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Speaker No-Confidence : लोकसभा में सियासी भूचाल, स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास दांव

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Opposition Moves Speaker No-Confidence Motion in Lok Sabha Amid Budget Session Chaos

Speaker No-Confidence : बजट सत्र में बढ़ता हंगामा

नई दिल्ली, 10 फरवरी। Speaker No-Confidence : संसद का बजट सत्र लगातार हंगामे की भेंट चढ़ता दिख रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ खुला मोर्चा खोलते हुए अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही निष्पक्ष न होकर एकतरफा ढंग से चलाई जा रही है।

118 सांसदों के हस्ताक्षर, नियम 94(सी) के तहत नोटिस

Speaker No-Confidence : विपक्षी दलों के सांसदों ने लोकसभा महासचिव को नियम 94 (सी) के तहत अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा, जिस पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। यह प्रस्ताव कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने पेश किया है, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है।

राहुल गांधी को बोलने से रोकने का आरोप

नोटिस में कहा गया है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही खुले तौर पर पक्षपातपूर्ण ढंग से चलाई और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं को बार-बार बोलने का अवसर नहीं दिया गया।

विपक्ष ने गिनाईं ‘पक्षपात’ की घटनाएं

Speaker No-Confidence : अपने आरोपों के समर्थन में विपक्ष ने कई उदाहरण दिए। बताया गया कि 2 फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी को अपना भाषण पूरा नहीं करने दिया गया। वहीं, 3 फरवरी को आठ विपक्षी सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया, जिसे विपक्ष ने लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन के समान बताया।

आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कार्रवाई नहीं?

Speaker No-Confidence :  पत्र में 4 फरवरी की एक और घटना का जिक्र है, जब विपक्ष के विरोध के बावजूद एक भाजपा सांसद को चेयर से दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर कथित तौर पर आपत्तिजनक और निजी हमले करने की अनुमति दी गई, जबकि उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

स्पीकर के बयान पर भी एतराज

विपक्ष ने 5 फरवरी को मोशन ऑफ थैंक्स को वॉयस वोट से पारित किए जाने के बाद स्पीकर ओम बिरला के बयानों पर भी आपत्ति जताई। स्पीकर ने उस दिन विपक्ष पर अभूतपूर्व हंगामा करने का आरोप लगाया था और कहा था कि संभावित अप्रिय स्थिति से बचने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री से सदन में न आने का अनुरोध किया था।

‘संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस’

विपक्ष का कहना है कि इन बयानों में कांग्रेस सांसदों के खिलाफ झूठे और अपमानजनक आरोप लगाए गए। नोटिस में यह भी कहा गया कि संसदीय प्रक्रिया और मर्यादा के संरक्षक होने के बावजूद स्पीकर द्वारा सदन के पटल से इस तरह के बयान देना संवैधानिक संस्था की गरिमा के खिलाफ है।

सम्मान के साथ असहमति

Speaker No-Confidence : अंत में विपक्ष ने स्पष्ट किया कि वह व्यक्तिगत रूप से स्पीकर का सम्मान करता है, लेकिन इस बात से आहत है कि लोकसभा में विपक्षी सांसदों को जनता से जुड़े महत्वपूर्ण और जायज मुद्दे उठाने से लगातार रोका जा रहा है।

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