नई दिल्ली, 10 अगस्त। Student Protests : संसद के मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध के बीच केंद्र सरकार ने छात्र आंदोलनों और उनसे जुड़े मुद्दों पर सदन में व्यापक चर्चा की पेशकश की है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्रों से जुड़े आंदोलनों और उनसे संबंधित सभी पहलुओं पर चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने विपक्षी दलों से अपील की कि चर्चा के दौरान सदन में किसी प्रकार का व्यवधान न डाला जाए और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पक्ष शांतिपूर्वक सुना जाए।
रिजिजू ने पत्रकारों से बातचीत में सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि छात्र आंदोलनों से जुड़े मुद्दों पर सरकार किसी भी सवाल से पीछे नहीं हट रही है। उनका कहना था कि यदि विपक्ष चर्चा चाहता है तो सरकार पूरी तैयारी के साथ सदन में जवाब देने को तैयार है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने दी जाए।
“चर्चा चाहिए तो सदन को चलने भी देना होगा”
केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष से आग्रह किया कि छात्र आंदोलनों पर चर्चा शुरू होने के बाद सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष को सरकार का पक्ष भी उसी गंभीरता से सुनना चाहिए, जिस तरह वह अपने मुद्दे सदन के सामने रखना चाहता है।
रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्रों के विरोध-प्रदर्शन और उनसे जुड़ी गतिविधियों के हर पहलू पर बात करने के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि चर्चा के दौरान नारेबाजी या अन्य व्यवधान के कारण महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार का जवाब जनता तक पहुंचने से न रुके।
उन्होंने विशेष रूप से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान को शांतिपूर्वक सुनने की अपील की। रिजिजू के मुताबिक, सरकार चाहती है कि सदन में बहस हो, सवाल पूछे जाएं और उनका जवाब भी दिया जाए, लेकिन इसके लिए संसदीय मर्यादा और कार्यवाही का सम्मान जरूरी है।
राम मंदिर मुद्दे पर रिजिजू ने साधी सावधानी
Student Protests : विपक्ष की ओर से विभिन्न मुद्दे उठाए जाने के बीच रिजिजू ने राम मंदिर से जुड़े विषय पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस मामले में एसआईटी के गठन सहित उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कई कदम उठाए जा चुके हैं। इसलिए उन्होंने इस विषय पर फिलहाल ज्यादा टिप्पणी करने से परहेज किया।
उन्होंने दोहराया कि सरकार का तत्काल रुख छात्र आंदोलनों से जुड़े विषयों पर चर्चा को लेकर स्पष्ट है। सरकार चाहती है कि सदन में इस मुद्दे के सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हो।
रामदास अठावले बोले—महत्वपूर्ण विधेयकों पर हो बहस
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने भी संसद में जारी हंगामे को समाप्त कर महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा शुरू करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मौजूदा मानसून सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक पेश किए जाने की संभावना उन्हें कम नजर आती है।
हालांकि, अठावले ने परिसीमन को जरूरी विषय बताते हुए कहा कि इस पर व्यापक सहमति बननी चाहिए और इसे राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि संसद का काम केवल विरोध और नारेबाजी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि राष्ट्रीय महत्व के विषयों और महत्वपूर्ण विधेयकों पर सार्थक बहस होनी चाहिए।
राहुल गांधी के सवालों पर अठावले का पलटवार
राहुल गांधी की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए अठावले ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में भी कई मौकों पर गोलीबारी और लाठीचार्ज जैसी घटनाएं हुई थीं। उन्होंने कहा कि यदि राहुल गांधी किसी मुद्दे पर सरकार से सवाल करना चाहते हैं तो उन्हें संसद में चर्चा करनी चाहिए।
अठावले ने कहा कि सरकार सवालों से बच नहीं रही है और सदन में उठाए गए सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, संसद लोकतांत्रिक बहस का मंच है और इसका उपयोग राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय मुद्दों पर चर्चा के लिए किया जाना चाहिए।
गिरिराज सिंह का राहुल गांधी पर हमला
