Bengal Voter Deletion : चुनावी तैयारी के बीच बड़ा कदम
कोलकाता, 7 अप्रैल। Bengal Voter Deletion : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआइआर) के तहत चल रही न्यायिक निर्णय प्रक्रिया सोमवार की आधी रात के बाद औपचारिक रूप से समाप्त हो गई। इस प्रक्रिया के पूरा होने के साथ ही भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआइ) ने अनुमान जताया है कि राज्य में हटाए गए मतदाताओं की कुल संख्या अब 90 लाख से भी अधिक हो चुकी है। यह संख्या राज्य की चुनावी व्यवस्था और मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए चलाए गए व्यापक अभियान का परिणाम मानी जा रही है।
बढ़ सकते हैं आंकड़े
Bengal Voter Deletion : हालांकि, निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अंतिम आंकड़ा अभी पूरी तरह स्थिर नहीं है। न्यायिक निर्णय के लिए भेजे गए कुल मामलों में से कुछ मामलों में अब भी न्यायिक अधिकारियों द्वारा ई-हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी की जानी बाकी है। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होगी, हटाए गए मतदाताओं की कुल संख्या में थोड़ी और वृद्धि हो सकती है। इस प्रकार, आने वाले दिनों में यह आंकड़ा मामूली रूप से बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
कुछ मामलों में प्रक्रिया लंबित
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, न्यायिक निर्णय के लिए कुल 60,06,675 मामलों को भेजा गया था। इनमें से 59,84,512 मामलों में न्यायिक प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और संबंधित अधिकारियों द्वारा ई-हस्ताक्षर भी कर दिए गए हैं। यह दर्शाता है कि अधिकांश मामलों का निपटारा कर लिया गया है और केवल कुछ ही मामलों में प्रक्रिया लंबित है।
Bengal Voter Deletion : इन 59,84,512 मामलों में से 27,16,393 मामलों को न्यायिक अधिकारियों ने “बहिष्कृत” (Excludable) श्रेणी में रखा है, जिसका सीधा अर्थ है कि इन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने योग्य पाए गए। इस आंकड़े को पहले से हटाए गए नामों के साथ जोड़ने पर पश्चिम बंगाल में अब तक कुल 90,83,345 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा चुके हैं। यह संख्या राज्य के कुल मतदाताओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
न्यायिक प्रक्रिया के बाद आया यह परिणाम
यदि हम इस पूरी प्रक्रिया के शुरुआती चरणों पर नजर डालें, तो पिछले वर्ष नवंबर में जब एसआइआर की अधिसूचना जारी हुई थी, उस समय राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 7,66,37,529 थी। इसके बाद दिसंबर में प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में 58,20,899 नाम हटा दिए गए थे। आगे चलकर 28 फरवरी को जारी अंतिम मतदाता सूची में यह संख्या बढ़कर 63,66,952 हो गई। अब न्यायिक प्रक्रिया के बाद यह आंकड़ा 90 लाख के पार पहुंच गया है, जो इस पूरी कवायद की व्यापकता को दर्शाता है।
Bengal Voter Deletion : सीईओ कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी देते हुए कहा कि न्यायिक जांच के दौरान 27,16,393 मामलों को बहिष्कृत पाया गया, जिसके बाद कुल हटाए गए मतदाताओं की संख्या 90,83,345 तक पहुंच गई है। उन्होंने यह भी बताया कि अभी 22,163 मामलों में ई-हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। जैसे ही इन मामलों का निपटारा हो जाएगा, हटाए गए मतदाताओं की संख्या में और वृद्धि संभव है।
अपील करने का दिया जाएगा अवसर
Bengal Voter Deletion : इसके साथ ही निर्वाचन आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि जिन मतदाताओं के नाम “बहिष्करणीय” घोषित किए गए हैं, उन्हें अपील करने का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए राज्य में 19 अपीलीय न्यायाधिकरण स्थापित किए गए हैं, जहां प्रभावित व्यक्ति अपने मामले में पुनर्विचार के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह कदम प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
मुर्शिदाबाद जिले में सर्वाधिक संख्या
Bengal Voter Deletion : जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सबसे अधिक “छूट योग्य” या बहिष्कृत मामलों की संख्या अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले से सामने आई है, जहां कुल 4,55,137 नाम हटाए गए। इसके बाद उत्तर 24 परगना जिले में 3,25,666 नाम और मालदा जिले में 2,39,375 नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इन जिलों में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा जारी है।
दो चरणों में होंगे चुनाव
अंत में, चुनावी कार्यक्रम की बात करें तो पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में आयोजित किए जाएंगे। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होगा, जिसमें 152 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे। वहीं दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को शेष 142 सीटों पर कराया जाएगा। पूरे राज्य के चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे, जिसके बाद नई सरकार के गठन का रास्ता साफ होगा।







