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Ayush Awareness Program : मोतिहारी में आयुष की पाठशाला में बच्चों ने सीखे सेहत के मंत्र, योग-प्राणायाम का भी कराया अभ्यास

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Ayush Awareness Program Promotes Yoga & Healthy Living

सिकरहना, मोतिहारी। Ayush Awareness Program


राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत राज्य आयुष समिति, बिहार के दिशा-निर्देश एवं जिला देशी चिकित्सा पदाधिकारी के मार्गदर्शन में सिकरहना प्रखंड क्षेत्र में विद्यार्थियों के बीच आयुर्वेद, योग और स्वस्थ जीवनशैली को लेकर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूली बच्चों को भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति, योग, प्राणायाम, संतुलित खान-पान, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व से परिचित कराना था।

यह जागरूकता कार्यक्रम चिरैया प्रखंड क्षेत्र के उच्च माध्यमिक विद्यालय खड़तरी पश्चिमी के परिसर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। इस दौरान विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने, मौसमी बीमारियों से बचाव के उपाय अपनाने तथा योग और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आयुष चिकित्सा पदाधिकारियों ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन के लिए केवल बीमारी होने के बाद उपचार कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बीमारी से बचाव के लिए पहले से ही सावधानी बरतना भी जरूरी है। नियमित दिनचर्या, पौष्टिक एवं संतुलित भोजन, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि, स्वच्छता और मानसिक एकाग्रता को स्वस्थ जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।

बच्चों को दैनिक जीवन में आयुर्वेद के महत्व की जानकारी

Ayush Awareness Program : कार्यक्रम में जिला देशी चिकित्सा पदाधिकारी जनार्दन प्रसाद सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए दैनिक जीवन में आयुर्वेद की उपयोगिता और महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बच्चों को बताया कि आयुर्वेद केवल बीमारियों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ व्यक्ति को स्वस्थ बनाए रखने और जीवनशैली को संतुलित रखने पर भी विशेष जोर देता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को अपने दैनिक जीवन में नियमित दिनचर्या अपनाने, शरीर की स्वच्छता बनाए रखने, उचित खान-पान करने तथा मौसम के अनुसार अपनी जीवनशैली में आवश्यक बदलाव करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी स्वस्थ आदतों को जीवन का हिस्सा बनाकर कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से बचाव किया जा सकता है।

बच्चों को यह भी समझाया गया कि पढ़ाई के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। लंबे समय तक लगातार पढ़ाई या मोबाइल एवं अन्य डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल के बीच शरीर को सक्रिय रखना, पर्याप्त आराम लेना और मानसिक तनाव को कम करना भी स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा है।

Ayush Awareness Program Promotes Yoga & Healthy Living

मौसमी बीमारियों से बचाव के उपाय बताए

कार्यक्रम में वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सा पदाधिकारी केएएल प्रसाद एवं यूनानी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सरवत परवीन ने भी विद्यार्थियों को स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी।

विशेषज्ञों ने बच्चों को बदलते मौसम के दौरान होने वाली विभिन्न प्रकार की मौसमी बीमारियों से बचाव के उपायों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मौसम में बदलाव के दौरान खान-पान और साफ-सफाई को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखना, साफ पानी पीना और व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।

विद्यार्थियों को संतुलित आहार के बारे में भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि भोजन में आवश्यक पोषक तत्वों का संतुलन होना चाहिए। बच्चों को ताजे और पौष्टिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देने तथा अस्वास्थ्यकर खान-पान की आदतों से बचने के लिए जागरूक किया गया।

योग और प्राणायाम का कराया गया अभ्यास

Ayush Awareness Program :  आयुष जागरूकता कार्यक्रम में विद्यार्थियों को केवल स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि उन्हें योग और प्राणायाम का अभ्यास भी कराया गया। बच्चों को बताया गया कि नियमित योगाभ्यास शरीर को सक्रिय रखने के साथ-साथ मानसिक एकाग्रता और तनाव प्रबंधन में भी सहायक हो सकता है।

विद्यार्थियों को योग की विभिन्न सरल गतिविधियों और प्राणायाम के अभ्यास के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने प्रशिक्षकों एवं विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में योगाभ्यास किया।

वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में विद्यार्थियों पर पढ़ाई, प्रतियोगिता और अन्य गतिविधियों का दबाव रहता है। ऐसे में नियमित योग और प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करने से शारीरिक सक्रियता के साथ मानसिक एकाग्रता विकसित करने में मदद मिल सकती है।

विशेषज्ञों ने बच्चों से अपील की कि वे योग को केवल किसी विशेष अवसर या कार्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपनी नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाने का प्रयास करें।

घरेलू स्तर पर औषधीय जड़ी-बूटियों के उपयोग की जानकारी

Ayush Awareness Program :  कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को घरेलू स्तर पर उपयोग की जाने वाली औषधीय जड़ी-बूटियों के बारे में भी जानकारी दी गई। आयुष पद्धति में विभिन्न औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों के पारंपरिक उपयोग के बारे में बच्चों को परिचित कराया गया।

