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Jharkhand Student Protest : झारखंड में छात्र आंदोलन का 16वां दिन: वार्ता की मेज पर सरकार, सड़क पर आंदोलन की तैयारी

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रांची, 9 अगस्त। Jharkhand Student Protest :  झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन रविवार को अपने 16वें दिन में प्रवेश कर गया है। आंदोलनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच आज एक बार फिर औपचारिक बातचीत होने जा रही है। दोपहर 12 बजे तीसरे दौर की वार्ता प्रस्तावित है। हालांकि, इससे पहले हुई बातचीत में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाने के कारण छात्रों के तेवर अब भी सख्त हैं।

छात्र संगठनों ने साफ कर दिया है कि महज आश्वासन या भरोसे के आधार पर आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। उनकी मांग है कि सरकार प्रत्येक प्रमुख मुद्दे पर लिखित, स्पष्ट और ठोस निर्णय दे। अगर रविवार की वार्ता में संतोषजनक समाधान नहीं निकलता है, तो छात्र अपने पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव करेंगे।

दो दौर की बातचीत बेनतीजा, अब तीसरी वार्ता से उम्मीद

Jharkhand Student Protest :  सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच इससे पहले दो दौर की औपचारिक बातचीत हो चुकी है, लेकिन दोनों ही प्रयास किसी निर्णायक समाधान तक नहीं पहुंच सके। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर सरकार ने छात्रों की समस्याओं पर चर्चा के लिए चार सदस्यीय मंत्रियों की समिति गठित की है।

इस समिति में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, चमरा लिंडा और संजय प्रसाद यादव शामिल हैं। समिति ने शुक्रवार और शनिवार को छात्र संगठनों और अलग-अलग छात्र गुटों के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर में बातचीत की।

पिछले दो दिनों में विभिन्न स्तरों पर करीब पांच दौर की चर्चा हो चुकी है। बातचीत में सरकार की ओर से छात्रों की मांगों को समझने और समाधान का रास्ता तलाशने का प्रयास किया गया, लेकिन कुछ प्रमुख मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी।

अब रविवार को होने वाली तीसरे दौर की औपचारिक वार्ता को बेहद अहम माना जा रहा है। छात्रों का कहना है कि अब बातचीत केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि निर्णय की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

‘सिर्फ भरोसा नहीं, कागज पर चाहिए फैसला’

Jharkhand Student Protest :  आंदोलनकारी छात्रों का सबसे बड़ा जोर इस बात पर है कि सरकार उनकी मांगों को केवल मौखिक रूप से स्वीकार न करे, बल्कि उन्हें लिखित रूप में दर्ज करे। छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि पिछले अनुभवों को देखते हुए सिर्फ मौखिक आश्वासन पर आंदोलन समाप्त करना उनके लिए संभव नहीं है।

छात्र प्रतिनिधि रवींद्र कुमार पासवान और जेएलकेएम गुट के नेता देवेंद्र नाथ महतो ने स्पष्ट किया है कि सरकार को मांगों पर लिखित और ठोस आश्वासन देना होगा। उनका कहना है कि जब तक सभी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

छात्रों का तर्क है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता केवल उम्मीदवारों के भविष्य का सवाल नहीं है, बल्कि इससे राज्य की पूरी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता जुड़ी हुई है। ऐसे में वे चाहते हैं कि सरकार तत्काल प्रभाव से ऐसे कदम उठाए, जिससे भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को लेकर किसी तरह का संदेह पैदा न हो।

इन मांगों पर अड़े हैं आंदोलनकारी छात्र

छात्र आंदोलन के केंद्र में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) से जुड़ी भर्ती परीक्षाएं हैं। आंदोलनकारी छात्रों ने कई प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखी हैं।

इनमें 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के रेगुलर और बैकलॉग पदों से संबंधित मुद्दे प्रमुख हैं। इसके साथ ही छात्र 2024 की जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को रद्द करने की मांग भी कर रहे हैं।

छात्रों की एक बड़ी मांग टीडीपीएल एजेंसी की ओर से आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द कर सीबीआई जांच कराने की है। आंदोलनकारियों का कहना है कि परीक्षा संचालन से जुड़े विवादों की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और दोषियों की जिम्मेदारी तय हो।

