नई दिल्ली, 3 अगस्त। Defense Reforms : देश की सुरक्षा केवल सीमाओं पर तैनात सैनिकों के साहस और आधुनिक हथियारों की बदौलत ही सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि उसके पीछे काम करने वाली उन संस्थाओं और हजारों कर्मियों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है, जो प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देते, लेकिन रक्षा व्यवस्था की रीढ़ बने रहते हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को सशस्त्र सेना मुख्यालय (एएफएचक्यू) सिविलियन सर्विस दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में इसी महत्वपूर्ण पक्ष को रेखांकित करते हुए कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में सेनाओं के साथ-साथ उन्हें सहयोग देने वाली संस्थाओं को भी निरंतर विकसित होना होगा।
उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में प्रौद्योगिकी, उद्योग, शिक्षाजगत और नवाचार का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में यदि सशस्त्र सेनाएं आधुनिकता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं, तो उनके सहयोगी संगठनों को भी नई सोच, नई कार्यशैली और नई क्षमताओं के साथ खुद को तैयार करना होगा।
सिर्फ हथियार नहीं, मजबूत व्यवस्था भी बनाती है सेना को शक्तिशाली
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी सेना की वास्तविक ताकत केवल हथियारों, मिसाइलों या गोला-बारूद से नहीं मापी जाती। उसके पीछे कार्यरत प्रशासनिक व्यवस्था, नीति निर्माण, तकनीकी सहयोग और संस्थागत समर्थन भी उसकी क्षमता को कई गुना बढ़ा देते हैं।
उन्होंने कहा कि हजारों ऐसे कर्मी हैं, जो पर्दे के पीछे रहकर रक्षा तंत्र को सुचारु रूप से संचालित करते हैं। एएफएचक्यू सिविलियन सेवाएं भी ऐसी ही एक महत्वपूर्ण और निर्णायक शक्ति हैं, जिनकी भूमिका देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में अत्यंत अहम है। उन्होंने इन सेवाओं को रक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली का एक मजबूत स्तंभ बताते हुए उनके योगदान की सराहना की।
संयुक्तता और एकीकरण की दिशा में बढ़ रही हैं भारतीय सेनाएं
Defense Reforms : राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सशस्त्र सेनाएं आज संयुक्त संचालन और बेहतर समन्वय की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने और संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जब सेनाओं में संयुक्तता और एकीकरण का दायरा बढ़ रहा है, तब एएफएचक्यू सिविलियन सेवाओं के सामने भी अपनी भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने का बड़ा अवसर मौजूद है। रक्षा व्यवस्था के प्रत्येक हिस्से को एक-दूसरे के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करना होगा, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े निर्णय अधिक तेज, प्रभावी और दूरदर्शी बन सकें।
सैन्य और नागरिक समन्वय को मिलेगा नया आयाम
रक्षा मंत्री ने सैन्य और नागरिक घटकों के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि आने वाले समय में रक्षा तंत्र को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए दोनों पक्षों के बीच संयुक्तता के नए मॉडल विकसित करने होंगे।
उन्होंने कहा कि संस्थागत स्मृति, प्रशासनिक स्थिरता और नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन में एएफएचक्यू सिविलियन सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह संवर्ग न केवल रक्षा मंत्रालय को निरंतरता प्रदान करता है, बल्कि विषयगत विशेषज्ञता और नीतिगत स्थिरता बनाए रखने में भी अहम योगदान देता है। इसी कारण नागरिक और सैन्य तंत्र के बीच यह एक मजबूत सेतु के रूप में कार्य करता है।
रक्षा मंत्रालय की संस्थागत स्मृति हैं एएफएचक्यू सेवाएं
राजनाथ सिंह ने कहा कि एएफएचक्यू सिविलियन सेवाओं को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए। उनके पास वर्षों का अनुभव, गहन विषयगत ज्ञान और नीतिगत समझ मौजूद है, जो रक्षा मंत्रालय के लिए एक अमूल्य संपत्ति है।
उन्होंने इन सेवाओं को रक्षा मंत्रालय की “संस्थागत स्मृति” बताते हुए कहा कि बदलती परिस्थितियों में भी यही संवर्ग मंत्रालय की कार्यप्रणाली को निरंतरता देता है। नीतियों के निर्माण, उनके प्रभावी क्रियान्वयन और रक्षा प्रशासन की स्थिरता बनाए रखने में इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
