HMAI Conference : देशभर के होम्योपैथिक चिकित्सा विशेषज्ञों ने गंभीर बीमारियों के उपचार, रेपर्टरी की भूमिका और चिकित्सकों के अधिकारों पर रखे विचार; दवा कंपनियों ने लगाए स्टॉल
मोतिहारी, 25 अक्टूबर। HMAI Conference :
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मुख्यालय मोतिहारी में रविवार को होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति से जुड़े चिकित्सकों, विशेषज्ञों और चिकित्सा क्षेत्र के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में वैज्ञानिक होम्योपैथिक कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (HMAI) की पूर्वी चंपारण इकाई की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में होम्योपैथिक चिकित्सा के विभिन्न वैज्ञानिक पहलुओं, गंभीर बीमारियों के उपचार में अपनाए जाने वाले दृष्टिकोण और चिकित्सकों की व्यावसायिक जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
स्थानीय होटल के सभागार में आयोजित इस वैज्ञानिक सम्मेलन में ऑटिज्म और मल्टी ऑर्गन फेल्योर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित विषयों पर विशेष परिचर्चा की गई। कार्यक्रम में उपस्थित चिकित्सा विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए और होम्योपैथिक चिकित्सा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार रखे। सम्मेलन का उद्देश्य चिकित्सकों के बीच वैज्ञानिक संवाद को प्रोत्साहित करना, चिकित्सा संबंधी ज्ञान का आदान-प्रदान करना तथा होम्योपैथिक चिकित्सा जगत में आपसी समन्वय को मजबूत करना रहा।
दीप प्रज्वलित कर किया गया सम्मेलन का उद्घाटन
HMAI Conference : वैज्ञानिक होम्योपैथिक कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता HMAI पूर्वी चंपारण इकाई के जिलाध्यक्ष डॉ. एम. एम. प्रसाद ने की। कार्यक्रम का संचालन संगठन के सचिव डॉ. धीरज कुमार ने किया।
सम्मेलन का उद्घाटन सेंट्रल काउंसिल ऑफ होम्योपैथी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रामजी सिंह, कोलकाता से आए मुख्य वक्ता डॉ. विश्वजीत बसु, डॉ. एम. के. साहनी, जिला देशी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. जनार्दन प्रसाद सिंह, HMAI के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार सिंह और राज्य सचिव डॉ. बी. के. तिवारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक तरीके से की गई। इस अवसर पर उपस्थित चिकित्सकों ने होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति के जनक डॉ. सैमुअल हैनिमैन के चित्र पर माल्यार्पण किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद वैज्ञानिक परिचर्चा और वक्ताओं के संबोधन का सिलसिला शुरू हुआ।
सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों से आए चिकित्सकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान होम्योपैथिक चिकित्सा से जुड़े समसामयिक विषयों पर चर्चा के साथ-साथ संगठन की गतिविधियों, चिकित्सकों की भूमिका और चिकित्सा पद्धति के विकास से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
मोतिहारी के होम्योपैथिक चिकित्सकों को बताया रोल मॉडल
HMAI Conference : सम्मेलन के मुख्य अतिथि और सेंट्रल काउंसिल ऑफ होम्योपैथी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रामजी सिंह ने मोतिहारी के होम्योपैथिक चिकित्सकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मोतिहारी के होम्योपैथिक चिकित्सक दूसरे लोगों के लिए रोल मॉडल हैं। उन्होंने इस क्षेत्र को होम्योपैथिक चिकित्सा की दृष्टि से समृद्ध बताते हुए यहां के चिकित्सकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
डॉ. रामजी सिंह ने चिकित्सकों से अपील की कि वे अपनी चिकित्सा पद्धति से संबंधित कानूनी प्रावधानों और वैधानिक दायरे की समुचित जानकारी रखें। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और चिकित्सा कार्य करते समय निर्धारित नियमों एवं कानूनी व्यवस्थाओं को समझना चाहिए।
उनके अनुसार, चिकित्सा के क्षेत्र में काम करने वाले प्रत्येक पेशेवर के लिए अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों की जानकारी आवश्यक है। इससे चिकित्सक अपने कार्यों को अधिक व्यवस्थित तरीके से कर सकते हैं और अपने पेशे से संबंधित वैधानिक व्यवस्थाओं के प्रति सजग रह सकते हैं।
डॉ. रामजी सिंह के संबोधन के दौरान चिकित्सकों की व्यावसायिक भूमिका, चिकित्सा पद्धति से संबंधित कानूनी जानकारी और संगठनात्मक जागरूकता जैसे विषय प्रमुख रहे।

ऑटिज्म और मल्टी ऑर्गन फेल्योर पर मुख्य वक्ता ने रखे विचार
HMAI Conference : सम्मेलन के मुख्य वक्ता कोलकाता से आए डॉ. विश्वजीत बसु ने गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों के उपचार से जुड़े विभिन्न वैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अपने संबोधन में रेपर्टरी की भूमिका को महत्वपूर्ण विषय के रूप में प्रस्तुत किया और होम्योपैथिक चिकित्सा में इसके उपयोग से संबंधित बिंदुओं पर प्रकाश डाला।
डॉ. बसु ने विशेष रूप से ऑटिज्म और मल्टी ऑर्गन फेल्योर से संबंधित मामलों पर परिचर्चा की। उन्होंने इन स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित मरीजों के उपचार के संदर्भ में होम्योपैथिक दृष्टिकोण से जुड़े विषयों को सामने रखा। उनके संबोधन में गंभीर रोगों के मामलों में चिकित्सकीय आकलन, उपलब्ध जानकारी के व्यवस्थित अध्ययन और उपचार से संबंधित वैज्ञानिक पहलुओं पर चर्चा हुई।
