नई दिल्ली, 10 सितंबर। IRCTC Money Laundering : आइआरसीटीसी से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी तथा बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत कुल नौ आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है। वहीं, अदालत ने मामले में नामजद सात अन्य आरोपितों को आरोपों से मुक्त करते हुए डिस्चार्ज कर दिया।
इस मामले की अगली सुनवाई अब 3 अक्टूबर को होगी। अदालत के इस आदेश के बाद आइआरसीटीसी होटल टेंडर और कथित जमीन सौदे से जुड़े इस पुराने मामले में न्यायिक प्रक्रिया एक बार फिर महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है।
लालू परिवार समेत इन नौ आरोपितों पर तय हुए आरोप
राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने जिन नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है, उनमें लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी प्रसाद यादव, प्रेम चंद गुप्ता, सरला गुप्ता, विनय कोच्छर, विजय कोच्छर, लारा प्रोजेक्ट एलएलपी और सुजाता होटल्स शामिल हैं।
अदालत के आदेश के अनुसार इन आरोपितों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों को आगे न्यायिक प्रक्रिया में परखा जाएगा। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए तथ्यों और जांच के आधार पर अदालत ने प्रथम दृष्टया आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार माना है।
सात आरोपितों को अदालत से मिली राहत
IRCTC Money Laundering : दूसरी ओर, अदालत ने मामले में शामिल सात आरोपितों को डिस्चार्ज कर दिया है। इनमें गौरव गुप्ता, नाथ मल काकरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलश्यान, राजीव कुमार रेलन और अभिषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
इस तरह अदालत के आदेश के बाद मामले में कुल 16 नामजद आरोपियों में से नौ के खिलाफ मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जबकि सात आरोपितों को फिलहाल इस मामले से बाहर कर दिया गया है।
जांच राजनीतिक दबाव में होने की दलील पर कोर्ट की टिप्पणी
IRCTC Money Laundering : सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की जांच को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत नहीं होता कि लालू प्रसाद यादव के खिलाफ की गई जांच राजनीतिक रूप से प्रभावित थी।
अदालत ने कथित तौर पर लारा प्रोजेक्ट्स को मिले लाभ को भी महत्वपूर्ण माना। कोर्ट की टिप्पणी के अनुसार, लारा प्रोजेक्ट्स को जिस तरीके से कथित लाभ प्राप्त हुआ, उससे लालू प्रसाद यादव की भूमिका को लेकर संदेह पैदा होता है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि मुकदमे की आगे की न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी।
क्या है आइआरसीटीसी होटल टेंडर से जुड़ा मामला?
IRCTC Money Laundering : यह मामला उस अवधि से जुड़ा है जब लालू प्रसाद यादव वर्ष 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अनुसार, इसी दौरान आइआरसीटीसी के रांची और पुरी स्थित दो होटलों के संचालन का ठेका देने की प्रक्रिया में कथित तौर पर अनियमितता की गई।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इन दोनों होटलों के संचालन का ठेका सुजाता होटल्स को कथित रूप से हेरफेर किए गए टेंडर के जरिए दिलाया गया था। आरोपों के मुताबिक, ठेका दिलाने के बदले करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन को कथित तौर पर बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर ऐसी कंपनी को हस्तांतरित किया गया, जिसका संबंध राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव से बताया गया।
सीबीआई ने इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार और कथित आपराधिक साजिश समेत विभिन्न पहलुओं की जांच की थी। बाद में इसी जांच के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अलग से मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया और अपनी जांच शुरू की।
सीबीआइ की एफआइआर के आधार पर ईडी की जांच
IRCTC Money Laundering : मामले की शुरुआत सीबीआई की प्राथमिकी से हुई थी। सीबीआइ ने आइआरसीटीसी के होटल संचालन के टेंडर में कथित अनियमितता और उसके बदले जमीन के कथित हस्तांतरण को जांच का आधार बनाया। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने कथित आपराधिक गतिविधि से जुड़े धन के लेनदेन और संपत्तियों की जांच मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत शुरू की।
ईडी की जांच में कथित तौर पर जमीन और कंपनियों के बीच हुए लेनदेन, संपत्ति के हस्तांतरण तथा उससे जुड़े लाभार्थियों की भूमिका को जांच के दायरे में रखा गया।
पहले भी सीबीआइ मामले में तय हो चुके हैं आरोप
IRCTC Money Laundering : आईआरसीटीसी से जुड़े इस प्रकरण में इससे पहले भी लालू परिवार के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। 13 अक्टूबर 2025 को इसी अदालत ने सीबीआई द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे।
उस मामले में भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए गए थे। अब मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में भी नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जाने के बाद कानूनी प्रक्रिया एक और महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है।
यादव परिवार लगातार बता रहा राजनीतिक साजिश
IRCTC Money Laundering : वहीं, लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार शुरुआत से ही इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश बताता रहा है। यादव परिवार की ओर से लगातार कहा जाता रहा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस और निर्णायक सबूत नहीं है तथा राजनीतिक कारणों से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
हालांकि, अदालत ने मौजूदा चरण में आरोप तय करते हुए जांच को प्रथम दृष्टया राजनीतिक रूप से प्रभावित मानने से इनकार किया है। अब मुकदमे की आगे की सुनवाई में अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों तथा उपलब्ध साक्ष्यों की विस्तृत जांच की जाएगी।
दोनों पक्षों ने अदालत में रखीं दलीलें
सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक डी.पी. सिंह ने पक्ष रखा। वहीं, लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनींदर सिंह सहित अन्य वकीलों ने पैरवी की।
अदालत के ताजा आदेश के बाद अब मामले में अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होगी। उस सुनवाई में आगे की न्यायिक कार्यवाही और मुकदमे की प्रगति पर नजर रहेगी।
अब आगे क्या होगा?
IRCTC Money Laundering : अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने का अर्थ यह है कि न्यायालय ने प्रथम दृष्टया मुकदमा आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार माना है। हालांकि, आरोप तय होना दोष सिद्ध होना नहीं है। लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण मुकदमे के दौरान पेश होने वाले साक्ष्यों, गवाहों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर होगा।
इस मामले में अब अदालत की अगली सुनवाई पर विशेष नजर रहेगी, क्योंकि आईआरसीटीसी होटल टेंडर, कथित जमीन हस्तांतरण और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन के आरोपों की न्यायिक जांच आगे बढ़ेगी।






