पटना, 2 जनवरी। Deva Gupta Case : मोतिहारी की सियासत और कानून-व्यवस्था के संगम पर खड़ा एक मामला इन दिनों पूरे बिहार में चर्चा का विषय बन गया है। नगर निगम की मेयर प्रीति कुमारी के पति देवा गुप्ता को पटना हाईकोर्ट से ऐसी राहत मिली है, जिसने पुलिस महकमे से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल तेज कर दी है। हाईकोर्ट ने देवा गुप्ता की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है, जिससे एक तरफ उन्हें कानूनी संजीवनी मिली है तो दूसरी तरफ मोतिहारी पुलिस को बड़ा झटका लगा है।
Deva Gupta Case : ‘टॉप-100’ की सूची और विवाद की शुरुआत
Deva Gupta Case : 20 दिसंबर 2025 को मोतिहारी के पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने जिले के सबसे कुख्यात अपराधियों की टॉप-100 सूची जारी की थी। इस सूची में जमीन माफिया, शराब तस्कर, हत्या और लूट जैसे संगीन अपराधों से जुड़े नाम शामिल थे। चौंकाने वाली बात यह रही कि इस सूची में सबसे ऊपर देवा गुप्ता का नाम दर्ज था। पुलिस का दावा था कि उनके खिलाफ 28 आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह जिले के सबसे प्रभावशाली अपराधियों में गिने जाते हैं।
एक लाख का इनाम, 10 दिन का अल्टीमेटम
Deva Gupta Case : पुलिस ने देवा गुप्ता पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित करते हुए 10 दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करने का अल्टीमेटम भी दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसपी ने जनता से अपील की कि यदि किसी को उनके ठिकाने की जानकारी मिले तो पुलिस को सूचित करें, सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
हाईकोर्ट की एंट्री, पुलिस की रफ्तार पर ब्रेक
Deva Gupta Case : पुलिस के बढ़ते दबाव के बीच देवा गुप्ता ने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अग्रिम जमानत से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संजय कुमार की एकलपीठ ने पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिया कि अदालत की अनुमति के बिना देवा गुप्ता की गिरफ्तारी नहीं की जाए। कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए अगली सुनवाई 15 दिनों बाद तय की है।
देवा गुप्ता के वकील ने दलील दी कि उनके खिलाफ दर्ज अधिकतर मामले पुराने हैं और मौजूदा कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। अदालत ने फिलहाल इन तर्कों को ध्यान में रखते हुए राहत दी है।
राजनीति और अपराध का संगम
Deva Gupta Case : देवा गुप्ता सिर्फ एक आरोपित ही नहीं, बल्कि एक राजनीतिक चेहरा भी हैं। वह 2025 के विधानसभा चुनाव में राजद के टिकट पर मोतिहारी सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि, उन्हें जीत नहीं मिली। पुलिस के अनुसार, उन पर चोरी, लूट, रंगदारी और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप हैं। 2018 में चिरैया थाना क्षेत्र में जमीन विवाद के दौरान हत्या और 2022 में एक व्यापारी की हत्या का मामला भी उनके नाम से जुड़ा है।
‘साजिश’ बनाम ‘सख्ती’ की जंग
Deva Gupta Case : इस पूरे मामले ने सियासी रंग भी पकड़ लिया है। मेयर प्रीति कुमारी और राजद नेताओं का कहना है कि देवा गुप्ता को राजनीतिक साजिश के तहत निशाना बनाया जा रहा है। उनका आरोप है कि सत्ता पक्ष के दबाव में पुलिस एकतरफा कार्रवाई कर रही है। वहीं, भाजपा और जदयू नेताओं ने इसे राजद की अपराध-प्रेरित राजनीति का उदाहरण बताते हुए कानून को अपना काम करने देने की बात कही है।
आगे क्या?
Deva Gupta Case : हाईकोर्ट की राहत ने फिलहाल देवा गुप्ता को सांस लेने का मौका दिया है, लेकिन यह मामला अभी अपने अंतिम पड़ाव से दूर है। आने वाली सुनवाइयों में यह तय होगा कि क्या होता है। इतना तय है कि मोतिहारी की राजनीति और कानून-व्यवस्था के लिहाज से यह केस आने वाले दिनों में और बड़े तूफान का रूप ले सकता है।







