नई दिल्ली, 23 अप्रैल । High Voter Turnout : पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए विधानसभा चुनावों के पहले चरण में इस बार मतदान को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें लगी रहीं और पूरे दिन मतदाताओं में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का जोश साफ दिखाई दिया। चुनाव आयोग द्वारा शाम 5 बजे तक जारी किए गए अनुमानित आंकड़ों के अनुसार दोनों राज्यों में रिकॉर्ड स्तर पर मतदान दर्ज किया गया है। तमिलनाडु में जहां लगभग 82.24 प्रतिशत मतदान हुआ, वहीं पश्चिम बंगाल के पहले चरण में यह आंकड़ा करीब 89.93 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो इस चुनाव को और भी महत्वपूर्ण बना देता है।
पश्चिम बंगाल में ग्रामीण इलाकों में जबरदस्त भागीदारी
High Voter Turnout : पश्चिम बंगाल के पहले चरण के चुनाव में मतदाताओं ने जिस उत्साह के साथ भाग लिया, उसने पिछले कई चुनावों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। राज्य के 16 जिलों की 152 विधानसभा सीटों पर मतदान संपन्न हुआ। चुनाव आयोग के अनुसार शाम 5 बजे तक कुल मतदान प्रतिशत लगभग 89.93 दर्ज किया गया, जो बेहद ऊंचा आंकड़ा माना जा रहा है।
इन जिलों में रहा इतना मतदान
High Voter Turnout : जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो कई जिलों में मतदान 90 प्रतिशत से भी ऊपर पहुंच गया। दक्षिण दिनाजपुर में सबसे अधिक 93.12 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि कूचबिहार में 92.07 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इसी तरह बीरभूम में 91.55 प्रतिशत, जलपाईगुड़ी में 91.20 प्रतिशत और मुर्शिदाबाद में 91.36 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
झारग्राम में 90.53 प्रतिशत और पश्चिम मेदिनीपुर में 90.70 प्रतिशत मतदान ने भी चुनावी उत्साह को स्पष्ट किया। उत्तर दिनाजपुर में 89.74 प्रतिशत, मालदा में 89.56 प्रतिशत और बांकुड़ा में 89.91 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। वहीं अलीपुरद्वार में 88.74 प्रतिशत, पूर्व मेदिनीपुर में 88.55 प्रतिशत और पुरुलिया में 87.35 प्रतिशत मतदान रहा।
उत्तर बंगाल के दार्जिलिंग में 86.49 प्रतिशत और कलिम्पोंग में 81.98 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। पश्चिम बर्धमान में भी 86.89 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया। इन आंकड़ों से साफ है कि ग्रामीण इलाकों में मतदान प्रतिशत शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक रहा।
तमिलनाडु में भी मजबूत मतदान रुझान
तमिलनाडु में भी विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं में काफी उत्साह देखा गया। राज्य की सभी 234 सीटों पर एक ही चरण में मतदान संपन्न हुआ। चुनाव आयोग के अनुसार शाम 5 बजे तक राज्य में कुल मतदान प्रतिशत लगभग 82.24 दर्ज किया गया।
जिलावार आंकड़ों के अनुसार तमिलनाडु में कई जिलों में मतदान 85 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गया। इरोड में 87.59 प्रतिशत, धर्मपुरी में 87.28 प्रतिशत, नमक्कल में 87.63 प्रतिशत और करूर में 89.32 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो राज्य में सबसे अधिक में से एक रहा।
High Voter Turnout : तिरुपत्तूर में 85.28 प्रतिशत, तिरुवन्नामलाई में 85.59 प्रतिशत, वेल्लोर में 85.06 प्रतिशत और विलुप्पुरम में 85.45 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। वहीं सलेम में 88.02 प्रतिशत मतदान हुआ, जो राज्य के ऊंचे मतदान वाले जिलों में शामिल रहा।
कोयंबटूर में 82.33 प्रतिशत, चेन्नई में 81.34 प्रतिशत, चेंगलपट्टू में 82.41 प्रतिशत और अरियालुर में 83.09 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। वहीं कडलूर में 81.91 प्रतिशत और कांचीपुरम में 84.92 प्रतिशत मतदान हुआ।
दक्षिणी जिलों में भी मतदान प्रतिशत उल्लेखनीय रहा। मदुरै में 77.89 प्रतिशत, रामनाथपुरम में 74.41 प्रतिशत, तेनकासी में 79.28 प्रतिशत और शिवगंगा में 74.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। कन्याकुमारी में 73.44 प्रतिशत मतदान सबसे कम में से एक रहा।
इसके अलावा तिरुनेलवेली में 75.10 प्रतिशत, नीलगिरी में 75.90 प्रतिशत, तंजावुर में 78.07 प्रतिशत और थेनी में 78.73 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। थूथुकुडी में 77.56 प्रतिशत, तिरुचिरापल्ली में 82.76 प्रतिशत और तिरुपुर में 86.33 प्रतिशत मतदान हुआ।
मतदान को लेकर उत्साह और लोकतंत्र की मजबूती
High Voter Turnout : दोनों राज्यों में मतदान के उच्च प्रतिशत ने यह संकेत दिया है कि जनता लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभा रही है। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखी गईं। कई स्थानों पर महिलाओं, युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। सभी मतदान केंद्रों पर केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस की तैनाती की गई थी। इसके अलावा वेबकास्टिंग और निगरानी की व्यवस्था भी की गई थी ताकि किसी भी तरह की अनियमितता को रोका जा सके।
राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण चुनाव
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु दोनों राज्यों के चुनाव राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान के बाद अब 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग होनी है। इसके बाद 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।
तमिलनाडु में भी राजनीतिक दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखा जा रहा है, जहां विभिन्न गठबंधनों और दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
भारत का मजबूत लोकतंत्र
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए इस चुनाव ने एक बार फिर साबित किया है कि भारत का लोकतंत्र दुनिया के सबसे मजबूत लोकतंत्रों में से एक है। रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत यह दर्शाता है कि जनता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है और देश के भविष्य को लेकर गंभीर है।
आने वाले दिनों में जब चुनाव परिणाम सामने आएंगे, तब यह स्पष्ट होगा कि जनता ने किसे अपना जनादेश दिया है, लेकिन फिलहाल दोनों राज्यों में मतदान का यह उत्साह लोकतंत्र की जीवंतता को दर्शाता है