इस दौरान उपस्थित चिकित्सकों को गंभीर बीमारियों के मामलों में चिकित्सा संबंधी विषयों को समझने और अपने अनुभवों का आदान-प्रदान करने का अवसर मिला। सम्मेलन में रेपर्टरी सहित होम्योपैथिक चिकित्सा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
हालांकि, ऑटिज्म और मल्टी ऑर्गन फेल्योर जैसी गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों के उपचार में किसी भी चिकित्सा पद्धति की प्रभावशीलता का आकलन वैज्ञानिक प्रमाणों और स्थापित चिकित्सकीय मानकों के आधार पर किया जाना आवश्यक है। ऐसे मामलों में मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखरेख और प्रमाण-आधारित उपचार उपलब्ध कराना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
मोतिहारी में राज्य और राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन कराने पर दिया जोर
HMAI Conference : HMAI के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार सिंह ने पूर्वी चंपारण इकाई के संगठनात्मक कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मोतिहारी की संस्था एक विकसित और सक्रिय संस्था है। यहां संगठन की गतिविधियों को आगे बढ़ाने और बड़े स्तर पर चिकित्सा संबंधी कार्यक्रम आयोजित करने की पर्याप्त संभावनाएं हैं।
डॉ. संजीव कुमार सिंह ने कहा कि मोतिहारी में राज्यस्तरीय और राष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानिक कॉन्फ्रेंस आयोजित की जानी चाहिए। इस तरह के आयोजनों से अलग-अलग क्षेत्रों के चिकित्सकों को एक मंच पर आने, अपने अनुभव साझा करने और चिकित्सा से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श करने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने स्थानीय संस्था की गतिविधियों को आगे बढ़ाने तथा बड़े आयोजनों के माध्यम से चिकित्सकों के बीच संपर्क और समन्वय को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रदेश अध्यक्ष के संबोधन में मोतिहारी की संस्था की उपलब्धियों और भविष्य में यहां बड़े स्तर पर सम्मेलन आयोजित करने की संभावनाओं पर विशेष जोर रहा।
चिकित्सा विशेषज्ञों और संगठन के पदाधिकारियों की रही भागीदारी
HMAI Conference : वैज्ञानिक होम्योपैथिक कॉन्फ्रेंस में पूर्वी चंपारण सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए चिकित्सकों, संगठन के पदाधिकारियों और चिकित्सा जगत से जुड़े लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में डॉ. एन. के. दास, डॉ. यू. पी. श्रीवास्तव, डॉ. राजेश कुमार श्रीवास्तव, डॉ. सरीता श्रीवास्तव, डॉ. सुदेशना बोस, डॉ. अंजली कुमारी और डॉ. अशोक कुमार सहित कई चिकित्सक उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त संगठन के कोषाध्यक्ष डॉ. नवनीत मणि, डॉ. बी. एन. प्रसाद, डॉ. वाई. के. सिंह, डॉ. आर. के. सिंह, डॉ. बी. के. सिंह, डॉ. एम. के. श्रीवास्तव और डॉ. ए. अली ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
सम्मेलन में विश्वनाथ प्रसाद, शेखर कुमार श्रीवास्तव, बिनोद प्रसाद और सुधीर कुमार सहित कई अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में होम्योपैथिक चिकित्सकों की उपस्थिति रही। इसके साथ ही विभिन्न होम्योपैथिक दवा कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी सम्मेलन में भाग लिया।
लगभग ढाई दर्जन दवा कंपनियों ने लगाए आकर्षक स्टॉल
HMAI Conference : सम्मेलन के दौरान होम्योपैथिक दवा कंपनियों की ओर से प्रदर्शनी स्टॉल भी लगाए गए। आयोजन स्थल पर लगभग ढाई दर्जन होम्योपैथिक दवा कंपनियों ने अपने आकर्षक स्टॉल स्थापित किए थे।
इन स्टॉलों के माध्यम से दवा कंपनियों के प्रतिनिधियों को चिकित्सकों और अन्य प्रतिभागियों के साथ संवाद करने का अवसर मिला। सम्मेलन में वैज्ञानिक परिचर्चा के साथ-साथ दवा कंपनियों की भागीदारी ने कार्यक्रम को व्यापक स्वरूप प्रदान किया।
चिकित्सकों और कंपनी प्रतिनिधियों की मौजूदगी से आयोजन में चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों की सहभागिता देखने को मिली। इस तरह सम्मेलन ने चिकित्सकों, संगठन के पदाधिकारियों और फार्मास्युटिकल कंपनियों के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच उपलब्ध कराया।
धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन
HMAI Conference : कार्यक्रम के अंत में प्रो. डॉ. एम. के. ठाकुर ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने सम्मेलन में शामिल मुख्य अतिथियों, वक्ताओं, चिकित्सकों, संगठन के पदाधिकारियों और दवा कंपनियों के प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
रविवार को मोतिहारी में आयोजित इस वैज्ञानिक होम्योपैथिक कॉन्फ्रेंस में चिकित्सा संबंधी विषयों पर चर्चा, संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा और चिकित्सकों के बीच संवाद को प्रमुखता मिली। सम्मेलन के माध्यम से पूर्वी चंपारण की HMAI इकाई ने स्थानीय स्तर पर होम्योपैथिक चिकित्सकों को एक मंच पर एकत्रित किया। साथ ही, प्रदेश अध्यक्ष की ओर से राज्य और राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन आयोजित करने की बात ने भविष्य में बड़े आयोजनों की संभावनाओं को भी सामने रखा।







