ओम वर्मा, पटना। Bihar: चुनावी रणनीतिकार कह कर प्रशांत किशोर को ‘गरियाने’ वाले राजनेताओं को बिहार विधानसभा के परिणाम चौंका सकते हैं। जनता के जिन मुद्दों को सत्ता पक्ष के राजनीतिक दलों ने कभी तरजीह नहीं दी, उसे प्रशांत किशोर उठा रहे हैं। यही अंदाज, उन्हें जनता के करीब ला रहा है। धीरे— धीरे गांव—देहात में प्रशांत किशोर के पक्ष में माहौल बनने लगा है। चुनावी चर्चाएं हो रही हैं। सुबह में नुक्कड़ों पर चाय की चुस्कियों के साथ प्रशांत किशोर और जनसुराज की राजनीतिक गतिविधियों पर विमर्श हो रहा है। वो भी ठेठ भोजपुरी अंदाज में। दरअसल प्रशांत किशोर ने उन मुद्दों और समस्याओं को उठा लिया है, जिनसे जनता काफी परेशान है।
अफसरशाही का मुद्दा
Bihar: इसमें कोई शक नहीं कि बिहार में अफसरशाही हावी हो चुका है। अगर आप कोई भी काम कराने सरकारी दफ्तरों में जाते हैं तो अफसरशाही का बोलबाला है। उनके बिना जनता का कोई भी काम संभव नहीं है। नियम तो तय समय में सभी काम करने का है, लेकिन आपका काम तभी होगा जब सरकारी अफसर चाहेंगे। काम भी उन्हीं के हिसाब से होगा। जनता की शिकायत है कि ‘सेवा शुल्क’ दिए बिना उनके काम नहीं होते हैं। व्यर्थ की परेशानी होती है। ‘मनमाफिक सुविधा शुल्क’ नहीं दिया तो काम होगा कि नहीं, इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। उपर भी शायद ही कोई सुने। प्रशांत किशोर ने जनता के इस मुद्दे को उठा कर समर्थन अपने नाम कर लिया है। यही वजह है कि वह अपने भाषणों में अफसरशाही का मुद्दा जोरशोर से उठाते हैं। जनता उनकी सुनती है।
पुलिस प्रताड़ना भी बड़ा मुद्दा
Bihar: बिहार में पुलिस प्रताड़ना बड़ा मुद्दा है। ऐसे कई मामले हुए हैं, जिसमें जनता को पुलिस प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा है। ऐसे मामलों में किसी भी बड़े अधिकारी के यहां शायद ही सुनवाई हो। प्रशांत किशोर की जनसुराज ने इस मामले को भी लपक लिया है।
पत्रकारों का बड़ा वर्ग दे रहा साथ
Bihar: बिहार में पत्रकार उत्पीड़न का मामला बढ़ता ही जा रहा है। मनमाफिक खबर नहीं होने पर पत्रकारों को अक्सर उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है। पत्रकारों का मनमाफिक खबर लिखने के लिए बाध्य किया जाता है। सबसे बड़ी समस्या यूट्यूबरों को हो रही है। छोटे छोटे यूट्यूबरों को पुलिस की ओर से लगातार तंग किए जाने की खबरें सामने आती रही हैं। यह स्थिति तब है जब सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट है कि किसी भी पत्रकार पर खबरों के प्रसारण और प्रकाशन को लेकर मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता। इसके बाद भी पत्रकारों को प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। ऐसे में इन यूट्यूबरों ने जनसुराज से उम्मीद जगी है।
शिक्षा और पलायन
Bihar: बिहार में शिक्षा और नौकरी के लिए पलायन बड़ा मुद्दा बन गया है। बिहार में रोजगार के साधन नहीं होने की वजह से यहां के युवा रोजगार के अन्य राज्यों में जाकर जलालत का जीवन जी रहे हैं। अन्य राज्यों में मेहनत करने के बाद भी उन्हें उचित मेहनताना नहीं मिल रहा है। सभी राजनीतिक दल ‘मैन पावर’ की तो चर्चा करते हैं लेकिन बिहार के युवाओं को अपने ही राज्य में कैसे रोजगार मिलेगा, इसके लिए ठोस प्रयास नहीं करते। प्रशांत किशोर ने इस मुद्दे को उठाकर बहुत बड़ा समर्थन अपने नाम कर लिया है।
इन मुद्दों का असर अगर चुनाव परिणाम में देखने को मिला तो बिहार का राजनीतिक परिदृश्य अलग होगा। कई राजनीतिक दल इन बातों को समझ रहे हैं, यही वजह है कि वे प्रशांत किशोर का कारवां रोकने के लिए प्रयास कर रहे हैं।