इसके अलावा छात्र चाहते हैं कि भर्ती परीक्षाओं की मौजूदा व्यवस्था में व्यापक सुधार किया जाए। परीक्षा केंद्रों से लेकर प्रश्नपत्र, एजेंसी की भूमिका, निगरानी, परिणाम और शिकायत निवारण तक पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की मांग की जा रही है।

परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग, सरकार ने मांगे सुझाव

आंदोलन के बीच राज्य सरकार की ओर से परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर छात्रों और राज्य के युवाओं से सुझाव भी मांगे गए हैं। सरकार ने इसके लिए ईमेल के माध्यम से सुझाव भेजने की व्यवस्था की है।

सरकार का यह कदम परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए व्यापक सुझाव जुटाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि सुझाव मांगना अपनी जगह है, लेकिन यह उनकी मूल मांगों का विकल्प नहीं हो सकता।

छात्रों का कहना है कि मौजूदा विवाद से जुड़े मामलों में पहले ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए। इसके बाद भविष्य की परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सुझावों और विशेषज्ञों की राय को शामिल किया जा सकता है।

यानी सरकार जहां सुधार की व्यापक प्रक्रिया की बात कर रही है, वहीं छात्र तत्काल प्रभाव से विवादित परीक्षाओं और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई की मांग पर जोर दे रहे हैं।

10 अगस्त को विधानसभा की ओर बढ़ेंगे कदम?

Jharkhand Student Protest :  आंदोलनकारियों ने सरकार को रविवार तक का समय दिया है। छात्रों का कहना है कि यदि रविवार दोपहर 12 बजे होने वाली बातचीत में उनकी मांगों पर लिखित और संतोषजनक समाधान नहीं निकलता है, तो वे 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव करेंगे।

इस घोषणा ने आंदोलन को एक नए चरण में पहुंचा दिया है। अब रविवार की वार्ता केवल एक और बैठक नहीं रह गई है, बल्कि इसके परिणाम का सीधा असर अगले दिन के आंदोलन पर पड़ सकता है।

छात्रों के रुख से साफ है कि वे इस बार किसी अस्पष्ट आश्वासन के आधार पर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। उनका कहना है कि आंदोलन तभी समाप्त होगा, जब सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट फैसला करेगी।

11 अगस्त को एबीवीपी का भी विधानसभा मार्च

इधर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने भी 11 अगस्त को विधानसभा मार्च का ऐलान किया है। ऐसे में झारखंड में छात्र संगठनों की गतिविधियां आने वाले दिनों में और तेज हो सकती हैं।

एक ओर आंदोलनकारी छात्र 10 अगस्त को विधानसभा घेराव की तैयारी में हैं, वहीं इसके अगले दिन एबीवीपी ने विधानसभा मार्च की घोषणा की है। लगातार दो दिनों तक प्रस्तावित छात्र कार्यक्रमों के कारण सरकार के सामने स्थिति को संभालने की चुनौती भी बढ़ गई है।

हालांकि, रविवार की वार्ता के नतीजे इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

अगले 24 से 36 घंटे होंगे निर्णायक

झारखंड में जारी छात्र आंदोलन अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां बातचीत और आंदोलन—दोनों की राह एक साथ दिखाई दे रही है। सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है, जबकि छात्र लिखित फैसले के बिना पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

रविवार दोपहर 12 बजे होने वाली तीसरे दौर की वार्ता इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि सरकार छात्रों की प्रमुख मांगों पर ठोस और लिखित समाधान पेश करती है, तो आंदोलन को समाप्त करने की दिशा में रास्ता खुल सकता है। लेकिन अगर बातचीत फिर से बिना किसी निर्णायक नतीजे के खत्म होती है, तो 10 अगस्त का विधानसभा घेराव आंदोलन का अगला बड़ा पड़ाव बन सकता है।

फिलहाल दोनों पक्षों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बातचीत से समाधान निकलेगा या फिर छात्र सड़क से विधानसभा तक अपना विरोध तेज करेंगे?

एक तरफ सरकार की चार सदस्यीय मंत्री समिति समाधान तलाश रही है, तो दूसरी तरफ छात्र संगठन अपनी मांगों पर अडिग हैं। ऐसे में रविवार की वार्ता और उसके बाद के घटनाक्रम पर पूरे झारखंड की नजर बनी हुई है। आने वाले 24 से 36 घंटे राज्य के छात्र आंदोलन की दिशा तय करने वाले साबित हो सकते हैं।

jahanvi singh
Author: jahanvi singh

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