नई दिल्ली, 21 जुलाई। Student Protest : राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) से जुड़े विवाद ने अब एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले लिया है। 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित विरोध-प्रदर्शन के दौरान जो घटनाएं सामने आईं, उन्होंने न केवल छात्रों बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इसी मुद्दे पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर कड़ा हमला बोलते हुए छात्रों के साथ पुलिस के व्यवहार को “बेहद शर्मनाक” करार दिया है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह कोई राजनीतिक आंदोलन नहीं, बल्कि अपने भविष्य को लेकर चिंतित युवाओं की पुकार है — एक ऐसी पुकार जिसे अनसुना करना देश के भविष्य को खतरे में डालना होगा।
“लाठी नहीं, समाधान चाहिए” — पुलिस कार्रवाई पर सवाल
Student Protest : प्रियंका गांधी ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग की कड़ी निंदा की। उनका कहना था कि जो युवा अपने अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतरे हैं, उनके साथ इस तरह का व्यवहार लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों को दबाने के बजाय उनकी बात सुननी चाहिए। “क्या अपने भविष्य के लिए आवाज उठाना अपराध है?” — यह सवाल आज हर छात्र के मन में है।
राजनीति नहीं, भविष्य की लड़ाई लड़ रहे छात्र
प्रियंका गांधी ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन कर रहे युवा किसी राजनीतिक दल के समर्थन में नहीं, बल्कि अपने भविष्य की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह आंदोलन उन लाखों छात्रों की आवाज है जो वर्षों की मेहनत और त्याग के बाद भी एक निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की उम्मीद में निराश हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि देश का हर नागरिक जानता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना कितना कठिन होता है। दिन-रात की मेहनत, आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव के बीच छात्र अपने सपनों को साकार करने की कोशिश करते हैं।
कर्ज में डूबे परिवार, अधर में लटका भविष्य
प्रियंका गांधी ने उन परिवारों की पीड़ा को भी सामने रखा जो अपने बच्चों की शिक्षा के लिए कर्ज तक लेने को मजबूर हो जाते हैं। कोचिंग संस्थानों की भारी फीस, रहने-खाने का खर्च और वर्षों की तैयारी — यह सब मिलाकर एक परिवार के लिए बहुत बड़ा निवेश होता है।
लेकिन जब परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियां, पेपर लीक और अनियमितताएं सामने आती हैं, तो यह केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि लाखों सपनों का टूटना होता है।
“जिम्मेदारी कौन लेगा?”, इस्तीफे की मांग तेज
छात्रों द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रियंका गांधी ने कहा कि यह मांग पूरी तरह से जायज है। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यवस्था में लगातार विफलताएं सामने आती हैं तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित मंत्रालय को लेनी चाहिए।
उन्होंने पुराने समय का हवाला देते हुए कहा कि पहले मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देते थे, लेकिन अब ऐसी परंपराएं खत्म होती जा रही हैं। “जवाबदेही खत्म हो रही है, और यही सबसे बड़ी चिंता है,” उन्होंने जोड़ा।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की सख्त जरूरत
प्रियंका गांधी ने सरकार से शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग की। उनका कहना था कि केवल बयानबाजी से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस और प्रभावी कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, वरना युवाओं का भरोसा पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।
बार-बार दोहराई जा रही गलतियां
Student Protest : कांग्रेस सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी का यह कोई नया मामला नहीं है। उन्होंने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी कई बार ऐसी घटनाएं हुईं, लेकिन कार्रवाई केवल निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित रही।
“जब तक बड़े जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक यह सिलसिला नहीं रुकेगा,” उन्होंने कहा।
निराशा और आक्रोश में घिरा युवा
प्रियंका गांधी ने कहा कि आज देश का युवा गहरे संकट में है। वह निराश भी है और आक्रोशित भी। उसे यह डर सता रहा है कि उसकी मेहनत का कोई मूल्य नहीं रह गया है।
हर छात्र यह सोचने को मजबूर है कि अगर परीक्षा प्रणाली ही निष्पक्ष नहीं होगी, तो उसके सपनों का क्या होगा? यह केवल छात्रों का नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों का सवाल है जो अपने बच्चों के भविष्य के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।
सरकार की नीतियों पर तीखा हमला
प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार की नीतियों को “युवा-विरोधी, गरीब-विरोधी और किसान-विरोधी” करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करना चाहिए और युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए।
उन्होंने सरकार से अपील की कि वह छात्रों की आवाज सुने, जिम्मेदारी तय करे और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाए।
प्रधानमंत्री से सीधी अपील, छात्रों से मिलिए
Student Protest : अपने बयान के अंत में प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधी अपील की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को खुद आगे आकर छात्रों से मिलना चाहिए और उनकी समस्याओं को सुनना चाहिए।
“देश का भविष्य इन युवाओं के हाथ में है। अगर उनकी आवाज नहीं सुनी गई, तो यह देश के लिए एक बड़ा नुकसान होगा,” उन्होंने चेतावनी दी।
सवाल सिर्फ परीक्षा का नहीं, व्यवस्था का है
नीट विवाद अब केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की शिक्षा व्यवस्था, सरकारी जवाबदेही और युवाओं के भविष्य से जुड़ा एक बड़ा सवाल बन चुका है।
आज जरूरत है संवेदनशीलता की, संवाद की और सुधार की। क्योंकि जब युवा सड़कों पर उतरते हैं, तो वह केवल विरोध नहीं करते — वह एक बेहतर भविष्य की मांग करते हैं।







