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Student Protest : छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में गरमाया माहौल, कांग्रेस ने गृह मंत्री से मांगा जवाब

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नई दिल्ली 21 जुलाई । Student Protest : संसद के मानसून सत्र के दौरान छात्रों के विरोध प्रदर्शन और उन पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया। कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया। पार्टी के सांसदों ने संसद के भीतर इस मामले पर विस्तृत चर्चा की मांग की और कहा कि देश के युवाओं से जुड़े ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राजधानी दिल्ली में छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान जिस प्रकार पुलिस ने बल प्रयोग किया, वह कई गंभीर सवाल खड़े करता है। पार्टी ने गृह मंत्री अमित शाह से लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में उपस्थित होकर पूरे मामले पर विस्तृत बयान देने की मांग की है।

‘संसद ही सबसे बड़ा लोकतांत्रिक मंच’ : शशि थरूर

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि संसद देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है। उनके अनुसार, यदि छात्रों से जुड़े इतने गंभीर घटनाक्रम पर संसद में चर्चा नहीं होगी, तो फिर ऐसे विषयों पर बहस कहां होगी।

उन्होंने कहा कि राजधानी में हुए विरोध प्रदर्शन, भूख हड़ताल, पुलिस कार्रवाई और उससे जुड़े सभी घटनाक्रम पर खुलकर चर्चा होना आवश्यक है। थरूर ने लोकसभा अध्यक्ष से भी आग्रह किया कि वे हस्तक्षेप कर सदन में जारी गतिरोध समाप्त कराएं ताकि सांसद इस विषय पर अपनी बात रख सकें।

उन्होंने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में लोग घायल हुए और करीब 100 लोगों को उपचार के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उनके अनुसार, इस पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा और जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है।

कांग्रेस का आरोप, विपक्ष की आवाज दबाई गई

Student Protest : कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने संसद की कार्यवाही को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को छात्रों के मुद्दे पर अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया।

खेड़ा ने कहा कि विपक्ष लगातार छात्रों के साथ हुई कथित हिंसा और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाना चाहता था, लेकिन सदन में इस पर चर्चा नहीं होने दी गई। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत बताते हुए कहा कि सरकार को विपक्ष की बात सुनने और जवाब देने से बचना नहीं चाहिए।

कांग्रेस का कहना है कि गृह मंत्री अमित शाह स्वयं संसद के दोनों सदनों में आकर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर विस्तृत स्पष्टीकरण दें। साथ ही पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में बढ़ते अविश्वास और युवाओं की आत्महत्या जैसे गंभीर विषयों पर भी व्यापक चर्चा कराई जाए।

‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बल प्रयोग उचित नहीं’

कांग्रेस सांसद प्रणीति शिंदे ने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और वे अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सामने रख रहे थे। ऐसे में उन पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल कई सवाल खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्र इसी देश के नागरिक हैं और उन्हें अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना कोई अपराध नहीं है। यदि छात्र अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर सड़क पर उतरते हैं, तो सरकार का पहला दायित्व उनसे संवाद स्थापित करना होना चाहिए, न कि बल प्रयोग करना।

प्रणीति शिंदे ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद और समाधान का रास्ता अपनाया जाना चाहिए, ताकि युवाओं का विश्वास व्यवस्था में बना रहे।

परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर उठे सवाल

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने पूरे विवाद को केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित न रखते हुए देश की परीक्षा प्रणाली पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह एक ऐसी परीक्षा व्यवस्था विकसित करे, जिस पर हर छात्र और अभिभावक भरोसा कर सके।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में लगातार पेपर लीक की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन इन मामलों में जवाबदेही तय करने की दिशा में ठोस कदम दिखाई नहीं देते। उनके अनुसार, न तो संबंधित मंत्रियों की जिम्मेदारी तय होती है, न अधिकारियों की और न ही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के स्तर पर कोई स्पष्ट जवाबदेही दिखाई देती है।

कार्ति चिदंबरम का कहना था कि जब बार-बार परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं की खबरें सामने आती हैं, तो छात्रों का आत्मविश्वास कमजोर होता है और उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ जाती है।

‘यह राजनीति नहीं, युवाओं के भविष्य का सवाल’

Student Protest : कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि यह मुद्दा किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों और युवाओं के भविष्य का है। उन्होंने कहा कि वर्षों की मेहनत के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र यदि परीक्षा प्रणाली पर ही भरोसा खोने लगें, तो यह पूरे देश के लिए चिंता का विषय है।

उन्होंने पिछले कई वर्षों में सामने आए विभिन्न पेपर लीक मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने युवाओं का धैर्य कमजोर कर दिया है। उनके अनुसार, सरकार को छात्रों की बात सुननी चाहिए थी और उनसे संवाद कर उनका विश्वास बहाल करने का प्रयास करना चाहिए था।

दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने यह भी सवाल उठाया कि प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज, आंसू गैस और अन्य बल प्रयोग का निर्णय किस स्तर पर लिया गया। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की कार्रवाई की गई है, तो उसकी जिम्मेदारी भी स्पष्ट होनी चाहिए।

संसद में चर्चा की मांग तेज

Student Protest : कांग्रेस का कहना है कि छात्रों से जुड़े इस पूरे घटनाक्रम पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जानी चाहिए। पार्टी के अनुसार, लोकतंत्र में सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करना संसद की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है।

पार्टी नेताओं का मानना है कि केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक की रोकथाम, युवाओं के बढ़ते तनाव और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर भी गंभीर बहस होनी चाहिए। उनका तर्क है कि देश के लाखों छात्र इन समस्याओं से प्रभावित हो रहे हैं और सरकार को उनके विश्वास को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

युवाओं के सवालों पर जवाबदेही की मांग

कांग्रेस ने दोहराया कि देश के युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। पार्टी का कहना है कि छात्र केवल बेहतर और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था, पारदर्शिता और अपने भविष्य की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। ऐसे में सरकार का दायित्व है कि वह संवाद, पारदर्शिता और जवाबदेही के माध्यम से स्थिति को स्पष्ट करे।

संसद में उठे इस मुद्दे ने एक बार फिर परीक्षा व्यवस्था, युवाओं के भविष्य और लोकतांत्रिक अधिकारों पर राष्ट्रीय बहस को तेज कर दिया है। अब राजनीतिक नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस मामले पर क्या रुख अपनाती है और संसद में इस विषय पर विस्तृत चर्चा होती है या नहीं।

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