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Bhiwandi Building Collapse : भिवंडी में मौत बनकर ढही चार मंजिला इमारत: 9 लोगों की दर्दनाक मौत

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मुंबई, 31 जुलाई । Bhiwandi Building Collapse :  महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी क्षेत्र में गुरुवार देर रात एक भीषण हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। बालाजी नगर स्थित चार मंजिला कोहिनूर इमारत का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर पड़ा। इस दुर्घटना में अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका के चलते राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और स्थानीय लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू कर दिया।

रात 11:30 बजे आई आफत, देखते ही देखते मलबे में बदली इमारत

अधिकारियों के अनुसार यह हादसा गुरुवार रात करीब 11:30 बजे हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि तेज आवाज के साथ इमारत का एक हिस्सा अचानक ढह गया। कुछ ही क्षणों में चारों ओर धूल का गुबार फैल गया और लोगों की चीख-पुकार गूंजने लगी। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस, दमकल विभाग और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।

एनडीआरएफ के जवान भारी मशीनों और आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबा हटाने में जुटे हैं। अब तक मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला जा चुका है, जबकि मृतकों के शव भी बरामद किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक यह पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि मलबे में कोई व्यक्ति फंसा नहीं है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जताया शोक, सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की और कहा कि यह हादसा अत्यंत पीड़ादायक है।

मुख्यमंत्री ने नगर आयुक्त को तत्काल इस मामले में एफआईआर दर्ज करने और यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि घायलों का इलाज जारी है और सरकार उनकी हर संभव सहायता करेगी। मुख्यमंत्री ने सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा— हर संभव मदद पहुंचाई जाएगी

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है।

शिंदे ने बताया कि उन्होंने स्वयं भिवंडी नगर आयुक्त अनमोल सागर और ठाणे कलेक्टर श्रीकृष्ण पंचाल से बातचीत कर राहत एवं बचाव अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की है।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि घायल लोगों का उपचार भिवंडी के एमजीएम अस्पताल में किया जा रहा है। यदि किसी मरीज को बेहतर चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता होगी तो उसे निजी अस्पताल में भी भर्ती कराया जाएगा। सरकार इलाज में किसी प्रकार की कमी नहीं आने देगी।

सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए प्रभावित परिवार

हादसे के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इमारत में रहने वाले सभी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी रहने और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है ताकि उन्हें किसी प्रकार की अतिरिक्त परेशानी का सामना न करना पड़े।

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने यह भी स्पष्ट किया कि हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया गया है।

पहले ही घोषित हो चुकी थी खतरनाक इमारत

इस हादसे का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि स्थानीय नगर निगम ने पहले ही इस इमारत को खतरनाक घोषित किया था। जानकारी के अनुसार कोहिनूर इमारत में कुल 48 कमरे थे और प्रत्येक मंजिल पर 12 कमरे बने हुए थे।

बताया जा रहा है कि दुर्घटना के समय इमारत में मरम्मत का कार्य भी चल रहा था। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह क्या थी, इसका पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा। प्रशासन अब इस बात की भी जांच करेगा कि खतरनाक घोषित किए जाने के बावजूद इमारत में लोग कैसे रह रहे थे और सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया।

राहत और बचाव अभियान पर टिकी सबकी निगाहें

घटना के बाद से प्रशासन, पुलिस, दमकल विभाग और एनडीआरएफ की टीमें लगातार राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हुई हैं। भारी मशीनों के साथ-साथ मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए विशेष उपकरणों का भी उपयोग किया जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि मलबे के नीचे अब भी कुछ लोगों के दबे होने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में अभियान को पूरी सावधानी के साथ चलाया जा रहा है ताकि किसी भी संभावित जीवित व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

लापरवाही पर उठे सवाल, जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी

हादसे के बाद कई सवाल भी उठने लगे हैं। यदि इमारत पहले से जर्जर और खतरनाक घोषित थी तो वहां रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर क्यों नहीं भेजा गया? मरम्मत कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन हुआ या नहीं? क्या संबंधित विभागों ने अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन किया?

इन सभी पहलुओं की जांच की जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों या जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री द्वारा एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

शोक में डूबा भिवंडी, न्याय और सुरक्षा की उम्मीद

भिवंडी का यह हादसा एक बार फिर जर्जर इमारतों की समस्या और शहरी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक पल में कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया, जबकि अनेक लोग अब भी अपने परिजनों की सलामती की उम्मीद लगाए राहत कार्य की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।

फिलहाल प्रशासन की पहली प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना, घायलों का बेहतर उपचार सुनिश्चित करना और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराना है। वहीं, पूरे राज्य की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं

jahanvi singh
Author: jahanvi singh

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