छत्रपति संभाजीनगर, 3 अगस्त। Student Support : कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने शिक्षा व्यवस्था, छात्र आंदोलनों, लोकतंत्र, विपक्ष की भूमिका और अपनी संगठनात्मक रणनीति को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संगठन किसी राजनीतिक दल को निशाना बनाने के उद्देश्य से नहीं बना है, बल्कि उसका संघर्ष व्यवस्था की उन कमियों के खिलाफ है, जो आम नागरिकों और विशेष रूप से छात्रों को प्रभावित करती हैं।
दिपके ने कहा कि शिक्षा से जुड़ा कोई भी मुद्दा सामने आएगा तो उनका संगठन छात्रों के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उसे सुना जाना चाहिए और यदि कहीं भी शिक्षा व्यवस्था में खामियां दिखाई देती हैं तो उनका संगठन लोकतांत्रिक तरीके से उन मुद्दों को उठाने का काम करेगा।
देशभर की शिक्षा व्यवस्था चुनौतियों से घिरी
शिक्षा व्यवस्था पर अपनी राय रखते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि यह केवल किसी एक राज्य की समस्या नहीं है, बल्कि लगभग पूरे देश में शिक्षा से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में छात्र भविष्य को लेकर चिंतित और निराश हैं। ऐसे में सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनें और समयबद्ध समाधान निकालें।
उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं बल्कि देश के भविष्य की नींव है। यदि शिक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं होगी तो आने वाली पीढ़ियों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। इसलिए छात्र हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
‘छात्रों की आवाज को अनदेखा करना लोकतंत्र के हित में नहीं’
लोकतंत्र की कार्यप्रणाली पर अपनी राय रखते हुए दिपके ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आवाज सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि जब नागरिक, विशेष रूप से छात्र, किसी मुद्दे को लेकर बड़ी संख्या में अपनी चिंता व्यक्त करते हैं तो सरकार का दायित्व बनता है कि वह उनकी बात सुने और आवश्यक कार्रवाई करे।
उन्होंने कहा कि यदि बड़ी संख्या में छात्र किसी मंत्री को हटाने या किसी नीति में बदलाव की मांग कर रहे हैं तो सरकार को उस मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह उनका व्यक्तिगत राजनीतिक मत है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत ही हर निर्णय लिया जाना चाहिए।
विपक्ष की कमजोरी पर उठाए सवाल
Student Support : देश की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए अभिजीत दिपके ने विपक्षी दलों की कमजोर होती स्थिति पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों के खिलाफ किया गया, जिससे विपक्ष की ताकत प्रभावित हुई।
उन्होंने उदाहरण के तौर पर महाराष्ट्र की राजनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के दो प्रमुख विपक्षी दल—शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी)—दोनों में विभाजन हुआ। उनके अनुसार, ऐसी राजनीतिक घटनाओं ने विपक्ष की प्रभावशीलता को कमजोर किया और लोकतांत्रिक संतुलन पर भी असर पड़ा।
‘किसी भी सरकार के खिलाफ उठाएंगे आवाज’
दिपके ने साफ शब्दों में कहा कि उनका संगठन किसी विशेष राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध के लिए नहीं बना है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी सरकार के कार्यकाल में छात्रों को समस्याओं का सामना करना पड़ेगा तो उनका संगठन सत्ता में बैठे दल के खिलाफ भी आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री या शिक्षा मंत्री किसी भी पार्टी से हों, उनकी पहली जिम्मेदारी छात्रों के हितों की रक्षा करना है। यदि ऐसा नहीं होता तो लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया जाएगा।
तुलना नहीं, अपनी अलग पहचान चाहते हैं दिपके
Student Support : बातचीत के दौरान अभिजीत दिपके ने अपनी सार्वजनिक छवि पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी सामाजिक या ऐतिहासिक नेता से तुलना किया जाना पसंद नहीं है। उन्होंने अनुरोध किया कि उन्हें “अन्ना” या “गांधी” जैसे संबोधनों से न पुकारा जाए।
उनका कहना था कि हर व्यक्ति की अपनी अलग पहचान होती है और वे चाहते हैं कि लोग उन्हें उसी पहचान के साथ स्वीकार करें, जिसे उन्होंने अपने कार्यों और विचारों के आधार पर बनाया है।
कांग्रेस से मिला समर्थन, भाजपा से भी किया संवाद का प्रयास
राजनीतिक दलों के साथ अपने संबंधों को लेकर दिपके ने कहा कि हाल के दिनों में स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उन्होंने किसी से ज्यादा बातचीत नहीं की। हालांकि उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा उनसे मिलने आए थे और उन्होंने राहुल गांधी की ओर से समर्थन का संदेश भी दिया था।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के कई सांसदों ने उनके आंदोलन का समर्थन किया। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से भी समर्थन की अपील की थी। उनका उद्देश्य विभिन्न राजनीतिक दलों से संवाद बनाए रखना और लोकतांत्रिक सहयोग की संभावनाओं को खुला रखना है।