नई तकनीक और शोध में भी निभानी होगी सक्रिय भूमिका
Defense Reforms : रक्षा मंत्री ने एएफएचक्यू के अधिकारियों और कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे अपनी पारंपरिक जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर रक्षा क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान और रणनीतिक सोच को भी बढ़ावा दें।
उन्होंने कहा कि रक्षा प्रौद्योगिकी, भू-रणनीतिक अध्ययन और नई अवधारणाओं पर सक्रिय भागीदारी समय की मांग है। चूंकि एएफएचक्यू सिविलियन सेवाओं के पास व्यापक अनुभव और विषयगत विशेषज्ञता मौजूद है, इसलिए उन्हें रक्षा नीति और रणनीति से जुड़े मूल विषयों में भी अपनी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।
पुरानी कार्यशैली छोड़कर अपनानी होगी आधुनिक सोच
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने स्पष्ट संदेश दिया कि आज की स्थायी नागरिक रक्षा सेवा केवल पारंपरिक कार्यशैली तक सीमित नहीं रह सकती। बदलती वैश्विक चुनौतियों, नई तकनीकों और आधुनिक युद्ध प्रणाली को देखते हुए इन सेवाओं को भी स्वयं को लगातार अपडेट करना होगा।
उन्होंने कहा कि समय के साथ नई क्षमताएं विकसित करना और आधुनिक प्रशासनिक कौशल अपनाना अत्यंत आवश्यक है। भविष्य की चुनौतियों का सामना वही संस्थाएं कर सकेंगी, जो बदलाव को स्वीकार करते हुए स्वयं को लगातार बेहतर बनाती रहेंगी।
पेशेवर उत्कृष्टता बने नई पहचान
Defense Reforms : रक्षा मंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि एएफएचक्यू सिविलियन सेवाओं की पहचान केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित न रहे, बल्कि उनकी विकसित होती भूमिका, पेशेवर उत्कृष्टता और विशेष योगदान भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को अपने ज्ञान, दक्षता और कार्यकुशलता को निरंतर बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए, ताकि रक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली और अधिक प्रभावी तथा आधुनिक बन सके।
रक्षा प्रबंधन के पेशेवर संवर्ग के रूप में होगा विकास
राजनाथ सिंह ने भविष्य की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि सरकार का प्रयास एएफएचक्यू सिविलियन सेवाओं को धीरे-धीरे रक्षा प्रबंधन के एक पूर्ण पेशेवर संवर्ग के रूप में विकसित करने का होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ऐसा संवर्ग तैयार किया जाए, जो रक्षा क्षेत्र के सभी महत्वपूर्ण आयामों की गहरी समझ रखता हो, संयुक्त सैन्य वातावरण में प्रभावी ढंग से कार्य कर सके और बदलती सुरक्षा चुनौतियों तथा नई प्रौद्योगिकियों के अनुरूप अपनी विशेषज्ञता को लगातार उन्नत करता रहे।
बदलते सुरक्षा परिदृश्य में नई सोच की जरूरत
रक्षा मंत्री ने कहा कि आज वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चुनौतियां तेजी से बदल रही हैं। साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आधुनिक हथियार प्रणालियां और तकनीकी नवाचार रक्षा क्षेत्र का स्वरूप बदल रहे हैं। ऐसे समय में केवल सेनाओं का आधुनिकीकरण पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पूरे रक्षा तंत्र को एक समग्र दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाना होगा।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि सशस्त्र सेनाएं, नागरिक सेवाएं, उद्योग, शिक्षण संस्थान और अनुसंधान संगठन मिलकर कार्य करेंगे, तो भारत का रक्षा तंत्र और अधिक मजबूत, सक्षम तथा आत्मनिर्भर बन सकेगा।
सशक्त रक्षा व्यवस्था की ओर बढ़ता भारत
अपने संबोधन के अंत में रक्षा मंत्री ने दोहराया कि देश की सुरक्षा व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इसके लिए केवल आधुनिक हथियारों की खरीद ही नहीं, बल्कि मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था, बेहतर समन्वय, नवाचार, अनुसंधान और पेशेवर दक्षता भी समान रूप से आवश्यक है।
उन्होंने एएफएचक्यू सिविलियन सेवाओं से अपेक्षा जताई कि वे बदलते समय के अनुरूप स्वयं को निरंतर विकसित करें और भारत के रक्षा तंत्र को अधिक आधुनिक, प्रभावी तथा आत्मनिर्भर बनाने में अपनी सक्रिय और निर्णायक भूमिका निभाएं।






