अवनीश सिंह, गाजीपुर/उत्तर प्रदेश। Teacher Adjustment Row : जिला बेसिक शिक्षा विभाग, गाजीपुर में शिक्षकों के समायोजन को लेकर गंभीर अनियमितताओं और मनमानी के आरोप सामने आए हैं। विभाग पर आरोप है कि समायोजन की प्रक्रिया के नाम पर शिक्षकों का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है और नियमों को ताक पर रखकर उन्हें एक विद्यालय से दूसरे विद्यालय में आनन-फानन में स्थानांतरित किया जा रहा है।
Teacher Adjustment Row : नहीं दी जा रही सूचना
शिक्षकों का कहना है कि समायोजन से पहले उन्हें किसी प्रकार की कोई सूचना नहीं दी जा रही। कई मामलों में तो शिक्षकों को तब जानकारी मिल रही है, जब उनका समायोजन आदेश जारी हो चुका होता है। जबकि नियमानुसार विभाग को पहले उन विद्यालयों की सूची जारी करनी चाहिए, जहां शिक्षकों की कमी है और साथ ही उन स्कूलों की भी सूची सार्वजनिक करनी चाहिए, जहां शिक्षक सरप्लस हैं।
शिक्षकों में आक्रोश
Teacher Adjustment Row : आरोप है कि इस बार बेसिक शिक्षा विभाग गाजीपुर ने किसी भी तरह की सूची जारी किए बिना सीधे शिक्षकों का समायोजन कर दिया, जिससे शिक्षकों में भारी आक्रोश है। कई शिक्षकों ने बताया कि जिन शिक्षकों से विभागीय अधिकारी और कर्मचारी नाराज थे, उन्हें जानबूझकर सरप्लस दिखाकर दूर-दराज के इलाकों में भेज दिया गया।
कुछ शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि अचानक किए गए समायोजन के पीछे ‘अवैध वसूली’ की मंशा भी हो सकती है। विभागीय रवैये से शिक्षक खुद को मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि कोई शिक्षक इस मनमानी के खिलाफ आवाज उठाता है तो उसे निलंबन या वेतन रोकने की धमकी दी जाती है, जिससे मजबूर होकर वह विभाग के आदेशों को स्वीकार करने पर विवश हो जाता है।
समायोजन से पहले पूरी प्रक्रिया अपनाई जाए
Teacher Adjustment Row : शिक्षकों का कहना है कि नियमावली के अनुसार समायोजन से पहले पूरी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, लेकिन न तो सरप्लस विद्यालयों की सूची जारी की गई और न ही शिक्षकों की कमी वाले विद्यालयों की जानकारी दी गई। बिना किसी औपचारिकता के सीधे आदेश जारी कर देना विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सौंपा ज्ञापन
Teacher Adjustment Row : इस मामले को लेकर शिक्षकों ने शुक्रवार को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी उपासना रानी वर्मा को ज्ञापन भी सौंपा, लेकिन शिक्षकों का आरोप है कि उन्हें वहां से भी स्पष्ट जवाब नहीं मिला और केवल गोलमोल बातें कर मामला टाल दिया गया।
जब इस पूरे मामले पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी उपासना रानी वर्मा से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना भी जरूरी नहीं समझा। इससे शिक्षकों का रोष और बढ़ गया है और वे अब उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग करने की तैयारी में हैं।