वक्ताओं ने बताया कि भारतीय परंपरा में कई औषधीय पौधों का उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है। हालांकि, किसी भी औषधीय पदार्थ या जड़ी-बूटी का उपयोग उसकी प्रकृति, मात्रा और व्यक्ति की स्थिति को ध्यान में रखकर उचित चिकित्सकीय सलाह के साथ किया जाना चाहिए।

विद्यार्थियों को अपने आसपास पाए जाने वाले औषधीय पौधों और उनके पारंपरिक महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य बच्चों को आयुर्वेद और भारतीय चिकित्सा परंपरा के प्रति जागरूक करना तथा प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझाना था।

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स्वास्थ्य, स्वच्छता और स्वस्थ आदतों के प्रति जागरूकता

Ayush Awareness Program :  कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बच्चों में बचपन से ही स्वस्थ आदतों का विकास करना आवश्यक है। यदि विद्यार्थी कम उम्र से ही साफ-सफाई, संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, योग, पर्याप्त नींद और व्यक्तिगत स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहते हैं तो इसका सकारात्मक प्रभाव उनके आगे के जीवन पर भी पड़ सकता है।

बच्चों को हाथों की स्वच्छता, आसपास साफ-सफाई रखने, स्वच्छ भोजन और पानी का सेवन करने तथा अपने स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई।

वक्ताओं ने कहा कि आयुष जागरूकता जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार बनाना और उन्हें ऐसी जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है, जिससे वे शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकें।

विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक लिया हिस्सा

Ayush Awareness Program :  कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के छात्र-छात्राओं में काफी उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में बच्चों ने कार्यक्रम में भाग लिया और विशेषज्ञों द्वारा दी जा रही स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को ध्यानपूर्वक सुना।

योग और प्राणायाम के अभ्यास के दौरान भी विद्यार्थियों ने सक्रियता दिखाई। बच्चों को स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर सवाल पूछने और विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त करने का अवसर भी मिला।

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ जीवन केवल बीमारी से मुक्त रहने का नाम नहीं है, बल्कि इसके लिए शरीर, मन, खान-पान, स्वच्छता और दैनिक दिनचर्या के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।

पर्यावरण संरक्षण का भी दिया गया संदेश

Ayush Awareness Program :  कार्यक्रम के अंत में स्वास्थ्य जागरूकता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। विद्यालय परिसर में पौधारोपण कर विद्यार्थियों और शिक्षकों को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया।

वक्ताओं ने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण भी आवश्यक है। हवा, पानी और आसपास का वातावरण प्रदूषण मुक्त रहेगा तो इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। इसलिए स्वास्थ्य जागरूकता के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

पौधारोपण के माध्यम से बच्चों को पेड़-पौधों के महत्व के बारे में भी बताया गया। विद्यार्थियों को अधिक से अधिक पौधे लगाने और लगाए गए पौधों की देखभाल करने के लिए प्रेरित किया गया।

शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन की रही सहभागिता

Ayush Awareness Program :  आयुष जागरूकता कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाध्यापक अरुण कुमार सुमन सहित शिक्षक एवं विद्यालय के अन्य कर्मी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में साहेब बैठा, शिक्षक आलोक कुमार, टुन्नू कुमार, अखिलेश्वर कुमार, रश्मि कुमारी, प्रवीण कुमार, शिवम श्री, धीरज कुमार एवं मनोज कुमार ठाकुर सहित अन्य शिक्षक भी मौजूद थे।

विद्यालय परिवार की ओर से कार्यक्रम के आयोजन में सहयोग किया गया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों को अपनी दिनचर्या में अपनाने तथा योग, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित किया।

आयुष जागरूकता के माध्यम से स्वस्थ समाज का संदेश

Ayush Awareness Program :  राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत आयोजित इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य आयुष चिकित्सा पद्धतियों और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति आम लोगों, विशेषकर बच्चों एवं युवाओं में जागरूकता बढ़ाना है। विद्यालय स्तर पर ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को कम उम्र से ही स्वास्थ्य के प्रति सजग बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

कार्यक्रम में आयुर्वेद, योग, प्राणायाम, संतुलित खान-पान, मौसमी बीमारियों से बचाव, स्वच्छता, औषधीय जड़ी-बूटियों और पर्यावरण संरक्षण जैसे विभिन्न विषयों को एक साथ जोड़कर विद्यार्थियों को जानकारी दी गई।

वक्ताओं ने कहा कि स्वस्थ समाज की नींव स्वस्थ बच्चों और स्वस्थ युवाओं से तैयार होती है। इसलिए विद्यार्थियों को स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी देना और उन्हें स्वस्थ आदतों के प्रति जागरूक करना बेहद महत्वपूर्ण है।

चिरैया प्रखंड के उच्च माध्यमिक विद्यालय खड़तरी पश्चिमी में आयोजित इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य और शिक्षा को एक साथ जोड़ते हुए बच्चों को यह संदेश दिया गया कि योग, संतुलित खान-पान, स्वच्छता, नियमित दिनचर्या, पर्यावरण संरक्षण और सकारात्मक जीवनशैली स्वस्थ जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं। कार्यक्रम का समापन विद्यालय परिसर में पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के साथ हुआ।

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