नई दिल्ली, 2 जनवरी। Shabdotsav 2026 : दिल्ली में तीन दिवसीय सांस्कृतिक और साहित्यिक महोत्सव ‘शब्दोत्सव 2026’ का भव्य शुभारंभ शुक्रवार को किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने किया। आयोजन की शुरुआत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन से हुई, जिससे पूरे परिसर में देशभक्ति का माहौल बन गया। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
Shabdotsav 2026 : दुनिया भर से आते थे शोधार्थी
Shabdotsav 2026 : केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने अपने संबोधन में कहा कि शब्दोत्सव 2026 में भारत की संस्कृति की एक जीवंत झलक देखने को मिली है। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में भारत विश्व गुरु था और नालंदा तथा तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों में दुनिया भर से शोधार्थी आते थे। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लागू की गई नई शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और मूल्यों को युवाओं तक पहुंचाना है, साथ ही शिक्षा को कौशल विकास से जोड़ना भी इसका अहम हिस्सा है।
भारत की विविधता, सबसे बड़ी ताकत
Shabdotsav 2026 : हर्ष मल्होत्रा ने भारत की विविधता को उसकी सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि देश में 340 से अधिक जीवंत भाषाएं और 1600 से ज्यादा बोलियां बोली जाती हैं। यह विविधता ही भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और एकता का प्रतीक है, जो दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलती।
मंत्री कपिल मिश्रा ने यह कहा
Shabdotsav 2026 : दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ और ‘जय श्रीराम’ के नारों के साथ की। उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में राजधानी दिल्ली को वैचारिक आतंकवाद का केंद्र बनाने की कोशिशें हुईं, जिससे कला और संस्कृति या तो समाप्त हो गईं या फिर देश और धर्म विरोधी दिशा में जाने लगीं। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली की सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित करने का कार्य किया जा रहा है।
कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से कई भव्य कार्यक्रम
कपिल मिश्रा ने कहा कि पिछले 10 महीनों में कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा कई भव्य और दिव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है, जो पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में कभी देखने को नहीं मिला। उन्होंने ‘शब्दोत्सव’ को इसी सांस्कृतिक पुनर्जागरण की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली को नक्सली सोच, झूठे इतिहास और धर्म विरोधी विचारधाराओं से मुक्त कराने का संकल्प लिया गया है और ‘दिल्ली शब्दोत्सव’ उसी दिशा में पहला कदम है।
अपने भाषण के अंत में कपिल मिश्रा ने कहा कि हिंसा और आतंकवाद की जड़ें पहले दिमाग में जन्म लेती हैं, बाद में हाथों में हथियार आते हैं। उन्होंने कहा कि विचारधारा के स्तर पर आतंकवाद से लड़ना जरूरी है और ‘शब्दोत्सव 2026’ इसी मानसिकता के खिलाफ दिल्ली की एक वैचारिक “सर्जिकल स्ट्राइक” है।







