रायपुर/सुकमा/बीजापुर, 3 जनवरी। Anti Maoist Operation : छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने इस साल की अब तक की सबसे बड़ी नक्सल विरोधी कार्रवाई को अंजाम दिया है। सुकमा और बीजापुर जिलों में हुई दो अलग-अलग मुठभेड़ों में 14 से अधिक माओवादियों के मारे जाने की खबर है।
Anti Maoist Operation : चल रहा था सर्च आपरेशन
Anti Maoist Operation : मुख्य मुठभेड़ सुकमा जिले के किस्ताराम इलाके के घने जंगलों में हुई, जहां खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चला रही थी। इसी दौरान माओवादियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद दोनों ओर से कई घंटों तक भीषण गोलीबारी होती रही।
डीवीसीएम से जुड़े थे अधिकतर माओवादी
Anti Maoist Operation : पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सुकमा और बीजापुर दोनों इलाकों में मारे गए माओवादियों की संख्या 14 से अधिक बताई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि इनमें से अधिकांश माओवादी दरभा वैली कमेटी (डीवीसीएम) से जुड़े हुए थे, जो माओवादी संगठन की एक अहम इकाई मानी जाती है।
माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका
Anti Maoist Operation : बताया जा रहा है कि मारे गए माओवादियों में वह नक्सली कमांडर भी शामिल है, जिसका नाम कोंटा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आकाश गिरपुंजे की हत्या के मामले में सामने आया था। इससे माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
भारी मात्रा में हथियार बरामद
Anti Maoist Operation : मुठभेड़ स्थल से एके-47 और इंसास राइफल सहित भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक बरामद किए गए हैं। फिलहाल ऑपरेशन जारी है और सुरक्षाबल पूरे इलाके में सघन तलाशी अभियान चला रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि मारे गए माओवादियों की सही संख्या और पहचान ऑपरेशन पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी, क्योंकि क्षेत्र बेहद दुर्गम और जंगलों से घिरा हुआ है। सुरक्षा कारणों से मुठभेड़ के स्थान और तैनात बलों की संख्या जैसी संवेदनशील जानकारियां फिलहाल साझा नहीं की जा रही हैं।
आपरेशन निर्णायक चरण में
Anti Maoist Operation : एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि ऑपरेशन निर्णायक चरण में है और जवानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीमित जानकारी ही सार्वजनिक की जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अभियान समाप्त होने के बाद पूरी जानकारी मीडिया के साथ साझा की जाएगी।
लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों, आत्मसमर्पण की घटनाओं और विकास कार्यों के चलते वामपंथी उग्रवाद में उल्लेखनीय कमी आई है। छत्तीसगढ़ और झारखंड समेत प्रभावित जिलों की संख्या अब 20 से भी कम रह गई है।
सरकार का लक्ष्य सुरक्षा शिविरों, बुनियादी ढांचे के विकास और कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से 31 मार्च तक वामपंथी उग्रवाद को पूरी तरह समाप्त करना है। हालांकि, आदिवासी इलाकों में विस्थापन और असमानता जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं, जिनका दीर्घकालिक समाधान आवश्यक माना जा रहा है।