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी की संसद में भूमिका को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लोकसभा अध्यक्ष नहीं हैं और विपक्ष को संसद की कार्यवाही बाधित करने के बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेना चाहिए।
गिरिराज सिंह ने विपक्ष पर चुनिंदा मुद्दों को लेकर विरोध करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश की जनता संसद में होने वाली हर गतिविधि को देख रही है और वह यह तय कर सकती है कि कौन चर्चा के पक्ष में है और कौन सदन की कार्यवाही में बाधा डाल रहा है।
प्रधानमंत्री को लेकर राहुल गांधी की आलोचना पर भी गिरिराज सिंह ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को अपने लेख, विचार या नीतियों के लिए राहुल गांधी के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री लगातार युवाओं से संवाद करते हैं और हाल में आईआईटी दिल्ली में भी युवाओं के साथ संवाद किया गया।
झारखंड में छात्र आंदोलन पर भी सियासी घमासान
Student Protests : छात्र आंदोलनों का मुद्दा झारखंड तक भी पहुंच गया है। केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर ने झारखंड में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर कहा कि सरकार ने छात्रों की कई मांगें स्वीकार कर ली हैं। हालांकि, सीबीआई जांच की मांग को लेकर छात्रों का विरोध अभी भी जारी है।
उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना छात्रों का मौलिक अधिकार है। सरकार का प्रयास होना चाहिए कि छात्रों की समस्याओं को सुना जाए और उनके समाधान का रास्ता निकाला जाए।
दूसरी ओर, भाजपा सांसद विष्णुदयाल राम ने झारखंड की जेएमएम नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस के रवैये पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शन के मामले में कांग्रेस का रुख दोहरा है।
एफसीआरए विधेयक पर भी आमने-सामने सत्ता पक्ष और विपक्ष
संसद में एफसीआरए विधेयक को लेकर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज रहे। भाजपा सांसदों ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उसे विधेयकों, विकास और संसदीय परंपराओं की चिंता नहीं है। उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और टीएमसी पर सदन में नारेबाजी को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।
भाजपा सांसद सुजीत कुमार ने अमेरिकी कांग्रेस सदस्य राइली मूर के एफसीआरए विधेयक से जुड़े कथित भ्रामक बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पत्र लिखकर विधेयक की धाराओं और उससे जुड़े तथ्यों की जानकारी देने का प्रयास किया है, ताकि मामले को सही संदर्भ में समझा जा सके।
मनोज तिवारी का राहुल गांधी पर निशाना
Student Protests : भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। सत्ता पक्ष के अन्य नेताओं की तरह उन्होंने भी विपक्ष से सदन की कार्यवाही में सहयोग करने की अपील की।
वहीं भाजपा सांसद दामोदर अग्रवाल ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री सभी दलों को विश्वास में लेकर महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में पेश कराने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार की प्राथमिकता संसद को सुचारू रूप से चलाना और लंबित विषयों पर चर्चा कराना है।
संसद के भीतर अब टकराव या संवाद—निर्णय विपक्ष के रुख पर?
मानसून सत्र में जिस तरह से छात्र आंदोलन, एफसीआरए विधेयक, परिसीमन, महिला आरक्षण और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में संसद का माहौल काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है।
सरकार की ओर से फिलहाल यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि वह छात्र आंदोलनों समेत कई मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। दूसरी तरफ विपक्ष अपनी मांगों और सवालों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए हुए है।
ऐसे में संसद की अगली कार्यवाही इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष हंगामे के रास्ते पर आगे बढ़ते हैं या चर्चा और संवाद का रास्ता अपनाते हैं। सरकार ने गेंद विपक्ष के पाले में डालते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह बहस के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए सदन की कार्यवाही में व्यवधान नहीं होना चाहिए। अब निगाहें इस बात पर हैं कि विपक्ष इस प्रस्ताव पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है और क्या संसद में लंबे समय से जारी गतिरोध को बातचीत के जरिए तोड़ने की कोई राह निकलती है।






