निवेदिता झा, नई दिल्ली। October 4 Panchang
हिंदू पंचांग के अनुसार 4 अक्टूबर 2026, रविवार को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि रहेगी। इस दिन पंचांग में कई महत्वपूर्ण योग और काल बताए गए हैं। सूर्य हस्त नक्षत्र में स्थित रहेंगे, जबकि चंद्रमा दिन के एक हिस्से तक मिथुन राशि में रहने के बाद कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही दिन में अभिजीत मुहूर्त, अमृतकाल, राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड जैसे अलग-अलग समय भी रहेंगे।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, किसी भी दिन के पंचांग में तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का विशेष महत्व होता है। इन सभी के आधार पर दिन के शुभ और अशुभ समय का निर्धारण किया जाता है। धार्मिक मान्यता रखने वाले लोग शुभ कार्यों, पूजा-पाठ, यात्रा, व्यापार, निवेश और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत के लिए पंचांग में बताए गए मुहूर्त और काल का ध्यान रखते हैं।
4 अक्टूबर को आश्विन कृष्ण नवमी तिथि
October 4 Panchang : 4 अक्टूबर 2026 को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि रहेगी। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार नवमी तिथि रविवार रात 2 बजकर 21 मिनट से शुरू होगी। इस दिन सूर्योदय सुबह 7 बजकर 54 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 23 मिनट पर होने का उल्लेख है।
आश्विन मास हिंदू धार्मिक कैलेंडर का महत्वपूर्ण महीना माना जाता है। इस माह के कृष्ण पक्ष में पितृ पक्ष से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों और परंपराओं का विशेष महत्व रहता है। नवमी तिथि पर भी कई लोग अपने परिवार की परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा, व्रत और अन्य धार्मिक कार्य करते हैं।
हस्त नक्षत्र में रहेंगे सूर्य
October 4 Panchang : पंचांग के अनुसार 4 अक्टूबर को सूर्य हस्त नक्षत्र में स्थित रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में सूर्य को आत्मविश्वास, ऊर्जा, नेतृत्व, प्रतिष्ठा, प्रशासन और व्यक्तित्व का कारक माना जाता है। वहीं हस्त नक्षत्र का संबंध चंद्रमा से माना जाता है।
हस्त नक्षत्र को वैदिक ज्योतिष में 13वां नक्षत्र बताया गया है। इसका अर्थ ‘हाथ’ माना जाता है। इस नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं और इसकी राशि कन्या मानी जाती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य के हस्त नक्षत्र में रहने का प्रभाव सभी 12 राशियों पर अलग-अलग रूप में पड़ सकता है।
हस्त नक्षत्र को कार्यकुशलता, कौशल और व्यावहारिक क्षमता से भी जोड़ा जाता है। इसलिए इस अवधि को योजनाबद्ध तरीके से काम करने और अपनी क्षमताओं का सही इस्तेमाल करने के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जाता है।
सुबह तक रहेगा परिघ योग
October 4 Panchang : 4 अक्टूबर को सुबह 3 बजकर 21 मिनट तक परिघ योग रहने की जानकारी दी गई है। वैदिक पंचांग में 27 नित्य योगों में परिघ योग का क्रम 19वां माना जाता है।
‘परिघ’ शब्द का अर्थ नगर के मुख्य द्वार अथवा द्वार को बंद करने वाली लोहे की छड़ से जुड़ा हुआ है। इसी वजह से इस योग को सुरक्षा के साथ-साथ रुकावट या अवरोध का प्रतीक भी माना जाता है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार परिघ योग के स्वामी शनि देव माने जाते हैं, जबकि इसके अधिष्ठाता देवता भगवान विश्वकर्मा बताए गए हैं। इस योग के दौरान किसी कार्य में आने वाली बाधाओं और परिस्थितियों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की मान्यता है।
अभिजीत मुहूर्त में किए जा सकते हैं शुभ कार्य
October 4 Panchang : 4 अक्टूबर को दिन का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 16 मिनट से 2 बजकर 2 मिनट तक रहने का उल्लेख है। हिंदू पंचांग में अभिजीत मुहूर्त को अत्यंत शुभ समय माना जाता है।
