पटना, 26 जुलाई । Tej Pratap Arrest : जनशक्ति जनता दल के सुप्रीमो और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव की गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में नई बहस छिड़ गई है। उनके अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह ने पुलिस की पूरी कार्रवाई को नियमों के विरुद्ध बताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि तेजप्रताप यादव को बिना किसी वैध आधार के हिरासत में लिया गया और गिरफ्तारी के दौरान तथा उसके बाद भारतीय कानून के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
अधिवक्ता के आरोपों ने इस मामले को केवल एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली और कानूनी प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह मामला अदालत तक पहुंच चुका है और सोमवार को जमानत याचिका पर आगे की कानूनी प्रक्रिया होने की संभावना है।
सिटी सेंटर मॉल से हिरासत में लेने का दावा
Tej Pratap Arrest : पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि तेजप्रताप यादव को 25 जुलाई की शाम लगभग 7:30 बजे पटना के सिटी सेंटर मॉल से पुलिस ने हिरासत में लिया था। उनके अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और मॉल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से गिरफ्तारी का समय और स्थान स्पष्ट रूप से सामने आ सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए तो यह साबित हो जाएगा कि पुलिस ने किस समय और किन परिस्थितियों में तेजप्रताप यादव को अपने कब्जे में लिया। अधिवक्ता का दावा है कि गिरफ्तारी के समय पुलिस अधिकारियों ने यह भी नहीं बताया कि उन्हें किस मामले में हिरासत में लिया जा रहा है।
गिरफ्तारी के दौरान नहीं दी गई एफआईआर की जानकारी
अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के समय न तो किसी प्राथमिकी (एफआईआर) की जानकारी दी गई और न ही किसी कानूनी दस्तावेज की प्रति उपलब्ध कराई गई। उन्होंने कहा कि बाद में पुलिस अधिकारियों ने यह जरूर कहा कि संबंधित एफआईआर दर्ज हो चुकी है, लेकिन उसकी प्रति काफी देर तक उपलब्ध नहीं कराई गई।
उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी के दौरान उसे यह बताना कानूनन आवश्यक होता है कि उसे किस अपराध के तहत गिरफ्तार किया जा रहा है। साथ ही संबंधित एफआईआर और आरोपों की जानकारी भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया, जो गंभीर कानूनी प्रश्न खड़े करता है।
नौबतपुर थाने में भी नहीं मिला स्पष्ट जवाब
Tej Pratap Arrest : जगन्नाथ सिंह ने बताया कि वह रात लगभग 10:30 बजे नौबतपुर थाना पहुंचे, जहां कई पुलिस अधिकारी मौजूद थे। उन्होंने अधिकारियों से तेजप्रताप यादव की गिरफ्तारी का आधार और दर्ज मामले की जानकारी मांगी, लेकिन वहां मौजूद किसी अधिकारी ने स्पष्ट उत्तर नहीं दिया।
उन्होंने दावा किया कि पुलिस अधिकारियों ने पहले कहा कि गांधी मैदान थाना से एफआईआर की प्रति आने वाली है। इसके बाद काफी समय तक इंतजार कराया गया, लेकिन फिर भी एफआईआर उपलब्ध नहीं कराई गई। अधिवक्ता का कहना है कि इस तरह की कार्यशैली कानून की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है।
एफआईआर के बिना हस्ताक्षर कराने का आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि पुलिस ने तेजप्रताप यादव से बिना एफआईआर की प्रति दिए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने का प्रयास किया। अधिवक्ता के अनुसार, जब पुलिस उन्हें मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने ले जा रही थी, तब कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया।
उन्होंने इसका विरोध करते हुए कहा कि जब तक एफआईआर और आरोपों की प्रति उपलब्ध नहीं कराई जाएगी, तब तक किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करना उचित नहीं होगा। अधिवक्ता ने इसे कानूनी अधिकारों का उल्लंघन बताया और कहा कि गिरफ्तारी के दौरान निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना पुलिस की जिम्मेदारी होती है।
मजिस्ट्रेट के निर्देश पर मिला मेमो ऑफ अरेस्ट
Tej Pratap Arrest : अधिवक्ता के अनुसार, उनके विरोध के बाद मामला मजिस्ट्रेट के समक्ष पहुंचा। वहां मजिस्ट्रेट के निर्देश पर पुलिस ने मेमो ऑफ अरेस्ट की एक प्रति उपलब्ध कराई। हालांकि उनका आरोप है कि इसके बावजूद एफआईआर, आरोपों की विस्तृत प्रति और रिमांड आदेश की कॉपी अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है।
उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराना आरोपी का कानूनी अधिकार है। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो यह पूरी प्रक्रिया की वैधता पर सवाल खड़ा करता है।
रिहाई के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया
तेजप्रताप यादव की ओर से उनके अधिवक्ता ने अदालत में रिहाई के लिए आवेदन भी दायर किया है। अधिवक्ता के मुताबिक अदालत ने तत्काल राहत देने के बजाय उन्हें सोमवार को नियमित प्रक्रिया के तहत जमानत याचिका दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अब इस मामले में सोमवार को अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्रवाई, गिरफ्तारी की प्रक्रिया और उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों पर विस्तार से बहस होने की संभावना है। कानूनी विशेषज्ञों की नजर भी इस मामले पर टिकी हुई है।
नीट पेपर लीक प्रदर्शन के बाद हुई गिरफ्तारी
Tej Pratap Arrest : गौरतलब है कि शनिवार को नीट पेपर लीक मामले को लेकर आयोजित प्रदर्शन के बाद पुलिस ने तेजप्रताप यादव को गिरफ्तार किया था। पुलिस की कार्रवाई के बाद उन्हें देर रात मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजते हुए बेऊर जेल भेजने का आदेश दिया।
इस गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। विपक्षी दलों और समर्थकों की ओर से विभिन्न स्तरों पर प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, जबकि कानूनी पक्ष भी लगातार सक्रिय बना हुआ है।
पुलिस की चुप्पी से बढ़े सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में अब तक पुलिस की ओर से अधिवक्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न तो गिरफ्तारी की प्रक्रिया को लेकर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया गया है और न ही एफआईआर उपलब्ध कराने में हुई कथित देरी पर कोई बयान दिया गया है।
पुलिस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आने के कारण मामले को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। ऐसे में अब सबकी निगाहें अदालत की आगामी सुनवाई और पुलिस के संभावित जवाब पर टिकी हुई हैं।
अदालती प्रक्रिया पर टिकी अगली नजर
तेजप्रताप यादव की गिरफ्तारी अब केवल एक कानूनी मामला नहीं रह गई है, बल्कि यह पुलिस प्रक्रिया, नागरिक अधिकारों और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न भी खड़े कर रही है। एक ओर अधिवक्ता पुलिस पर नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई और पुलिस के पक्ष के सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी मानकों के अनुरूप थी या अधिवक्ता द्वारा लगाए गए आरोपों में कितना दम है। फिलहाल यह मामला बिहार की राजनीति और कानूनी गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।






