नई दिल्ली, 19 दिसंबर। Lawyer Custody Case : सुप्रीम कोर्ट ने एक वकील द्वारा दायर याचिका पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), गौतमबुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त, संबंधित एसीपी और थाना प्रभारी (एसएचओ) को नोटिस जारी किया है।
यह मामला नोएडा के सेक्टर-126 थाना क्षेत्र में कथित अवैध हिरासत और यौन उत्पीड़न से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता वकील ने आरोप लगाया है कि 13 दिसंबर की रात उन्हें पुलिस ने करीब 14 घंटे तक गैरकानूनी रूप से हिरासत में रखा, जबकि वह केवल अपने मुवक्किल के पक्ष में कानूनी दायित्व का निर्वहन कर रहे थे।
पुलिस ने किया मानसिक उत्पीड़न
Lawyer Custody Case : वकील का दावा है कि पुलिस हिरासत के दौरान उनके साथ मानसिक और यौन उत्पीड़न किया गया, जिसे उन्होंने अपने मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया है। याचिका में कहा गया है कि एक अधिवक्ता के रूप में पेशेवर कर्तव्यों का पालन करने के कारण उन्हें प्रताड़ना का शिकार बनाया गया।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की दो सदस्यीय पीठ ने याचिकाकर्ता की दलीलों को सुनते हुए मामले को प्रथम दृष्टया गंभीर माना। इसके बाद अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
अगली सुनवाई 7 जनवरी को
Lawyer Custody Case : सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला व्यक्तिगत स्वतंत्रता, विधि व्यवसाय के अधिकार और पुलिस शक्ति के संभावित दुरुपयोग जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्नों से जुड़ा है, जिनकी गहन जांच आवश्यक है। मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी को निर्धारित की गई है।
याचिका में वकील ने दोहराया कि उन्हें रात के समय थाना परिसर में लगभग 14 घंटे तक अवैध रूप से रोके रखा गया और इस दौरान उन्हें प्रताड़ित किया गया। उन्होंने इस पूरी घटना को कानून के शासन और न्यायिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया है।







