Death Penalty Method : कम पीड़ादायक विकल्प की मांग पर सुनवाई पूरी
नई दिल्ली, 22 जनवरी। Death Penalty Method : सुप्रीम कोर्ट में मौत की सजा के तरीके को लेकर एक अहम कानूनी बहस सामने आई है। फांसी की जगह कम तकलीफदेह विकल्प अपनाने की मांग वाली याचिका पर शीर्ष अदालत ने सुनवाई पूरी कर ली है और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
फांसी को बताया क्रूर और अमानवीय
Death Penalty Method : यह याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा द्वारा दायर की गई है। याचिका में फांसी को मौत देने का पुराना, क्रूर और अमानवीय तरीका बताया गया है। दलील दी गई कि फांसी में दोषी को लंबे समय तक काफी पीड़ा सहनी पड़ती है, जो मानवाधिकारों के खिलाफ है।
लीथल इंजेक्शन का सुझाव
Death Penalty Method : याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने सुझाव रखा कि फांसी के बजाय जहर के इंजेक्शन यानी लीथल इंजेक्शन को अपनाया जाए, जिससे कम समय में और कम दर्द के साथ मृत्यु हो सके। साथ ही यह भी मांग की गई कि कम से कम दोषी को यह विकल्प दिया जाए कि वह फांसी चाहता है या इंजेक्शन के जरिए मौत।
केंद्र सरकार का पक्ष : फांसी ही सुरक्षित तरीका
Death Penalty Method : सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल ने बताया कि इस संवेदनशील मुद्दे पर विचार के लिए सरकार ने एक समिति गठित की है, जो मौत की सजा के वैकल्पिक तरीकों का अध्ययन कर रही है। हालांकि, सरकार का रुख स्पष्ट रहा कि फिलहाल फांसी को ही सबसे तेज और सुरक्षित तरीका माना जाता है, इसलिए इसमें बदलाव के पक्ष में नहीं है।
सरकार के रुख पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी
Death Penalty Method : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के इस रुख पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि समय के साथ कानून और व्यवस्था में बदलाव जरूरी होते हैं, लेकिन सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती नहीं दिख रही। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि भारतीय संविधान दयालु और जीवंत है और उसमें सम्मानजनक मृत्यु का अधिकार भी निहित होना चाहिए।
2017 से लंबित है याचिका
Death Penalty Method : गौरतलब है कि यह याचिका वर्ष 2017 में दायर की गई थी और अब तक इस पर कई बार सुनवाई हो चुकी है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता और केंद्र सरकार दोनों को तीन सप्ताह के भीतर अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया है।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में अहम मामला
Death Penalty Method : यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दुनिया के कई देशों ने फांसी जैसे तरीकों को छोड़कर लीथल इंजेक्शन जैसे विकल्प अपनाए हैं। भारत में हालांकि अभी भी आपराधिक प्रक्रिया संहिता (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) के तहत मौत की सजा देने का तरीका फांसी ही निर्धारित है।
सुप्रीम कोर्ट का आने वाला फैसला न सिर्फ कानून, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी ऐतिहासिक साबित हो सकता है।







