नई दिल्ली, 16 अप्रैल । Women Reservation Debate : नई दिल्ली में लोकसभा के दौरान महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का विषय देश की आधी आबादी से जुड़ा हुआ है, लेकिन सरकार इस मुद्दे की आड़ में अन्य वर्गों, खासकर ओबीसी समाज के साथ अन्याय कर रही है।
प्रियंका ने किया इतिहास का उल्लेख
Women Reservation Debate : प्रियंका गांधी ने अपने भाषण में इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं को समान अधिकार देने की सोच कोई नई नहीं है, बल्कि इसकी नींव आजादी से पहले ही रखी जा चुकी थी। उन्होंने बताया कि 1928 में मोतीलाल नेहरू की रिपोर्ट और 1931 के कराची अधिवेशन में महिलाओं को बराबरी का अधिकार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए थे। उसी दौर में “वन वोट, वन सिटीजन, वन वैल्यू” का सिद्धांत स्थापित हुआ, जिसके कारण भारत में महिलाओं को आजादी के साथ ही मतदान का अधिकार मिल गया, जबकि दुनिया के कई विकसित देशों में महिलाओं को यह अधिकार काफी देर से मिला।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में पंचायत और नगरपालिकाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की पहल कांग्रेस सरकार ने की थी। हालांकि, शुरुआती दौर में इसका विरोध हुआ, लेकिन बाद में पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व में इसे लागू किया गया, जिससे आज लाखों महिलाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था में भागीदारी कर रही हैं।
राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश में सरकार
Women Reservation Debate : प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार महिला आरक्षण के नाम पर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि 2010 में कांग्रेस ने लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को आरक्षण देने का प्रयास किया था और राज्यसभा में इसे पारित भी कराया गया, लेकिन लोकसभा में सहमति नहीं बन पाई। बाद में राहुल गांधी ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर महिला आरक्षण लागू करने की मांग की थी।
मौजूदा विधेयक पर उठाया सवाल
Women Reservation Debate : उन्होंने मौजूदा विधेयक पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें महिला आरक्षण को 2029 तक लागू करने की बात कही गई है और इसके लिए संसद की सीटों को 543 से बढ़ाकर लगभग 850 करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही परिसीमन आयोग का गठन कर 2011 की जनगणना के आधार पर नए सिरे से सीटों का निर्धारण करने की योजना है। उन्होंने कहा कि पहली नजर में यह सामान्य प्रक्रिया लगती है, लेकिन गहराई से देखने पर इसके पीछे राजनीतिक मंशा नजर आती है।
जातीय जनगणना से बच रही सरकार
Women Reservation Debate : प्रियंका गांधी ने सरकार से सवाल किया कि नई जनगणना और जातीय जनगणना कराए बिना पुराने आंकड़ों के आधार पर आगे बढ़ने की क्या जरूरत है। उनका कहना था कि जब तक ओबीसी वर्ग की वास्तविक जनसंख्या सामने नहीं आएगी, तब तक उन्हें उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर जातीय जनगणना से बच रही है ताकि ओबीसी वर्ग की वास्तविक ताकत सामने न आ सके।
उन्होंने यह भी कहा कि संसद के विस्तार और परिसीमन के जरिए राज्यों के प्रतिनिधित्व में बदलाव किया जा सकता है, जिससे लोकतंत्र कमजोर होगा। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और सरकार राजनीतिक फायदे के लिए सीमाओं में बदलाव कर सकती है, जैसा कि कुछ राज्यों में पहले भी देखा गया है।
तो चाणक्य भी हैरान रह जाते
Women Reservation Debate : गृह मंत्री अमित शाह पर तंज कसते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि अगर प्राचीन काल के महान रणनीतिकार चाणक्य आज जीवित होते, तो वे भी इस तरह की राजनीतिक चालों को देखकर हैरान रह जाते। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले से पूरी रणनीति बनाकर काम कर रही है, जिसमें विपक्ष को पर्याप्त चर्चा का मौका भी नहीं दिया जा रहा।
सभी को समान प्रतिनिधित्व दिया जाए
Women Reservation Debate : अपने भाषण के अंत में प्रियंका गांधी ने कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे का इस्तेमाल सत्ता बनाए रखने के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि मौजूदा 543 सीटों के भीतर ही 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए और सभी वर्गों को समान प्रतिनिधित्व दिया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि देश की महिलाएं अपने अधिकारों के लिए लड़ना जानती हैं और उन्हें केवल राजनीतिक साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे इस मुद्दे पर साहसिक और निष्पक्ष निर्णय लें, जिससे सभी वर्गों को न्याय मिल सके और लोकतंत्र की मूल भावना बनी रहे।






