ओम वर्मा, नयी दिल्ली। Bihar Elections : एनडीए में सबकुछ ठीक नहीं है। सीट बंटवारे का जो फार्मूला सामने आ रहा है, उसमें चिराग पासवान सहज नहीं दिखाई दे रहे हैं। हो सकता है कि बिहार को एक और गठबंधन देखने को मिल जाए। इस बात के कयास लगने शुरू हो गए हैं। दूसरी ओर जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर भी ऐसे दल की तलाश में हैं, जिसका एक वोटबैंक हो। साथ ही उसमें बिहार के लिए कुछ करने का जज्बा हो। इस मामले में प्रशांत किशोर और चिराग पासवान की ट्यूनिंग सही बैठ सकती है।
सिर्फ 25 सीट पर तैयार नहीं चिराग पासवान
Bihar Elections : एनडीए में सीट शेयरिंग पर अंतिम चर्चा चल रही है। बताया जा रहा है कि एनडीए के महत्वपूर्ण घटक दल लोजपा रामविलास को सिर्फ 25 सीटें दी जा रही हैं। जबकि चिराग पासवान 45—54 सीटों की मांग कर रहे हैं। तर्क दिया जा रहा है कि पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में चिराग पासवान को सिर्फ पांच सीटें दी गई थीं।
इन सभी पांचों सीटों पर पार्टी ने जीत दर्ज की। चिराग पासवान का स्ट्राइक रेट ज्यादा है। जनता में छवि अच्छी है। लिहाजा, लोजपा रामविलास पार्टी को अधिक से अधिक सीटें मिलनी चाहिए। वैसे भी चिराग पासवान को भविष्य में सीएम मैटर के तौर पर देखा जा रहा है। बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट का नारा भी उन्होंने बुलंद किया है। अगर सीटों को लेकर चिराग पासवान खुद को सहज महसूस नहीं करते हैं तो वह जनसुराज के साथ गठबंधन कर सकते हैं, ऐसे कयास राजनीतिक गलियारों में लगाए जा रहे हैं।
आसान नहीं जनसुराज से गठबंधन
Bihar Elections : सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि जनसुराज के साथ गठबंधन और एनडीए से बाहर आना चिराग पासवान के लिए आसान नहीं होगा। यह सत्य है कि बिहार में चिराग पासवान की एक अलग छवि है, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में सभी पांचों कैंडिडेट की इसलिए भी जीत मिली थी कि इसमें भाजपा और जदयू सहित एनडीए के सभी घटक दलों के वोटबैंक थे। गठबंधन में शामिल सभी दलों के वोट चिराग पासवान की पार्टी को ट्रांसफर हुए थे। ऐसे में जनसुराज जैसी पार्टी, जो पहली बार चुनाव मैदान में है, उससे गठबंधन कैसे किया जा सकता है। जनसुराज के कैंडिडेट किस सीट पर कितना प्रभावी हैं, जनप्रभाव कितना है, कितनी सीटों पर उनकी धमक रहेगी और कितनी सीटें जीतने की स्थिति में होंगे, यह स्पष्ट नहीं है। सो, जनसुराज के साथ चिराग पासवान का गठबंधन आत्मघाती भी हो सकता है।
तो जनता को मिलेंगे विकल्प
Bihar Elections : बिहार के लोगों के लिए सकारात्मक तथ्य यह है कि अगर जनसुराज और लोजपा रामविलास के बीच गठबंधन होता है तो वोटरों को नए विकल्प मिलेंगे। जनसुराज ठोकबजा कर कैंडिडेट को खड़ा करेगा। ऐसे कैंडिडेट को टिकट में तरजीह दी जाएगी, जो जनता का भरोसा जीत सके। नयी पार्टी होने की वजह से यह कहना तो मुश्किल है कि अभी वोट बैंक क्या होगा, लेकिन बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर की हनक तो बन ही चुकी है। जिस प्रकार भ्रष्टाचार पर प्रशांत किशोर नेताओं को घेर रहे हैं, उससे जनता में उम्मीद बंधी है।
भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा
बताते चलें कि बिहार में भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा है। सरकारी विभाग अपनी अलग डफली बजा रहे हैं। नीतीश कुमार का नौकरशाहों पर से नियंत्रण कम हो गया है, जबकि लोकतंत्र में राज्य में चुनी हुई सरकार सर्वोपरि है। लेकिन हो रहा है इसके उलट।
लोगों को अपने सरकारी काम कराने में दिक्कत हो रही है। कई सरकारी कर्मचारी घूस मांगते हैं। पुलिस से संबंधित काम है तो कुछ पुलिस वाले भी घूस मांगते हैं। पुलिस वाले तो फरियादी को डपट भी देते हैं। जनप्रतिनिधि इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करते। प्रदेश में शराबबंदी है। फिर भी शराब की बिक्री हो रही है। अगर शराब प्रतिबंधित है तो बिहार में शराब आती कैसे है, इस बारे में संबंधित थाने को जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए। ऐसे हालात में जब प्रशांत किशोर किसी बात पर अफसरों की क्लास लगाते हैं और उन्हें कानून समझाते हैं तो यह लोगों को रास आता है।
अब देखना है कि बिहार के लोगों को जनसुराज और लोजपा रामविलास का नया गठबंधन बनेगा या एनडीए जो सीटें चिराग पासवान को देगी, उसी में वे काम चलाएंगे।
Author: ohm verma
Om Verma (ohm verma) is a graduate from Motilal Nehru College of Delhi University. He has done Journalism and Mass Communication from Kurukshetra University. He has worked in Hari Bhoomi newspaper published from Haryana. After this, he worked for Dainik Jagran as Chief Sub Editor for a long time. He held many important roles in the Noida office. During this time, he participated in debates on many national TV channels.