अभिजीत मुहूर्त दिन के महत्वपूर्ण मुहूर्तों में से एक है और सामान्य तौर पर इसकी अवधि लगभग 48 मिनट मानी जाती है। यह मध्याह्न से करीब 24 मिनट पहले शुरू होकर 24 मिनट बाद तक रहता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस मुहूर्त के स्वामी स्वयं ब्रह्मा जी हैं। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए शुभ कार्यों में सफलता की संभावना बढ़ती है और कार्य में आने वाले दोषों का प्रभाव कम होता है। हालांकि, किसी भी विशेष धार्मिक या ज्योतिषीय कार्य के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना अधिक उपयुक्त माना जाता है।
अमृतकाल का भी रहेगा समय
October 4 Panchang : दिए गए पंचांग विवरण में अमृतकाल शाम 6 बजकर 27 मिनट से 7 बजकर 58 मिनट तक बताया गया है। अमृतकाल को ज्योतिष और पंचांग की मान्यताओं में शुभ एवं सकारात्मक समयावधि माना जाता है।
मान्यता है कि अमृतकाल में किए जाने वाले कार्यों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। नए व्यापार से जुड़े कार्य, निवेश, धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा आदि के लिए इस समय को अनुकूल माना जाता है।
हालांकि किसी भी बड़े निवेश या व्यावसायिक निर्णय को केवल ज्योतिषीय मुहूर्त के आधार पर लेने के बजाय व्यावहारिक परिस्थितियों और आवश्यक जानकारी को भी ध्यान में रखना चाहिए।
शाम को रहेगा राहुकाल
October 4 Panchang : 4 अक्टूबर को राहुकाल शाम 5 बजकर 57 मिनट से 7 बजकर 23 मिनट तक रहने का उल्लेख है। हिंदू ज्योतिष में राहुकाल को नया शुभ कार्य शुरू करने के लिए अनुकूल समय नहीं माना जाता।
राहुकाल की गणना सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को आठ बराबर हिस्सों में बांटकर की जाती है। सामान्य तौर पर इसकी अवधि लगभग डेढ़ घंटे के आसपास होती है। हालांकि, स्थान और स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त के समय के अनुसार राहुकाल में बदलाव हो सकता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में नए कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। हालांकि, पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखने पर रोक नहीं मानी जाती।
गुलिक काल में नए काम से बचने की मान्यता
October 4 Panchang : पंचांग के अनुसार गुलिक काल शाम 4 बजकर 31 मिनट से 5 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय परंपरा में गुलिक काल को भी विशेष समय माना गया है। इसे कई स्थानों पर अशुभ या सावधानी बरतने योग्य काल के रूप में देखा जाता है।
मान्यता के अनुसार इस अवधि में नया कार्य शुरू करने से बचना चाहिए। हालांकि, पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखा जा सकता है। वहीं, कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में बार-बार किए जाने वाले कार्यों के लिए गुलिक काल को अलग दृष्टि से देखा जाता है।
कुछ मान्यताओं के अनुसार बैंक में धन जमा करना, दान देना या निवेश करना भी इस अवधि में किया जा सकता है। हालांकि, इन मान्यताओं को धार्मिक-ज्योतिषीय परंपराओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
दोपहर में रहेगा यमगंड काल
October 4 Panchang : 4 अक्टूबर को यमगंड काल दोपहर 1 बजकर 39 मिनट से 3 बजकर 5 मिनट तक रहने का उल्लेख है। ज्योतिषीय मान्यता में यमगंड का संबंध मृत्यु के देवता यमराज से जोड़ा जाता है।
परंपरागत रूप से यमगंड काल को नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ नहीं माना जाता। इस अवधि में नया व्यापार शुरू करने, महत्वपूर्ण यात्रा आरंभ करने या किसी बड़े कार्य की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय स्वास्थ्य, दीर्घायु अथवा अन्य प्रकार की बाधाओं से संबंधित नकारात्मक प्रभावों की आशंका मानी जाती है। हालांकि यह ज्योतिषीय विश्वास हैं और इनके वैज्ञानिक प्रमाण स्थापित नहीं हैं।
कन्या राशि में रहेंगे सूर्य
