'एन पी एन लाइव'

Women Reservation Bill : दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाई सरकार, महिला आरक्षण विधेयक गिरा

SHARE:

Women Reservation Bill Fails in Lok Sabha Without Two-Thirds Majority

नई दिल्ली, 17 अप्रैल। Women Reservation Bill : लोकसभा में महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक उस समय पारित नहीं हो सका जब सरकार आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने में विफल रही। इस कारण बहुप्रतीक्षित यह बिल सदन में ही गिर गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मतदान के बाद बताया कि विधेयक पर विचार के दौरान हुए मत विभाजन में इसके पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सदस्यों ने इसके विरोध में मतदान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि यह विधेयक आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर पाया, इसलिए इसे आगे बढ़ाने की प्रक्रिया यहीं समाप्त हो जाती है और इस पर आगे कोई कार्यवाही संभव नहीं है।

राजनीतिक हलचल हुई तेज

Women Reservation Bill :  संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी सदन को सूचित किया कि सरकार फिलहाल अन्य दो विधेयकों को भी आगे नहीं बढ़ाएगी। इस घटनाक्रम के चलते सदन में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और महिला आरक्षण को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।

मत विभाजन के जरिए कराया जाता है मतदान

Women Reservation Bill :  दरअसल, विपक्ष के कड़े विरोध के बीच संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 को मतदान के लिए रखा गया था। संविधान संशोधन से जुड़े विधेयकों पर सामान्य ध्वनि मत के बजाय मत विभाजन के जरिए मतदान कराया जाता है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कितने सांसद समर्थन में हैं और कितने विरोध में। इस प्रक्रिया में प्रत्येक वोट की गिनती दर्ज की जाती है, जो ऐसे महत्वपूर्ण विधेयकों के लिए अनिवार्य होती है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत किसी भी संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो शर्तें आवश्यक होती हैं—पहली, सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और दूसरी, उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई का समर्थन। महिला आरक्षण विधेयक इन दोनों मानकों को पूरा करने में असफल रहा, जिसके चलते यह पारित नहीं हो सका।

अमित शाह ने दिया विपक्ष के सवालों का जवाब

Women Reservation Bill :  इससे पहले, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक पर हुई लंबी चर्चा का जवाब देते हुए विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वह देश की मातृशक्ति को संबोधित करते हुए कहना चाहते हैं कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति में कांग्रेस द्वारा रखा गया प्रस्ताव एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य महिला आरक्षण को वर्ष 2029 से पहले लागू होने से रोकना है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ दल राज्यों के बीच समान प्रतिनिधित्व की बात कर रहे हैं, जिस पर वे सहमत हैं, लेकिन महिला आरक्षण को टालने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा।

महिलाएं देख रही हैं कि अधिकारों में बाधक कौन बना

Women Reservation Bill :  अमित शाह ने आगे कहा कि यदि विपक्ष इस विधेयक के समर्थन में वोट नहीं देता है तो इसके गिरने की संभावना बढ़ जाती है, लेकिन देश की महिलाएं यह देख रही हैं कि उनके अधिकारों में बाधा कौन बन रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि जनता इस स्थिति को समझ रही है और समय आने पर उचित निर्णय लेगी।

संविधान के प्रावधानों पर प्रकाश डाला

Women Reservation Bill :  अपने भाषण में उन्होंने संविधान के प्रावधानों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण का समर्थन नहीं करता है। उनके अनुसार, कुछ राजनीतिक दल तुष्टिकरण की राजनीति के चलते मुस्लिम आरक्षण की मांग उठा रहे हैं, जो संविधान की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने सवाल उठाया कि संविधान के किस अनुच्छेद में धर्म के आधार पर आरक्षण का प्रावधान दिया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि तथाकथित इंडिया महागठबंधन अपने राजनीतिक हितों के लिए संविधान की गलत व्याख्या कर रहा है और धार्मिक आधार पर आरक्षण की मांग को बढ़ावा दे रहा है। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और धर्म के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव या विशेष प्रावधान स्वीकार्य नहीं है।

फिर से अनिश्चितता

इस पूरे घटनाक्रम के बाद महिला आरक्षण विधेयक का भविष्य एक बार फिर अनिश्चितता में घिर गया है। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और यह मुद्दा आने वाले समय में भी राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बना रह सकता है।

Leave a Comment