ओम वर्मा, नयी दिल्ली। Madhurendra Kumar : बिहार के पूर्वी चंपारण की धरती ने एक बार फिर देश को गौरवान्वित करने वाला लाल दिया है। अपनी अनूठी रेत कला (सैंड आर्ट) के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराने वाले विश्वविख्यात रेत कलाकार मधुरेंद्र कुमार ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। उनकी कला, सामाजिक सरोकारों और जन-जागरूकता अभियान में दिए गए उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए उनका नाम प्रतिष्ठित फोर्ब्स बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। यह उपलब्धि न केवल मधुरेंद्र कुमार के लिए, बल्कि पूरे बिहार और देश के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है।
इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के उपलक्ष्य में पटना स्थित 7, सर्कुलर रोड आवास पर आयोजित एक विशेष सम्मान समारोह में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री, जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार ने अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार को स्मृति चिह्न, मेडल तथा फोर्ब्स बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का आधिकारिक प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
नीतीश कुमार ने की तारीफ
इस अवसर पर नीतीश कुमार ने कहा कि मधुरेंद्र कुमार बिहार के पहले और एकमात्र ऐसे अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त रेत कलाकार हैं, जिन्होंने अपनी कला को केवल सौंदर्य प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनाया। उन्होंने कहा कि मधुरेंद्र की कला समाज को जागरूक करने, सकारात्मक सोच विकसित करने और जनहित के संदेश देने का सशक्त माध्यम बनी है। उन्होंने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मधुरेंद्र कुमार को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

विकास योजनाओं को पहुंचाने का प्रयास
Madhurendra Kumar : फोर्ब्स बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अंतरराष्ट्रीय सचिव टॉम वाशिंगटन ने बताया कि मधुरेंद्र कुमार ने वर्ष 2005 से 2026 तक बिहार सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी यात्राओं—जैसे न्याय यात्रा, निश्चय यात्रा, समाधान यात्रा, प्रगति यात्रा और समृद्धि यात्रा—को आम जनता तक पहुंचाने के उद्देश्य से राज्य के सभी जिलों में 100 से अधिक विशाल रेत कलाकृतियों का निर्माण किया। इन कलाकृतियों के माध्यम से उन्होंने सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने का अनूठा प्रयास किया, जिसके लिए उन्हें फोर्ब्स बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान दिया गया।
उन्होंने बताया कि मधुरेंद्र कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कई आकर्षक एवं जीवंत रेत प्रतिमाएं भी तैयार कीं, जिन्हें लोगों ने खूब सराहा। उनकी इस असाधारण कला की प्रशंसा स्वयं प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री भी कर चुके हैं। इसी उल्लेखनीय योगदान के आधार पर प्रमाणपत्र संख्या FBWR00239 के अंतर्गत उनका नाम फोर्ब्स बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है।
हर कलाकृति को मिली सराहना
Madhurendra Kumar : मधुरेंद्र कुमार ने बिहार के सभी 38 जिलों में जिला प्रशासन के सहयोग से मुख्यमंत्री के विभिन्न यात्रा कार्यक्रमों के दौरान रेत पर विशाल और जटिल कलाकृतियों का निर्माण कर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के लोगों को सरकारी योजनाओं, स्वच्छता, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तीकरण, मतदान जागरूकता, जल संरक्षण और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूक करने का कार्य किया। उनकी हर कलाकृति समाज को सकारात्मक संदेश देने का माध्यम बनी।
विश्वविख्यात रेत कलाकार मधुरेंद्र कुमार की उपलब्धियों की सूची बेहद लंबी और प्रेरणादायक है। उन्होंने पिछले तीन दशकों में 5,000 से अधिक रेत एवं कोयले की राख से बनी मूर्तियां, 4,000 से अधिक मार्बल, ग्रेनाइट, धातु, तांबा, पीतल और एल्यूमिनियम जैसी ठोस मूर्तिकृतियां, 20,000 से अधिक सूक्ष्म कलाकृतियां, जिनमें लीफ आर्ट प्रमुख है, तैयार की हैं। इसके अलावा उन्होंने 3,000 से अधिक फलों और सब्जियों पर नक्काशी, 2,000 से अधिक प्लाईवुड एवं थर्मोकोल की कलाकृतियां, 500 से अधिक गेहूं, चावल और दाल जैसे अनाज के दानों पर सूक्ष्म कलाकृतियां तथा 1,000 से अधिक पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) आधारित कलाकृतियां तैयार की हैं।

सामाजिक परिवर्तन का सशक्त अभियान
Madhurendra Kumar : उन्होंने खाली शराब की बोतलों, गुटखा और तंबाकू के रैपर, प्लास्टिक पाउच, सिगरेट के अवशेष और अन्य अनुपयोगी वस्तुओं से आकर्षक कलाकृतियां बनाकर नशामुक्ति, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावशाली संदेश भी दिया है। उनकी कला केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त अभियान बन चुकी है।
12 से अधिक विश्व रिकॉर्ड
Madhurendra Kumar : मधुरेंद्र कुमार अब तक 100 से अधिक राष्ट्रीय पुरस्कार, 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। वे 25 से अधिक देशों में लगभग 75 बार भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और अब तक 12 से अधिक विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा चुके हैं।
हाल ही में उन्हें अमेरिका इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (AIU), हॉलीवुड, कैलिफोर्निया (यूएसए) द्वारा रेत कला के क्षेत्र में उनके वैश्विक और असाधारण योगदान के लिए ऑनरेरी डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (Honorary Doctor of Philosophy in Sand Art) की मानद उपाधि से भी सम्मानित किया गया, जिससे उनकी उपलब्धियों में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया।

आने वाली पीढ़ियों को लेनी चाहिए सीख
Madhurendra Kumar : इस अवसर पर राज्यसभा सांसद एवं जनता दल (यू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा कि मधुरेंद्र कुमार जैसे प्रतिभाशाली कलाकार अपनी कला के माध्यम से बिहार की पहचान पूरी दुनिया में स्थापित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरे राज्य के लिए गर्व और प्रेरणा की बात है तथा आने वाली पीढ़ियों को उनसे सीख लेनी चाहिए।
वहीं बिहार विधान परिषद में सत्तारूढ़ दल के उपनेता एमएलसी ललन कुमार सर्राफ तथा बिहार सरकार के कैबिनेट मंत्री श्रवण कुमार ने भी मधुरेंद्र कुमार को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता बिहार की सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाने वाली है।
रेत के कणों को अपनी कल्पना, मेहनत और सामाजिक सरोकारों से विश्वस्तरीय कला में बदलने वाले चंपारण के सपूत मधुरेंद्र कुमार आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनकी यह उपलब्धि यह साबित करती है कि यदि प्रतिभा के साथ समर्पण और निरंतर प्रयास जुड़ जाए, तो दुनिया का कोई भी मंच दूर नहीं रहता।
Author: ohm verma
Om Verma (ohm verma) is a graduate from Motilal Nehru College of Delhi University. He has done Journalism and Mass Communication from Kurukshetra University. He has worked in Hari Bhoomi newspaper published from Haryana. After this, he worked for Dainik Jagran as Chief Sub Editor for a long time. He held many important roles in the Noida office. During this time, he participated in debates on many national TV channels.







