Ghooskhor Pandit : नेटफ्लिक्स ने कोर्ट में मानी गलती, आपत्तिजनक शब्द हटाने का एलान
नई दिल्ली, 10 फरवरी। Ghooskhor Pandit : नेटफ्लिक्स की अपकमिंग फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के टाइटल को लेकर उठे विवाद पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स ने अदालत को बताया कि मनोज बाजपेयी अभिनीत इस फिल्म का नाम बदला जाएगा और टाइटल से आपत्तिजनक शब्द हटाए जाएंगे। साथ ही फिल्म से जुड़ा पूरा प्रमोशनल कंटेंट सोशल मीडिया से पहले ही हटा लिया गया है।
ब्राह्मण समुदाय की छवि खराब करने का आरोप
Ghooskhor Pandit : इस मामले में दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि नीरज पांडे द्वारा निर्देशित फिल्म का टाइटल ब्राह्मण समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। याचिकाकर्ता का कहना था कि ‘घूसखोर’ जैसे शब्द को ‘पंडित’ से जोड़कर पूरे समुदाय को बदनाम किया जा रहा है, जो सांप्रदायिक रूप से आपत्तिजनक है। इसी आधार पर फिल्म की रिलीज और स्ट्रीमिंग पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
कोर्ट में नेटफ्लिक्स का बड़ा बयान
Ghooskhor Pandit : दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नेटफ्लिक्स के वकील ने स्पष्ट किया कि कंपनी फिल्म का टाइटल बदलने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि विवादित शब्द हटाकर नया नाम रखा जाएगा और सोशल मीडिया से सभी प्रचार सामग्री पहले ही हटा दी गई है।
याचिकाकर्ता ने बताया ‘बड़ी जीत’
Ghooskhor Pandit : याचिकाकर्ता की ओर से पेश एडवोकेट विनीत जिंदल ने कोर्ट की कार्यवाही के बाद इसे ब्राह्मण समुदाय की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि फिल्म के टाइटल में ‘घूसखोर’ शब्द का इस्तेमाल समुदाय की छवि को ठेस पहुंचाने वाला था और नेटफ्लिक्स द्वारा नाम बदलने पर सहमति जताना एक महत्वपूर्ण कदम है।
कंटेंट पर आपत्ति हुई तो फिर खुलेगा कानूनी रास्ता
Ghooskhor Pandit : एडवोकेट जिंदल ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर फिल्म के कंटेंट में भविष्य में कोई आपत्तिजनक तत्व पाया जाता है तो दोबारा कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि कंटेंट से जुड़ी किसी भी समस्या की स्थिति में याचिकाकर्ता कानूनी प्रक्रिया के तहत फिर से आ सकते हैं।
ओटीटी कंटेंट की जांच पर कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने केंद्र सरकार या संबंधित प्राधिकरण को यह भी कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म के कंटेंट को वेरीफाई किया जा सकता है, क्योंकि ओटीटी पर सीबीएफसी सर्टिफिकेशन अनिवार्य नहीं होता और कंटेंट की जांच रिलीज के बाद की जाती है। याचिकाकर्ता की ओर से कंटेंट को पहले वेरीफाई करने की मौखिक मांग भी रखी गई, ताकि किसी भी समुदाय को लेकर आपत्तिजनक सामग्री सामने न आए।
याचिकाकर्ता ने इस फैसले को ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर समुदाय विशेष को निशाना बनाने वाले कंटेंट पर लगाम लगाने की दिशा में एक अहम सफलता बताया।







