निवेदिता झा, नई दिल्ली। Brahma Muhurta Walk : मौसम चाहे ठंड का हो या गर्मी का, सुबह देर तक सोने का मन सभी का करता है। लेकिन आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही इस बात पर सहमत हैं कि सूर्योदय से पहले उठना—यानी ब्रह्म मुहूर्त में जागना—और 20–30 मिनट की हल्की सैर करना, पूरे दिन की ऊर्जा, खुशहाली और बेहतर सेहत का सबसे बड़ा मंत्र है।
प्राण उर्जा सबसे अधिक होती है
Brahma Muhurta Walk : आयुर्वेद मानता है कि ब्रह्म मुहूर्त (सुबह लगभग 3:30 से 5:30 तक) वह समय है जब वातावरण में प्राण-ऊर्जा सबसे अधिक होती है। इस वक्त मन शांत रहता है, स्मरणशक्ति बढ़ती है और मन-मस्तिष्क में एकाग्रता आती है। वहीं आधुनिक विज्ञान इस अवधि को ‘गोल्डन पीरियड’ बताता है, क्योंकि इसी समय मेलाटोनिन (नींद का हार्मोन) कम होने लगता है और कॉर्टिसोल (ऊर्जा देने वाला हार्मोन) प्राकृतिक रूप से बढ़ने लगता है। इसके कारण शरीर सहज रूप से सक्रिय और सतर्क हो जाता है।
डोपामाइन का स्तर बढ़ता है
Brahma Muhurta Walk : ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सैर करने से कई प्रमुख लाभ मिलते हैं— याददाश्त, एकाग्रता और रचनात्मकता में सुधार होता है। दिमाग अधिक तेज़ी से काम करता है। इस दौरान सेरोटोनिन और डोपामाइन का स्तर बढ़ता है, जिससे मूड अच्छा रहता है और सकारात्मकता बनी रहती है।
तनाव में कमी आती है
Brahma Muhurta Walk : यह आदत पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाती है। दिनभर भूख अच्छी लगती है, कब्ज या गैस जैसी समस्याएँ कम होती हैं और शरीर की कोशिकाएँ ऑक्सीजन से भरपूर होकर रिचार्ज होती हैं, जिससे इम्यूनिटी बढ़ती है तथा ऊर्जा स्तर ऊँचा रहता है। तनाव और अवसाद में भी उल्लेखनीय कमी आती है।
दिल की सेहत पर अच्छा असर
Brahma Muhurta Walk : दिल की सेहत पर भी इसका अच्छा असर पड़ता है—ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और भूख के हार्मोन संतुलित होने से वजन घटाने में सहायता मिलती है। त्वचा पर स्वाभाविक निखार आता है और दाग-धब्बे कम होते हैं।
कम होता है डिप्रेशन का खतरा
Brahma Muhurta Walk : कई शोधों में यह सिद्ध हुआ है कि जल्दी उठने वाले लोगों में डायबिटीज, हृदय रोग और डिप्रेशन का खतरा कम होता है। इस समय वातावरण में ऑक्सीजन की शुद्धता सबसे अधिक होती है, जिससे फेफड़े पूरी क्षमता के साथ काम करते हैं और सांस गहरी व पूर्ण होती है। सुबह की हल्की धूप से बिना किसी नुकसान के विटामिन D मिलता है, जिससे हड्डियाँ मजबूत होती हैं। आयुर्वेद के अनुसार इस समय उठने से वात-पित्त दोष संतुलित होते हैं, जिससे जोड़ों का दर्द और मानसिक तनाव भी घटता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि ब्रह्म मुहूर्त में नियमित रूप से उठकर 20–30 मिनट की सैर की आदत डाल ली जाए तो शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक पूरी तरह व्यवस्थित हो जाती है।
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Author: Nivedita Jha
Nivedita Jha is a graduate from Baba Saheb Bhimrao Ambedkar University. She is also a double post graduate. She has also done journalism. She has five years of experience in journalism.