October 4 Panchang : 4 अक्टूबर को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में कन्या राशि को व्यावहारिकता, विश्लेषण, व्यवस्था और योजनाबद्ध कार्यों से जोड़ा जाता है।
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सूर्य के कन्या राशि में रहने की अवधि में व्यक्ति को योजनाबद्ध और व्यावहारिक तरीके से काम करने पर ध्यान देना चाहिए। कार्यक्षेत्र में अनुशासन, व्यवस्था और अपनी जिम्मेदारियों को सही तरीके से पूरा करने पर जोर देने की सलाह दी जाती है।
सूर्य की स्थिति का प्रभाव सभी राशियों के लिए अलग-अलग माना जाता है। इसलिए किसी व्यक्ति की कुंडली के आधार पर सूर्य की स्थिति का फलादेश अलग हो सकता है।
दोपहर तक मिथुन, फिर कर्क राशि में जाएंगे चंद्रमा
October 4 Panchang : इस दिन चंद्रमा दोपहर 3 बजकर 1 मिनट तक मिथुन राशि में रहेंगे। इसके बाद चंद्रमा कर्क राशि में प्रवेश करेंगे।
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन, भावनाओं, मानसिक स्थिति, संवेदनशीलता और पारिवारिक जुड़ाव का कारक माना जाता है। इसलिए चंद्रमा की राशि परिवर्तन को मानसिक और भावनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जाता है।
जब चंद्रमा मिथुन राशि में होते हैं, तो ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार बौद्धिक गतिविधियों, बातचीत, विचारों के आदान-प्रदान और सीखने की प्रवृत्ति का प्रभाव अधिक हो सकता है। मिथुन राशि को संवाद, जिज्ञासा और बौद्धिक सक्रियता से जोड़ा जाता है।
दोपहर के बाद चंद्रमा के कर्क राशि में प्रवेश करने के साथ ही भावनात्मक पक्ष अधिक प्रभावी होने की मान्यता है।
कर्क राशि में चंद्रमा का विशेष महत्व
October 4 Panchang : कर्क राशि के स्वामी स्वयं चंद्रमा हैं। इसलिए ज्योतिषीय दृष्टि से कर्क राशि में चंद्रमा की स्थिति को विशेष महत्व दिया जाता है। चंद्रमा के अपनी राशि में आने पर भावनात्मक संवेदनशीलता, परिवार, घर और अपनों के प्रति लगाव बढ़ने की मान्यता है।
मिथुन राशि में चंद्रमा के दौरान जहां बातचीत, तर्क और बौद्धिक गतिविधियों पर जोर रहने की बात कही जाती है, वहीं कर्क राशि में प्रवेश के बाद व्यक्ति का ध्यान परिवार, भावनाओं और मानसिक शांति की ओर अधिक हो सकता है।
इस दौरान कई लोग तार्किक सोच की तुलना में भावनात्मक पहलुओं को अधिक महत्व दे सकते हैं। परिवार के साथ समय बिताने, घर-परिवार से जुड़े विषयों पर विचार करने और अपने करीबी लोगों के साथ संवाद बढ़ाने की इच्छा हो सकती है।
4 अक्टूबर का पंचांग एक नजर में
- तिथि: आश्विन कृष्ण पक्ष नवमी
- दिन: रविवार
- सूर्योदय: सुबह 7:54 बजे
- सूर्यास्त: शाम 7:23 बजे
- सूर्य: कन्या राशि, हस्त नक्षत्र
- चंद्रमा: दोपहर 3:01 बजे तक मिथुन, इसके बाद कर्क राशि
- परिघ योग: सुबह 3:21 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 1:16 बजे से 2:02 बजे तक
- अमृतकाल: शाम 6:27 बजे से 7:58 बजे तक
- राहुकाल: शाम 5:57 बजे से 7:23 बजे तक
- गुलिक काल: शाम 4:31 बजे से 5:57 बजे तक
- यमगंड: दोपहर 1:39 बजे से 3:05 बजे तक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ-अशुभ समय का ध्यान
October 4 Panchang : पंचांग भारतीय परंपरा में समय की गणना और धार्मिक कार्यों के लिए उपयोग की जाने वाली महत्वपूर्ण व्यवस्था है। इसमें सूर्य, चंद्रमा, तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति के आधार पर दिन के विभिन्न समयों की जानकारी दी जाती है।
4 अक्टूबर 2026 को जहां अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल जैसे शुभ माने जाने वाले समय मौजूद हैं, वहीं राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड जैसे समय भी बताए गए हैं। धार्मिक मान्यता रखने वाले लोग इन समयों को ध्यान में रखकर अपने कार्यों की योजना बना सकते हैं।
Author: Nivedita Jha
Nivedita Jha is a graduate from Baba Saheb Bhimrao Ambedkar University. She is also a double post graduate. She has also done journalism. She has five years of experience in journalism.







