नई दिल्ली, 26 जनवरी। UGC New Rule : यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) ने 13 जनवरी 2026 को “प्रमोशन ऑफ़ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन” लागू किया, लेकिन इस नियम का विरोध तेज़ी से सामने आया है। अखिल भारतीय सवर्ण मोर्चा के अध्यक्ष संजीव कुमार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील डॉ. ए पी सिंह के माध्यम से इस नियम के खिलाफ संवैधानिक शिकायत भेजी है।
UGC New Rule : संविधान का उल्लंघन?
UGC New Rule : डॉ. ए पी सिंह ने अपनी लीगल रिप्रजेंटेशन में कहा है कि यह नियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का खुला उल्लंघन करता है। उन्होंने बताया कि यह नियम कानून जैसा प्रभाव डालता है, लेकिन इसे भारत की संसद नहीं बल्कि एक अधिकृत संस्था (UGC) ने बनाया है।
सवर्ण वर्ग के लिए झूठे आरोप और असमानता
डॉ. सिंह ने कहा कि यह नियम सवर्ण वर्ग के खिलाफ भेदभावपूर्ण है। यह सामान्य वर्ग को “डिफ़ॉल्ट अपराधी” मानता है और निष्पक्षता के सिद्धांत के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि जातिगत भेदभाव की झूठी शिकायतों के लिए कोई सजा नहीं है, लेकिन झूठी शिकायतों से छात्रों का करियर बर्बाद हो जाता है।
कॉलेजों पर 90 दिन का दबाव, लेकिन भेदभाव बढ़ेगा
नए नियम के अनुसार कॉलेजों को इसे लागू करने के लिए 90 दिनों का समय दिया गया है। डॉ. सिंह का कहना है कि यह नियम कैंपस में भेदभाव को खत्म करने के बजाय जातिगत भेदभाव को बढ़ाएगा।
ब्रेन ड्रेन और आर्थिक नुकसान का खतरा
UGC New Rule : डॉ. सिंह ने चेतावनी दी कि इस नियम के कारण भारतीय छात्र विदेशों की ओर पलायन करेंगे, जिससे ब्रेन ड्रेन और आर्थिक नुकसान होगा। नियम ने नेचुरल जस्टिस के सिद्धांत का उल्लंघन किया है क्योंकि कोई व्यक्ति अपने मामले में खुद न्यायाधीश नहीं बन सकता।
तत्काल वापसी की मांग
UGC New Rule : डॉ. सिंह और सवर्ण मोर्चा की ओर से जोर देकर कहा गया है कि यह नियम तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाना चाहिए, अन्यथा इसके दुरुपयोग से पहले से मौजूद एससी, एसटी, और अन्य एक्ट्स की शिकायतें और बढ़ेंगी।







