित करना आसान हो जाता है।

योगी ने सोशल मीडिया को भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत विरोधी ताकतें सोशल मीडिया का इस्तेमाल अफवाहें फैलाने और समाज को गुमराह करने के लिए कर रही हैं।

उन्होंने युवाओं को आगाह करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर जानकारी को सच मान लेना उचित नहीं है। किसी भी सूचना को स्वीकार करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करनी चाहिए। देश की एकता और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाले दुष्प्रचार से सतर्क रहना आज की पीढ़ी की बड़ी जिम्मेदारी है।

क्रांतिकारी नायकों से युवाओं को दूर करना सबसे बड़ा अन्याय

Kakori Train Action : मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की युवा पीढ़ी अपने इतिहास और नायकों से प्रेरणा लेकर भविष्य का निर्माण करती है। यदि युवाओं को उनके वास्तविक नायकों और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष से परिचित ही न कराया जाए, तो यह उनके साथ अन्याय होगा।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने देश के युवाओं को क्रांतिकारी नायकों से दूर रखा, उन्होंने वास्तव में उन्हें उनके आदर्शों से दूर किया। युवाओं को यह जानने का अधिकार है कि देश की आजादी के लिए किन लोगों ने अपना जीवन दांव पर लगाया था।

योगी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अनेक नायकों और वीरांगनाओं को लंबे समय तक इतिहास में वह स्थान नहीं मिला, जिसके वे योग्य थे।

रानी लक्ष्मीबाई से ऊदा देवी तक, वीरांगनाओं को भी मिले सम्मान

मुख्यमंत्री ने रानी लक्ष्मीबाई, वीरांगना ऊदा देवी, झलकारी बाई और अवंतीबाई लोधी जैसी वीरांगनाओं का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन महिलाओं ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ असाधारण साहस का परिचय दिया, लेकिन लंबे समय तक उनके योगदान को पर्याप्त पहचान नहीं मिली।

उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के सम्मान और उनके नाम पर स्मारक व भवन बनाने तक में अड़चनें पैदा की गईं। मुख्यमंत्री के अनुसार, देश का इतिहास उन सभी वीरों और वीरांगनाओं का है, जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया।

2014 के बाद बदली सम्मान की तस्वीर : योगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को सम्मान देने की दिशा में वर्ष 2014 के बाद नई पहल देखने को मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के शहीदों, क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों को सम्मान देने पर जोर दिया गया।

उन्होंने कहा कि काकोरी की घटना को ‘काकोरी डकैती’ के बजाय ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ के रूप में स्थापित करना भी इसी दिशा में एक प्रयास है। उनके अनुसार, नाम में बदलाव केवल शब्दों का परिवर्तन नहीं, बल्कि इतिहास को देखने के दृष्टिकोण में बदलाव का प्रतीक है।

‘एक परिवार’ से आगे बढ़कर पूरे राष्ट्र के नायकों का सम्मान

Kakori Train Action : योगी आदित्यनाथ ने नामकरण की राजनीति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक देश में महत्वपूर्ण संस्थानों, स्थानों और योजनाओं के नामकरण को एक परिवार तक सीमित रखने की प्रवृत्ति रही। उन्होंने कहा कि अब उन सभी राष्ट्रीय नायकों को सम्मान दिया जाना चाहिए, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता और राष्ट्र निर्माण में अपना सर्वस्व अर्पित किया।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, किसी राष्ट्र का इतिहास केवल सत्ता में बैठे लोगों से नहीं बनता, बल्कि उन असंख्य लोगों से बनता है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में देश के लिए संघर्ष किया।

काकोरी का संदेश: साहस, राष्ट्रभक्ति और बलिदान

मुख्यमंत्री ने कहा कि काकोरी ट्रेन एक्शन को केवल अतीत की एक घटना मानकर छोड़ देना उचित नहीं होगा। यह आज भी युवाओं को साहस, राष्ट्रभक्ति, संगठन और बलिदान की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि शताब्दी समारोह जैसे आयोजन नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के वास्तविक नायकों से जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं। जरूरत इस बात की है कि इतिहास को केवल किताबों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि युवाओं को उन संघर्षों और बलिदानों की जीवंत अनुभूति कराई जाए, जिनकी बदौलत भारत स्वतंत्र हुआ।

काकोरी की घटना इसलिए महज इतिहास का एक पन्ना नहीं, बल्कि उस दौर की क्रांतिकारी चेतना की गूंज है—एक ऐसी गूंज, जिसने अंग्रेजी हुकूमत को यह संदेश दिया था कि भारत की धरती पर आजादी की चाह अब दबाई नहीं जा सकती।

jahanvi singh
Author: jahanvi singh

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