नई दिल्ली, 10 जनवरी। I-PAC raid : कोलकाता में राजनीतिक रणनीतिक संस्था आइ-पैक (I-PAC) के कार्यालय और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर हुई छापेमारी से जुड़ा मामला अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुँच गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर करते हुए कहा है कि पश्चिम बंगाल में एजेंसी के वैधानिक अधिकारों में हस्तक्षेप किया गया। वहीं, राज्य सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर अपना पक्ष सुरक्षित कर लिया है।
I-PAC raid : ईडी का आरोप : जांच में बाधा, सीबीआइ जांच की मांग
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में ईडी ने कोलकाता में हुए पूरे घटनाक्रम का विस्तार से जिक्र किया है। एजेंसी का कहना है कि निष्पक्ष जांच करने के उसके अधिकारों को राज्य मशीनरी ने बाधित किया, जिससे जांच प्रभावित हुई। इसी आधार पर ईडी ने इस पूरे मामले में सीबीआइ जांच की मांग की है।
हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत
I-PAC raid : इससे पहले ईडी ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत ने तत्काल सुनवाई की मांग को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति घोष की एकल पीठ द्वारा निर्धारित तारीख पर ही होगी।
ईडी ने यह भी आग्रह किया था कि यदि 14 जनवरी से पहले सुनवाई संभव न हो तो केस को किसी अन्य एकल पीठ को सौंपा जाए, लेकिन अदालत ने इस दलील को भी ठुकरा दिया।
छापेमारी के दौरान बढ़ा सियासी विवाद
I-PAC raid : विवाद की जड़ गुरुवार को हुई वह छापेमारी है, जब ईडी की टीम ने कोलकाता में आइ-पैक के दफ्तर और प्रतीक जैन के आवास पर तलाशी अभियान चलाया। मामला उस समय और गर्मा गया, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद तलाशी के दौरान प्रतीक जैन के घर और दफ्तर पहुँच गईं।
आरोप है कि मुख्यमंत्री ने ईडी अधिकारियों से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर उन्हें अपनी गाड़ी में रखवाया।
टीएमसी का आरोप बनाम ईडी का जवाब
I-PAC raid : तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने आरोप लगाया कि आइ-पैक पार्टी की मतदाता रणनीति एजेंसी के रूप में काम कर रही है और ईडी की कार्रवाई का मकसद विधानसभा चुनाव से जुड़ी चुनावी रणनीति के दस्तावेजों को जब्त कर उन्हें भाजपा के साथ साझा करना था।
हालांकि, ईडी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि कार्रवाई पूरी तरह कानूनी और जांच प्रक्रिया का हिस्सा थी।
अब सुप्रीम कोर्ट पर टिकी निगाहें
I-PAC raid : आइ-पैक छापेमारी को लेकर बढ़ता यह राजनीतिक-कानूनी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आकर टिक गया है। आने वाले दिनों में शीर्ष अदालत का रुख तय करेगा कि यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ेगा।







