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Dharmendra Pradhan Resigns : धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, बोले- “राष्ट्रसेवा ही मेरे जीवन का सबसे बड़ा संकल्प”

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नई दिल्ली, 25 जुलाई। Dharmendra Pradhan Resigns :  देश की राजनीति और शिक्षा जगत में शनिवार को उस समय हलचल तेज हो गई, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन और नीट-यूजी परीक्षा से जुड़े विवादों के बीच प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र भेज दिया।

अपने इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उनके लिए पद नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा सबसे बड़ी प्राथमिकता रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के युवाओं का भविष्य, उनकी आकांक्षाएं और शिक्षा व्यवस्था की मजबूती हमेशा उनके सार्वजनिक जीवन का केंद्र रही है।

चार दशक की यात्रा, शिक्षा सुधार को बताया जीवन का मिशन

धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए कहा कि वह पिछले चार दशकों से अधिक समय से छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं।

उन्होंने लिखा कि एक मजबूत, समावेशी और भविष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई शिक्षा व्यवस्था ही किसी भी सशक्त राष्ट्र की नींव होती है। देश के युवाओं की उम्मीदों, भावनाओं और उनकी उचित मांगों का सम्मान करना हर जिम्मेदार व्यक्ति का कर्तव्य है।

प्रधान ने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को पूरा करना केवल राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक संकल्प भी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सेवा करने का अवसर मिलने पर आभार व्यक्त किया।

नीट विवाद बना इस्तीफे की पृष्ठभूमि, परीक्षा में अनियमितताओं पर उठे थे सवाल

Dharmendra Pradhan Resigns : धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संदेश में नीट-यूजी परीक्षा विवाद का भी विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 3 मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में कुछ अनियमितताएं सामने आई थीं, जिसके बाद केंद्र सरकार ने तत्काल कदम उठाए।

उन्होंने बताया कि मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी गई और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के लिए कई फैसले लिए गए। परीक्षा को लेकर उठे सवालों के बाद पुनः परीक्षा की व्यवस्था की गई और अगले वर्ष से नीट को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) मोड में कराने का निर्णय लिया गया।

उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित रखना थी। 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा को व्यवस्थित तरीके से पूरा कराना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, छात्रों और अभिभावकों के सहयोग से पूरा किया गया।

“किसी मेधावी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे”

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि नीट विवाद सामने आने के बाद उन्होंने शुरुआत से ही इसकी जिम्मेदारी स्वीकार की और कभी भी इस परिस्थिति से पीछे नहीं हटे।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी प्रतिभाशाली छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया या किसी अन्य अनियमितता के कारण प्रभावित न हो।

प्रधान ने कहा कि 16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी परिणाम संतोषजनक रहे और इसमें गरीब एवं सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले कई प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने सफलता हासिल की। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों ने छात्रों को भ्रमित करने और स्थिति को बिगाड़ने की कोशिश की, जिससे उन्हें काफी पीड़ा हुई।

युवाओं को बताया भारत की असली ताकत

Dharmendra Pradhan Resigns : अपने संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने युवाओं को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि युवा केवल भारत का भविष्य नहीं हैं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण के वास्तविक कर्ता-धर्ता हैं।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की ताकत पर उनका हमेशा विश्वास रहा है और वह युवाओं की उम्मीदों और सपनों का सम्मान करते हैं।

प्रधान ने कहा कि देश के विद्यार्थियों को भ्रम और गलत सूचनाओं के जाल में फंसने से बचाना जरूरी है। उनका उद्देश्य हमेशा यही रहा है कि छात्र अपनी ऊर्जा पढ़ाई, कौशल विकास और अपने करियर निर्माण में लगाएं।

जंतर-मंतर प्रदर्शन पर जताई चिंता, कहा- राष्ट्रविरोधी ताकतों को मौका नहीं मिलना चाहिए

जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले दस दिनों की घटनाओं ने उन्हें दुखी किया है।

उन्होंने कहा कि यह मामला किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं है, बल्कि देश के युवाओं और उनके भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने चिंता जताई कि ऐसी परिस्थितियों का फायदा देश विरोधी ताकतें उठा सकती हैं।

प्रधान ने कहा कि भारत की एकता और सामाजिक विश्वास को बनाए रखना बेहद जरूरी है। किसी भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी विवादों और राजनीतिक खींचतान में नहीं उलझना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बच्चों को अपना समय पढ़ाई और भविष्य निर्माण में लगाना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपना इस्तीफा भेजने का निर्णय लिया।

प्रधानमंत्री मोदी और सहयोगियों का जताया आभार

इस्तीफा देते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन, विश्वास और सहयोग के लिए वह हमेशा कृतज्ञ रहेंगे।

उन्होंने मंत्रिपरिषद के अपने सहयोगियों, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ उन सभी लोगों का धन्यवाद किया, जिनके साथ उन्हें काम करने का अवसर मिला।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में मिले हर अवसर को उन्होंने राष्ट्रसेवा के रूप में देखा और आगे भी इसी भावना के साथ काम करते रहेंगे।

“भारत माता, ओडिशा और युवाओं के लिए समर्पित रहूंगा”

Dharmendra Pradhan Resigns : अपने संदेश के अंत में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और वह भविष्य में भी देश के लिए समर्पित रहेंगे।

उन्होंने भगवान श्रीजगन्नाथ का स्मरण करते हुए कहा कि आने वाले समय में भी वह भारत माता, ओडिशा की जनता और देश के युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास करते रहेंगे।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और युवाओं के भविष्य को लेकर देशभर में चर्चा तेज है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि केंद्र सरकार शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे सौंपती है और परीक्षा सुधारों को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं

jahanvi singh
Author: jahanvi singh

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