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JPSC Exam Scam : जेपीएससी परीक्षा घोटाले में बड़ा एक्शन: पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते गिरफ्तार, दो करोड़ की रिश्वत के आरोप से मचा हड़कंप

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JPSC Exam Scam: Ex-Chairman L Khiyangte Arrested

रांची, 10 अगस्त। JPSC Exam Scam :  झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी और मेधा घोटाले की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई की है। सीआईडी ने जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसी के मुताबिक, परीक्षा आयोजित कराने के लिए एक ऐसी आउटसोर्सिंग एजेंसी को काम देने में कथित अनियमितता सामने आई है, जिसे पहले ही ब्लैकलिस्ट और डी-लिस्ट किया जा चुका था।

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, परीक्षा आयोजन की पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में आती जा रही है। सीआईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर किन परिस्थितियों में संबंधित एजेंसी को ठेका दिया गया और इस फैसले के पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे।

ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को मिला परीक्षा का जिम्मा

सीआईडी की जांच का प्रमुख केंद्र टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) है। आरोप है कि परीक्षा आयोजित कराने के लिए इस एजेंसी को निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना काम सौंपा गया।

जांच में सामने आया है कि एजेंसी को खुली निविदा यानी टेंडर प्रक्रिया के जरिए काम देने के बजाय नामांकन के आधार पर परीक्षा से जुड़ा ठेका दिया गया। खास बात यह है कि एजेंसी के खिलाफ पहले से ही कार्रवाई हो चुकी थी।

जांच एजेंसी के अनुसार, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने 20 मई 2025 को टीडीपीएल को ब्लैकलिस्ट और डी-लिस्ट किया था। इसके बावजूद जेपीएससी की परीक्षा प्रक्रिया में उसे जिम्मेदारी दिए जाने पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

यही बिंदु अब पूरे मामले की जांच में अहम कड़ी बन गया है।

दो करोड़ की कथित रिश्वत और 20 फीसदी कमीशन का आरोप

मामले में गिरफ्तार किए गए टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी से पूछताछ के दौरान कथित तौर पर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। सीआईडी के अनुसार, पूछताछ में तिवारी ने आरोप लगाया कि टीडीपीएल को काम दिलाने के एवज में तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते को करीब दो करोड़ रुपये की कथित रिश्वत दी गई।

इसके साथ ही उन पर कुल सौदे का 20 प्रतिशत कमीशन लेने का भी आरोप लगाया गया है।

हालांकि, ये आरोप जांच का हिस्सा हैं और इनकी अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर होगी। सीआईडी फिलहाल कथित लेन-देन, परीक्षा ठेके की प्रक्रिया और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

आपत्ति के बावजूद आगे बढ़ी ठेका प्रक्रिया

JPSC Exam Scam :  जांच में सामने आई एक और महत्वपूर्ण जानकारी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। बताया जा रहा है कि टीडीपीएल को काम दिए जाने को लेकर उस समय के परीक्षा नियंत्रक ने लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी।

परीक्षा नियंत्रक ने आयोग के शीर्ष अधिकारियों को एजेंसी के रिकॉर्ड और उसकी स्थिति की जानकारी दी थी। इसके बावजूद कथित तौर पर एजेंसी को परीक्षा से जुड़ा काम सौंप दिया गया।

यही वह बिंदु है जिसे सीआईडी अब फैसले की प्रक्रिया और अधिकारियों की भूमिका से जोड़कर देख रही है। जांच एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि जब एजेंसी के खिलाफ पहले से कार्रवाई की जानकारी मौजूद थी, तब उसे परीक्षा जैसे संवेदनशील काम की जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई।

खियांग्ते का बचाव: ‘आधिकारिक जानकारी नहीं थी’

पूछताछ के दौरान एल. खियांग्ते ने अपने ऊपर लगे आरोपों का बचाव करते हुए कथित तौर पर कहा था कि एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किए जाने की आधिकारिक जानकारी चयन के समय आयोग के पास नहीं थी।

उन्होंने इसे प्रशासनिक स्तर की चूक बताया था। हालांकि, सीआईडी ने इस स्पष्टीकरण के बावजूद उनकी भूमिका की जांच जारी रखी और पूछताछ के कई दौर किए।

सीआईडी के मुताबिक, गिरफ्तारी से पहले खियांग्ते से चार अलग-अलग दौर में 30 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की जा चुकी थी। पूछताछ के दौरान परीक्षा ठेके की प्रक्रिया, अधिकारियों के बीच हुए संवाद और एजेंसी से जुड़े कथित लेन-देन को लेकर सवाल किए गए।

सरकारी आवास से जेपीएससी दफ्तर तक छापेमारी

मामले की जांच के दौरान सीआईडी ने एल. खियांग्ते के कांके रोड स्थित सरकारी आवास के अलावा जेपीएससी कार्यालय में भी छापेमारी की थी।

छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए। माना जा रहा है कि इन दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के जरिए परीक्षा से संबंधित निर्णयों की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

जांच का फोकस सिर्फ कागजी रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। एजेंसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य डिजिटल सामग्री की भी जांच कर रही है, ताकि कथित तौर पर अधिकारियों, एजेंसी और अन्य संबंधित लोगों के बीच हुए संपर्क और लेन-देन की जानकारी सामने आ सके।

अब तक 19 गिरफ्तारियां, कई नाम जांच के घेरे में

JPSC Exam Scam :  जेपीएससी परीक्षा गड़बड़ी मामले में सीआईडी की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसी अब तक 19 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

गिरफ्तार आरोपियों में जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी और पूर्व अध्यक्ष के कंप्यूटर ऑपरेटर समेत कई अन्य लोग शामिल हैं।

इन गिरफ्तारियों से साफ है कि जांच एजेंसी कथित अनियमितताओं को केवल एक व्यक्ति या एक संस्था तक सीमित मानकर नहीं चल रही है। परीक्षा आयोजन से जुड़े विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों, कर्मचारियों और निजी एजेंसी के लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

रांची से लखनऊ तक सीआईडी की कार्रवाई

JPSC Exam Scam :  मामले में सीआईडी ने टीडीपीएल के रांची और लखनऊ स्थित कार्यालयों को भी सील किया है। इससे जांच का दायरा और व्यापक होने के संकेत मिल रहे हैं।

जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी किस स्तर पर शुरू हुई और क्या इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क या समानांतर सिंडिकेट काम कर रहा था।

सीआईडी की जांच का अगला बड़ा सवाल यही है कि इस कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों से उन्हें किस तरह लाभ मिला।

सिर्फ परीक्षा नहीं, पूरी व्यवस्था पर सवाल

जेपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षा हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ी होती है। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कथित अनियमितता केवल प्रशासनिक मामला नहीं रह जाती, बल्कि इससे अभ्यर्थियों के भरोसे और पूरी चयन व्यवस्था की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है।

वर्तमान घटनाक्रम ने परीक्षा के संचालन, आउटसोर्सिंग एजेंसियों के चयन और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब निगाहें सीआईडी की आगे की जांच पर हैं। एजेंसी यह स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है कि कथित रिश्वतखोरी, ठेका प्रक्रिया में अनियमितता और परीक्षा में सामने आई गड़बड़ियों के बीच क्या सीधा संबंध है। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम में अभी और कौन-कौन से नाम सामने आ सकते हैं।

एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी के बाद जेपीएससी परीक्षा घोटाले की जांच एक नए और अहम मोड़ पर पहुंच गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या जांच की अगली कड़ी में कथित सिंडिकेट से जुड़े और बड़े नाम सामने आएंगे?

jahanvi singh
Author: jahanvi singh

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