Chhath Geetmala : मैथिली, भोजपुरी, मगही, अंगिका और बज्जिका के पारंपरिक छठगीतों को एक स्वर में पिरोने की अनूठी पहल; कल्पना पटवारी ने छठी मइया को समर्पित की सात गीतों की विशेष श्रृंखला
निवेदिता झा, पटना। Chhath Geetmala :
लोक संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली प्रसिद्ध गायिका कल्पना पटवारी ने इस बार छठ महापर्व के अवसर पर बिहार की लोक संस्कृति और भाषाई विरासत को समर्पित एक अनूठी सांस्कृतिक पहल की है। उन्होंने बिहार की पांच प्रमुख भाषाओं मैथिली, भोजपुरी, मगही, अंगिका और बज्जिका में सात पारंपरिक छठगीतों को अपनी सुरीली आवाज में प्रस्तुत किया है। इन सात गीतों को मिलाकर तैयार की गई विशेष श्रृंखला का नाम ‘छठगीतमाला’ रखा गया है। इसे छठी मइया के चरणों में अर्पित किया जा रहा है।
बिहार में यह अपनी तरह की पहली पहल मानी जा रही है, जिसमें एक ही गायिका ने राज्य की पांच अलग-अलग लोकभाषाओं में सात छठगीतों को स्वरबद्ध कर प्रस्तुत किया है। कल्पना पटवारी की यह परिकल्पना न केवल छठ महापर्व की धार्मिक आस्था को संगीत के माध्यम से अभिव्यक्त करती है, बल्कि बिहार की समृद्ध लोक परंपराओं, सांस्कृतिक विविधता और भाषाई विरासत को भी एक मंच पर लाने का प्रयास है।
बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से राष्ट्रीय कला पुरस्कार से सम्मानित किए जाने के बाद कल्पना पटवारी ने मीडिया से बातचीत में बिहार की संस्कृति के प्रति अपने भावनात्मक जुड़ाव को साझा किया था। उन्होंने कहा था कि प्रारब्ध से ही उन्हें बिहार की संस्कृति की सेवा करने का अवसर मिला है। असम की रहने वाली होने के बावजूद उनकी भावनाओं में बिहार की लोक संस्कृति और इसकी गौरवशाली विरासत के प्रति विशेष अनुराग है। बिहार की सांस्कृतिक पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने और इसकी परंपराओं के संरक्षण के लिए वह हमेशा कुछ नया करने की इच्छा रखती हैं।
इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए कल्पना पटवारी इस छठ महापर्व पर बिहार की विभिन्न भाषाओं के पारंपरिक छठगीतों के साथ श्रोताओं के बीच उपस्थित हुई हैं। उनकी ‘छठगीतमाला’ इस बात का उदाहरण है कि संगीत किस तरह अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों को एक सांस्कृतिक सूत्र में जोड़ सकता है।
यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची से भी जुड़ा है छठगीतों का महत्व
Chhath Geetmala : छठ महापर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि बिहार की लोक आस्था, सामाजिक एकजुटता, पारिवारिक परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है। इस पर्व की ऐतिहासिक, पौराणिक और लोक परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
छठ महापर्व को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने के उद्देश्य से इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) की ओर से एक डोजियर तैयार कर भेजा गया है। इस डोजियर में हृदय नारायण झा द्वारा लिखित एवं संकलित पुस्तक ‘छठगीत (सर्वसौभाग्यदायकम)’ को भी शामिल किया गया है।
इस पुस्तक में छठ महापर्व के पौराणिक और लौकिक महत्व का विस्तार से उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही बिहार की विभिन्न भाषाओं में प्रचलित पारंपरिक छठगीतों को भी संकलित किया गया है। इसमें मैथिली, भोजपुरी, मगही, अंगिका और बज्जिका के पारंपरिक गीतों के अलावा मौलिक रूप से रचे गए मैथिली एवं भोजपुरी छठगीत भी शामिल हैं।
इसी पुस्तक में संकलित सात गीतों को चुनकर कल्पना पटवारी ने अपनी आवाज में एक विशेष ‘छठगीतमाला’ तैयार की है। इस प्रकार पुस्तक में संरक्षित लोकगीतों को संगीत के माध्यम से नई पीढ़ी और व्यापक श्रोता समुदाय तक पहुंचाने की पहल की गई है।
