रांची, 9 अगस्त। JPSC-JSSC Protest : झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब और गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन आंदोलन और अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की रविवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ गई। उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर आंदोलन स्थल पर मौजूद छात्रों और समर्थकों के बीच चिंता का माहौल है। मौके पर मेडिकल टीम लगातार उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए है।
देवेंद्र महतो पिछले कई दिनों से छात्रों की मांगों को लेकर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने 25 जुलाई से अनिश्चितकालीन दिवा-रात्रि सत्याग्रह शुरू किया था, जबकि 2 अगस्त से उन्होंने आंदोलन स्थल पर अनशन भी शुरू कर दिया। लगातार उपवास और आंदोलन के कारण उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ने लगा है। इसके बावजूद उन्होंने छात्रों के अधिकारों और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग से पीछे हटने से इनकार किया है।
“शरीर थक सकता है, लेकिन संकल्प नहीं”
अनशन के दौरान स्वास्थ्य कमजोर होने के बावजूद देवेंद्र महतो ने आंदोलन जारी रखने की बात कही है। उनका कहना है कि लंबे संघर्ष और लगातार थकान के कारण शरीर पर असर पड़ रहा है, लेकिन छात्रों के भविष्य और न्याय की लड़ाई को बीच में नहीं छोड़ा जा सकता।
उन्होंने कहा, “शरीर थक सकता है, लेकिन न्याय के लिए हमारा संकल्प नहीं।”
देवेंद्र के इस बयान ने आंदोलन में शामिल छात्रों के बीच जोश बनाए रखने का काम किया है। हालांकि, रविवार को उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद आंदोलन स्थल पर मौजूद छात्रों की चिंता बढ़ गई। समर्थकों का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा करना है।
जेएलकेएम विधायक जयराम महतो भी उतरे समर्थन में
छात्र आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के विधायक जयराम महतो ने आंदोलनकारियों के समर्थन में रविवार सुबह से एक दिन का निर्जला उपवास शुरू किया है।
जयराम महतो ने देवेंद्र महतो की बिगड़ती तबीयत पर चिंता जताते हुए सरकार से छात्रों की मांगों पर तत्काल विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और सरकार को इस मुद्दे पर ठोस पहल करनी चाहिए।
जयराम महतो के निर्जला उपवास को आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। इससे आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी व्यापक समर्थन मिलने की संभावना बढ़ी है।
2 जुलाई से शुरू हुआ था विरोध, अब सड़क पर संघर्ष
जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का मौजूदा आंदोलन 2 जुलाई से शुरू हुआ था। इसकी शुरुआत 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम में कथित गड़बड़ी के विरोध से हुई।
छात्रों ने परीक्षा परिणाम और पूरी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। इसके बाद 5 जुलाई से छात्रों ने लगातार प्रदर्शन शुरू कर दिया। समय बीतने के साथ आंदोलन का दायरा बढ़ता गया और छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर अधिक आक्रामक रुख अपनाया।
आंदोलन ने 25 जुलाई से अनिश्चितकालीन दिवा-रात्रि सत्याग्रह का रूप ले लिया। छात्र दिन-रात आंदोलन स्थल पर डटे हुए हैं। रविवार को सत्याग्रह का 16वां दिन है। इसी दौरान देवेंद्र महतो ने 2 अगस्त से अनशन शुरू किया, जिसके बाद आंदोलन का स्वरूप और अधिक गंभीर हो गया।
परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनी मुख्य मांग
आंदोलन कर रहे छात्र मुख्य रूप से जेपीएससी और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं।
छात्र नेताओं का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर कई सवाल उठे हैं। उनका कहना है कि ऐसी शिकायतों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों के बीच भरोसा कायम हो सके।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया की समीक्षा, कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच और परीक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार शामिल हैं। छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य जुड़ा होता है। ऐसे में पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और भरोसेमंद होनी चाहिए।
छात्रों का सवाल: भविष्य से जुड़ी परीक्षा में संदेह क्यों?
आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अभ्यर्थी वर्षों तक मेहनत करते हैं। आर्थिक, मानसिक और सामाजिक स्तर पर बड़ी चुनौतियों का सामना करने के बाद वे परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा परिणाम या भर्ती प्रक्रिया को लेकर किसी तरह का संदेह पैदा होता है, तो इसका सीधा असर अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ता है।
छात्र नेताओं का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल किसी एक परीक्षा या परिणाम तक सीमित नहीं है। वे ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जिसमें प्रत्येक अभ्यर्थी को यह भरोसा हो कि परीक्षा निष्पक्ष तरीके से आयोजित होगी और परिणाम भी पारदर्शी प्रक्रिया के आधार पर जारी किया जाएगा।
इसी वजह से आंदोलनकारी छात्र कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच और भविष्य में परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

अनशन से बढ़ा दबाव, सरकार के रुख का इंतजार
देवेंद्र महतो की तबीयत बिगड़ने के बाद अब आंदोलन पर सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर भी नजरें टिक गई हैं। एक ओर जहां आंदोलनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं, वहीं दूसरी ओर अनशन के कारण आंदोलन के प्रमुख चेहरे की स्वास्थ्य स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है।
आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि केवल आश्वासन से बात नहीं बनेगी। उनका कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
छात्रों के बीच यह भावना भी दिखाई दे रही है कि लंबे आंदोलन के बावजूद यदि उनकी मांगों पर निर्णायक पहल नहीं होती है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज हो सकता है।
स्वास्थ्य संकट के बीच भी आंदोलन जारी रखने का ऐलान
देवेंद्र महतो की तबीयत बिगड़ने से आंदोलन स्थल पर चिंता जरूर बढ़ी है, लेकिन आंदोलनकारी पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। छात्रों का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां गंभीर हैं, फिर भी उनके आंदोलन का मूल मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ है।
आंदोलन स्थल पर मौजूद छात्रों और समर्थकों का कहना है कि वे अपने नेता के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं, लेकिन साथ ही परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग को लेकर उनका संघर्ष जारी रहेगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठ रहे सवालों को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। अब देखना होगा कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और क्या बातचीत के जरिए इस लंबे आंदोलन का समाधान निकाला जा सकेगा।
फिलहाल, जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का सत्याग्रह जारी है, देवेंद्र महतो की सेहत पर मेडिकल टीम नजर बनाए हुए है और आंदोलनकारी सरकार से ठोस निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।