फिलहाल चुनाव नहीं, जनदबाव समूह बनाने पर जोर
नई राजनीतिक पार्टी और चुनावी राजनीति के भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर अभिजीत दिपके ने कहा कि वर्तमान समय में देश को चुनाव लड़ने वाली एक और पार्टी से अधिक एक प्रभावी “पब्लिक प्रेशर ग्रुप” की आवश्यकता है।
उन्होंने आपातकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल चुनाव लड़ना हर समस्या का समाधान नहीं होता। कई बार लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए व्यापक जनआंदोलन और सामाजिक दबाव अधिक प्रभावी साबित होते हैं। इसी सोच के साथ उनका वर्तमान फोकस जनभागीदारी और जनदबाव के माध्यम से बदलाव लाने पर है।
संवाद भी करेंगे, जरूरत पड़ी तो आंदोलन भी
Student Support : आंदोलन की रणनीति पर दिपके ने कहा कि जहां बातचीत के जरिए समाधान निकल सकता है, वहां सरकार और विपक्ष दोनों के साथ संवाद किया जाएगा। लेकिन यदि बातचीत से कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकलता तो लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन और जनआंदोलन भी किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि उनका संगठन संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के दायरे में रहकर ही अपने सभी कार्यक्रम संचालित करेगा।
आंदोलन में असामाजिक तत्वों की मौजूदगी के आरोपों पर सवाल
अपने आंदोलन के दौरान असामाजिक तत्वों की मौजूदगी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए दिपके ने कहा कि उन्होंने पहले ही आशंका जताई थी कि आंदोलन को बदनाम करने के लिए बाहरी लोगों को भेजा जा सकता है।
उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के शुरुआती एक महीने तक ऐसी कोई घटना सामने नहीं आई। साथ ही उन्होंने दिल्ली पुलिस के उस दावे पर भी सवाल उठाया जिसमें आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में अपराधियों की मौजूदगी की बात कही गई थी।
दिपके ने पूछा कि यदि वास्तव में इतने अपराधी वहां मौजूद थे तो उन्हें वहां रहने की अनुमति किसने दी और सुरक्षा व्यवस्था में ऐसी चूक कैसे हुई। उनके अनुसार, इन सवालों के जवाब भी सामने आने चाहिए।
कानूनी प्रक्रिया समय पर पूरी होनी चाहिए
कानूनी मामलों पर अपनी राय रखते हुए उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का पूरा अवसर मिलना चाहिए। यदि पर्याप्त सबूत हैं तो कानून के अनुसार मुकदमा चलना चाहिए, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि न्याय तभी प्रभावी माना जाएगा जब वह समय पर मिले और सभी पक्षों को निष्पक्ष अवसर प्राप्त हो।
300 से अधिक स्वयंसेवकों के साथ संगठन को मिलेगा नया स्वरूप
Student Support : अपने संगठन के भविष्य की योजना साझा करते हुए अभिजीत दिपके ने बताया कि आंदोलन की शुरुआत केवल 10 से 20 लोगों के छोटे समूह से हुई थी, लेकिन अब उनके साथ 300 से अधिक स्वयंसेवक जुड़ चुके हैं।
उन्होंने कहा कि आगे बढ़ने से पहले वे सभी स्वयंसेवकों से विस्तृत फीडबैक लेंगे। आंदोलन के दौरान क्या अच्छा हुआ, किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है और भविष्य में किन गलतियों से बचना चाहिए, इन सभी बिंदुओं पर सामूहिक चर्चा की जाएगी। इसके बाद संगठन की आगामी रणनीति और संरचना को अंतिम रूप दिया जाएगा।
अमेरिका से लौटने के फैसले के पीछे भावनात्मक अनुभव
विदेश से भारत लौटने के अपने फैसले पर दिपके ने कहा कि जब वे अमेरिका में पढ़ाई कर रहे थे, तब लोग उन्हें एक भारतीय छात्र के रूप में पहचानते थे। उनके प्रोफेसर और मित्र उन्हें भारत का प्रतिनिधि मानते थे, जिससे उन्हें गर्व महसूस होता था।
हालांकि उन्होंने कहा कि अपने ही देश में जब उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताए जाने जैसी बातें सुनने को मिलीं तो यह अनुभव उनके लिए बेहद पीड़ादायक था। उन्होंने स्वीकार किया कि इस घटना ने उन्हें भावनात्मक रूप से प्रभावित किया और इसी वजह से उन्होंने भारत लौटने का निर्णय लिया।
व्यवस्था में बदलाव ही सबसे बड़ा लक्ष्य
बातचीत के अंत में अभिजीत दिपके ने दोहराया कि उनका संघर्ष किसी एक राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं बल्कि व्यवस्था की कमियों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में केंद्र में भाजपा की सरकार होने के कारण उनके आंदोलन का विरोध उसी सरकार की नीतियों के खिलाफ दिखाई देता है। लेकिन यदि भविष्य में कोई दूसरी पार्टी सत्ता में आती है और वही समस्याएं बनी रहती हैं, तो उनका संगठन उसके खिलाफ भी समान रूप से आवाज उठाएगा।
उन्होंने कहा कि उनका अंतिम उद्देश्य राजनीतिक लाभ हासिल करना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार, शिक्षा को मजबूत बनाना और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना है।