पांच भाषाओं में सात गीतों का अनूठा संगम
Chhath Geetmala : कल्पना पटवारी की इस विशेष छठगीतमाला में बिहार की पांच भाषाओं के कुल सात गीत शामिल हैं। इनमें दो मैथिली, दो भोजपुरी और एक-एक मगही, अंगिका तथा बज्जिका का छठगीत है।
मैथिली के दो छठगीत
- ‘चारि पहर राति जल थल सेविलहुँ’
- ‘कातिक मास इजोरिया ई दुई तिथि पावन हे’
भोजपुरी के दो छठगीत
- ‘जगत के पालक दीनानाथ कर दिहीं हमके सनाथ’
- ‘दरसन माँगीला तोहार हे गंगा मैया’
मगही का छठगीत
- ‘छोटी मुटी मालिन बेटी के भुइयाँ लोटे केस’
- अंगिका का छठगीत
- ‘छठि मइया अइतई अंगनमा सजन हम करबई बरतिया’
बज्जिका का छठगीत
- ‘रिमझिम बुन्दवा बरसि गेल ओरियानी मोती चूए’
इन सभी गीतों को कल्पना पटवारी ने अपनी विशिष्ट और मधुर आवाज में प्रस्तुत किया है। गीतों के बोलों में छठ महापर्व की पारंपरिक श्रद्धा, सूर्योपासना, गंगा मैया की महिमा, छठी मइया के प्रति समर्पण और लोकजीवन की सहज अभिव्यक्ति देखने को मिलती है।
इस श्रृंखला की खासियत यह है कि इसमें बिहार की अलग-अलग भाषाओं की मिठास और उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को बरकरार रखने का प्रयास किया गया है। प्रत्येक भाषा के गीत में वहां की लोक परंपरा, बोलचाल, धार्मिक विश्वास और क्षेत्रीय भावनाओं की झलक मिलती है।
छठ व्रतियों को समर्पित होगी गीतमाला
Chhath Geetmala : छठ महापर्व के अवसर पर तैयार की गई इस सात गीतों की विशेष श्रृंखला को कल्पना पटवारी ने छठी मइया के चरणों में अर्पित किया है। इसे छठ व्रतियों और लोक संगीत प्रेमियों के लिए एक विशेष सांस्कृतिक उपहार के रूप में देखा जा रहा है।
इस ‘छठगीतमाला’ का वीडियो शीघ्र ही म्यूजिक बॉक्स के यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया जाएगा। इसके माध्यम से देश-विदेश में रहने वाले बिहारवासियों को अपनी मातृभूमि की लोकभाषाओं और छठ की पारंपरिक संगीत विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
खासकर नई पीढ़ी के लिए यह श्रृंखला महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि आज के दौर में क्षेत्रीय लोकगीतों और पारंपरिक धुनों को सहेजना तथा अगली पीढ़ी तक पहुंचाना एक बड़ी सांस्कृतिक जिम्मेदारी बन गई है। पांच भाषाओं के सात गीतों को एक साथ प्रस्तुत कर कल्पना पटवारी ने इस दिशा में एक सराहनीय प्रयास किया है।
बिहार की सांस्कृतिक विरासत के लिए आगे भी काम करने का संकल्प
Chhath Geetmala : कल्पना पटवारी ने अपनी भावी योजनाओं के बारे में बात करते हुए कहा कि बिहार केवल एक भौगोलिक प्रदेश नहीं, बल्कि पौराणिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासतों से समृद्ध भूमि है। यहां की लोक परंपराओं, सांस्कृतिक चेतना, संगीत, साहित्य और ऐतिहासिक धरोहरों में काम करने की अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि बिहार की गौरवशाली विरासत को सामने लाने के लिए बहुत कुछ किया जा सकता है। जितना संभव होगा, वह बिहार की संस्कृति और लोक परंपराओं के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए अवश्य प्रयास करेंगी।
कल्पना पटवारी की ‘छठगीतमाला’ को इसी सांस्कृतिक संकल्प की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। सात गीतों के माध्यम से बिहार की पांच भाषाओं को एक मंच पर लाने की यह पहल छठ महापर्व की आस्था के साथ-साथ राज्य की बहुभाषी लोक संस्कृति को भी सम्मान देने का प्रयास है।
Author: Nivedita Jha
Nivedita Jha is a graduate from Baba Saheb Bhimrao Ambedkar University. She is also a double post graduate. She has also done journalism. She has five years of experience in journalism.






